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कानपुर सेक्स रैकेट में नया ट्विस्ट: किस-किस की हुई होटल में एंट्री, कौन कितनी देर कमरे में ठहरा, निकल रही पूरी लिस्ट

कानपुर सेक्स रैकेट मामले में गिरफ्तार रोहित वर्मा के फोन से 19 होटलों की लिस्ट मिलने के बाद जांच तेज हो गई है. अब उसके कई वायरल वीडियो सामने आए हैं, जिनमें दबंगई और पुलिस कनेक्शन दिख रहा है. एक दरोगा को लाइन हाजिर किया गया है. पुलिस वीडियो की डिजिटल जांच कर रही है और पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है.

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कानपुर सेक्स रैकेट का आरोपी रोहित वर्मा अरेस्ट (Photo- Screengrab)
कानपुर सेक्स रैकेट का आरोपी रोहित वर्मा अरेस्ट (Photo- Screengrab)

कानपुर में सामने आए सेक्स रैकेट केस से जुड़ी परतें एक-एक कर खुल रही हैं. यूट्यूब पर खुद को पत्रकार बताने वाला रोहित वर्मा अब जेल में है, लेकिन उसके मोबाइल फोन और सोशल मीडिया से जो कुछ निकलकर सामने आ रहा है, उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है.

इस पूरे मामले की शुरुआत कोलकाता की एक महिला की शिकायत से हुई थी. आरोप था कि नौकरी के नाम पर उसे कानपुर बुलाया गया और फिर उसे सेक्स रैकेट में धकेलने की कोशिश की गई. पुलिस ने तेजी दिखाते हुए रोहित वर्मा को गिरफ्तार किया और उसे जेल भेज दिया. महिला का बयान भी मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज कराया गया. लेकिन असली कहानी तब खुलनी शुरू हुई जब पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन की जांच की. सूत्रों के मुताबिक, फोन में शहर के करीब 19 होटलों की एक लिस्ट मिली.  पुलिस ने इन होटलों पर छापेमारी शुरू की और वहां के रिकॉर्ड खंगालने शुरू कर दिए. यह पता लगाने की कोशिश हो रही है कि किन-किन लोगों की एंट्री हुई, कौन-कौन ठहरा और क्या कोई पैटर्न सामने आता है.

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स्पेशल टीम ने संभाली कमान

मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि खुद पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने इसे सीधे अपने स्तर से मॉनिटर किया. महिला की शिकायत मिलते ही एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें दो आईपीएस अधिकारी और कई एसीपी शामिल किए गए. टीम को साफ निर्देश था कोई भी कड़ी छूटनी नहीं चाहिए. यही वजह है कि शुरुआती कार्रवाई के बाद भी जांच लगातार आगे बढ़ रही है और नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं.

रोहित वर्मा की गिरफ्तारी के बाद मामला शांत होता नजर आ रहा था, लेकिन तभी सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल होने लगे. इन वीडियो ने पूरी कहानी का रुख ही बदल दिया. एक वीडियो में रोहित एक युवक के साथ अमानवीय हरकत करता दिख रहा है. दूसरे में किसी की पिटाई करते नजर आता है. एक और क्लिप में वह पुलिस की टोपी पहनकर गाड़ी चलाते हुए रील बना रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा उस वीडियो की है, जिसमें वह कुछ पुलिसकर्मियों के साथ जन्मदिन मनाते हुए दिखाई देता है और वहां बीयर की बौछार होती नजर आती है. इन वायरल वीडियो को देखने के बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर रोहित वर्मा का नेटवर्क कितना बड़ा था. वीडियो में उसकी बॉडी लैंग्वेज, अंदाज और व्यवहार यह संकेत देता है कि उसे कानून का डर कम था. एक क्लिप में वह जिस तरह से एक युवक के साथ बर्ताव करता है, वह सिर्फ आपराधिक मानसिकता ही नहीं, बल्कि संवेदनहीनता की भी झलक देता है. वहीं, पुलिस की टोपी पहनकर वीडियो बनाना और खुलेआम उसे सोशल मीडिया पर डालना यह सब दिखाता है कि उसे अपने ऊपर किसी कार्रवाई का डर नहीं था.

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डिजिटल जांच में जुटी पुलिस

अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन वीडियो की सत्यता और टाइमलाइन तय करना है. क्या ये वीडियो हाल के हैं या पुराने? क्या इनमें दिख रहे लोग वास्तविक पुलिसकर्मी हैं? और क्या इन घटनाओं का सीधे तौर पर सेक्स रैकेट केस से कोई संबंध है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए पुलिस अब डिजिटल फॉरेंसिक जांच कर रही है. डीसीपी वेस्ट एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, आरोपी को पहले ही जेल भेजा जा चुका है. अब जो वीडियो सामने आए हैं, उनकी जांच की जा रही है. सत्यता सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

पुलिस कनेक्शन पर उठे सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चिंता की बात पुलिस से जुड़े कनेक्शन को लेकर सामने आई है. वायरल वीडियो में कुछ पुलिसकर्मियों की मौजूदगी ने विभाग की छवि पर सवाल खड़े कर दिए हैं. जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी की मदद करने के आरोप में दरोगा नितिन यादव को लाइन हाजिर कर दिया गया है.

सोशल मीडिया से बनी इमेज, उसी से खुली परतें

रोहित वर्मा खुद को यूट्यूब पर पत्रकार के रूप में पेश करता था. सोशल मीडिया पर उसकी सक्रियता काफी थी और वह अपने वीडियो के जरिए एक अलग छवि बनाने की कोशिश करता था. लेकिन विडंबना यह रही कि उसी सोशल मीडिया ने उसकी असलियत को उजागर करने का काम भी किया. जो वीडियो कभी ‘इमेज बिल्डिंग’ के लिए बनाए गए होंगे, वही अब जांच एजेंसियों के लिए सबूत बनते नजर आ रहे हैं.

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होटल नेटवर्क और रैकेट की परतें

फोन से मिली होटल लिस्ट अब इस केस की सबसे अहम कड़ी बन गई है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि क्या इन होटलों का इस्तेमाल व्यवस्थित तरीके से किया जा रहा था. क्या बाहर से महिलाओं को लाकर यहां ठहराया जाता था? और क्या इसमें किसी संगठित नेटवर्क की भूमिका थी? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में इस केस की दिशा तय करेंगे.

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