उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने 8 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर 8 अक्टूबर से सरकारी व्हाट्सएप ग्रुप छोड़ने और आय, जाति, निवास व वरासत से जुड़े ऑनलाइन काम का बहिष्कार कर दिया है. प्रदेश की तहसीलों में कार्यरत लेखपालों ने 17 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी है. वेतन विसंगति, स्थानांतरण और पदोन्नति जैसे मुद्दों पर सुनवाई न होने के कारण यह कदम उठाया गया है. लेखपालों ने सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म और राजस्व कार्यों से दूरी बनाकर विरोध दर्ज कराया है. इससे प्रशासनिक कामकाज और आम जनता के दस्तावेज बनने पूरी तरह ठप हो गए हैं.
वेतन विसंगति और ट्रांसफर की मांग पर अड़े
लेखपालों की प्रमुख मांगों में प्रारंभिक वेतनमान लेवल-5/ग्रेड पे 2800 करना शामिल है, जो 2017 से लंबित है. संघ का दावा है कि मई 2025 में 2669 लेखपालों से अंतरमंडलीय स्थानांतरण के आवेदन लिए गए थे, लेकिन करीब 2700 लेखपाल अब भी 400 से 800 किलोमीटर दूर तैनात हैं. इसके अलावा 29 अप्रैल 2026 को डीपीसी पूरी होने के बावजूद चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची जारी नहीं की गई है. 13 सितंबर 2025 को हुई प्रशिक्षण परीक्षा का परिणाम भी अटका हुआ है.
भत्ते बढ़ाने और मूलभूत सुविधाओं की मांग
लेखपाल संघ ने स्टेशनरी भत्ता ₹100 से बढ़ाकर ₹500, नियत यात्रा भत्ते की जगह ₹1500 मोटरसाइकिल भत्ता और विशेष भत्ता ₹1000 प्रतिमाह करने की मांग की है. 1 जून 2017 के आदेश के विपरीत कार्यालयी पटलों पर सम्बद्ध लेखपालों को मुक्त करने की मांग की गई है. ग्राम सचिवालयों में पर्याप्त कक्ष, कंप्यूटर, इंटरनेट, बिजली और शौचालय उपलब्ध कराने तथा लेखपाल पद को टेक्निकल पद घोषित कर लैपटॉप व मोबाइल देने का आग्रह किया गया है.
शासन को दी चेतावनी, असुविधा की जिम्मेदारी तय
संघ ने अयोध्या की सोहावल तहसील में 20 अगस्त 2026 को पंचायत भवन में कार्य कर रहे लेखपाल पर हुए एंटी करप्शन ट्रैप का हवाला दिया है. संघ ने कहा कि एक लेखपाल के पास कई गांवों का दायित्व होने से एक जगह बैठना व्यावहारिक नहीं है. लेखपाल संघ ने स्पष्ट किया है कि यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई तो 17 अक्टूबर से सम्पूर्ण कार्य बहिष्कार होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राजस्व परिषद और शासन की होगी. संघ ने मुख्यमंत्री से तत्काल शासनादेश जारी करने की मांग की है.