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सर्दियों में SIR ड्यूटी, गर्मियों में जनगणना... छुट्टियों में भी फील्ड में शिक्षक

कानपुर में भीषण गर्मी के बीच जनगणना ड्यूटी निभा रहे शिक्षक रोज सुबह से दोपहर तक घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटा रहे हैं. शिक्षकों के मुताबिक कई लोग शुरुआत में निजी जानकारी साझा करने में झिझकते हैं, लेकिन प्रक्रिया समझाने पर सहयोग करते हैं. गांवों में बेहतर सहयोग मिल रहा है, जबकि शहरों की कॉलोनियों में गेट पर ही सर्वे पूरा हो रहा है.

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गांवों में मिला बेहतर सहयोग.(Photo-ITG)
गांवों में मिला बेहतर सहयोग.(Photo-ITG)

देशभर में चल रही जनगणना प्रक्रिया के बीच भीषण गर्मी में ड्यूटी निभा रहे शिक्षकों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. कानपुर में जनगणना कार्य में लगे शिक्षक सुधांशु ने बातचीत में बताया कि सर्दियों में SIR ड्यूटी और अब गर्मियों में सुबह से दोपहर तक तेज धूप में घर-घर जाकर लोगों से जानकारी जुटाना आसान नहीं है, लेकिन सरकारी जिम्मेदारी होने के कारण शिक्षक लगातार फील्ड में काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि गर्म हवाओं और तेज धूप के बीच लगातार सफर करना काफी चुनौतीपूर्ण हो गया है.

शिक्षक के मुताबिक, सर्वे के दौरान कई लोग अपनी आय, संपत्ति और परिवार से जुड़ी निजी जानकारी साझा करने में शुरुआत में झिझक दिखाते हैं. खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पहले यह जानना चाहते हैं कि यह सर्वे किसी सरकारी योजना से जुड़ा है या नहीं और कहीं जानकारी देने से उनके लाभ प्रभावित तो नहीं होंगे.

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उन्होंने बताया कि जब लोगों को समझाया जाता है कि सरकार के लिए सही आंकड़े जरूरी हैं, ताकि योजनाएं बेहतर तरीके से बनाई जा सकें और आपात स्थिति में सूचना प्रसारण आसान हो, तब लोग सहयोग करने लगते हैं. शिक्षक ने कहा कि अधिकतर लोग प्रक्रिया समझने के बाद पूरी जानकारी उपलब्ध करा देते हैं.

गांवों में मिला बेहतर सहयोग, शहरों में गेट पर पूरी हो रही प्रक्रिया

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जनगणना ड्यूटी में लगे शिक्षक ने बताया कि अब तक ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जहां किसी परिवार ने जानबूझकर जानकारी छिपाने की कोशिश की हो. लोग सर्वे को लेकर कई सवाल जरूर पूछते हैं, लेकिन जब उन्हें पूरी प्रक्रिया स्पष्ट कर दी जाती है, तो वे सहयोग करने लगते हैं.

शिक्षक के अनुसार शहरों की गेटेड कॉलोनियों और अपार्टमेंट्स में ज्यादातर लोग गेट पर ही बातचीत कर प्रक्रिया पूरी कर लेते हैं. वहीं गांवों में लोगों का व्यवहार अधिक सहयोगात्मक देखने को मिला है. उन्होंने बताया कि कई ग्रामीण परिवार शिक्षकों को घर के अंदर बुलाकर आराम से पूरी जानकारी देते हैं.

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पहले से जनगणना को लेकर जागरूकता फैलाए जाने का भी फायदा मिल रहा है. लोगों में अब इस प्रक्रिया को लेकर पहले की तुलना में अधिक समझ देखने को मिल रही है, जिससे फील्ड में काम कुछ हद तक आसान हुआ है.

सुबह साढ़े छह बजे से फील्ड में उतर रही टीमें

शिक्षक ने बताया कि सरकार की ओर से उन्हें आईडी कार्ड और नियुक्ति पत्र दिए गए हैं. इन्हें दिखाने के बाद लोगों का भरोसा आसानी से बन जाता है और सर्वे के दौरान पहचान को लेकर ज्यादा परेशानी नहीं होती. उन्होंने कहा कि अधिकांश लोग दस्तावेज देखने के बाद सहयोग करने लगते हैं.

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भीषण गर्मी को लेकर शिक्षक ने बताया कि जनगणना टीम रोज सुबह करीब साढ़े छह बजे से फील्ड में निकलती है और दोपहर 12 से 1 बजे के बीच लौटती है. तेज धूप और गर्म हवाओं के बीच लगातार काम करना काफी कठिन हो गया है. उन्होंने यह भी कहा कि पहले अन्य सरकारी ड्यूटी और अब गर्मियों की छुट्टियों में जनगणना कार्य दिए जाने से शिक्षकों को आराम का समय नहीं मिल पा रहा है.

डिजिटल सेल्फ-रजिस्ट्रेशन को लेकर शिक्षक ने बताया कि जिन घरों में युवा सदस्य हैं और स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं, वहां कई लोग पहले से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर चुके होते हैं. कई युवाओं ने यूट्यूब और अन्य माध्यमों से प्रक्रिया समझकर पहले ही आईडी जनरेट कर ली है, जिससे जनगणना टीम का काम काफी आसान हो रहा है.

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