नेपाल और भारत की खुली सीमा, लगातार बढ़ता निर्माण, नई आबादी और बदलती तस्वीर. उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले के सोनौली बॉर्डर इलाके में डेमोग्राफी बदलाव को लेकर अब स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं. आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट में कई ऐसे दावे सामने आए हैं, जिन्होंने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.
कई वार्डों में बस रही नई आबादी
भारत-नेपाल बॉर्डर से सटे सोनौली इलाके में बदलती आबादी और तेजी से हो रहे निर्माण को लेकर स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ती जा रही है. कई वार्डों में नई आबादी बसने और बड़े स्तर पर निर्माण कार्य होने के दावे किए जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि कई ऐसे परिवार यहां आकर बस गए हैं, जिनके बारे में आसपास रहने वालों को भी जानकारी नहीं है. नए मोहल्ले और मकान लगातार बन रहे हैं और क्षेत्र की तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है.
लगातार कैसे हो रहे हैं नए निर्माण?
यहां पूर्व प्रधान, महेंद्र जायसवाल कहते हैं कि 'लगातार नए निर्माण हो रहे हैं, इतने लोग कहां से आ रहे हैं, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है. वार्ड 10, 11, 12 और 13 में बड़ा बदलाव दिखाई दे रहा है.' आज तक की ग्राउंड रिपोर्ट के दौरान बॉर्डर इलाके में एक बड़ी दरगाह की बाउंड्री भी दिखाई दी, जिसका निर्माण अधूरा पड़ा मिला. स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि यह
निर्माण कब और कैसे शुरू हुआ.
स्थानीय लोग कर रहे हैं जांच की मांग
यह भी सामने आया कि आधार कार्ड बनवाने के बाद बॉर्डर क्षेत्र में लोगों की आवाजाही और आसान हो जाती है. स्थानीय लोग इसकी जांच की मांग कर रहे हैं. सोनौली बॉर्डर से नेपाल जाने वाले एक शॉर्टकट रास्ते पर पहले SSB की चौकी हुआ करती थी, लेकिन अब वहां सिर्फ ढांचा दिखाई देता है. स्थानीय लोगों का दावा है कि इसी रास्ते से अवैध आवाजाही होती रहती है. करीब 10 साल से निर्माण कार्य से जुड़े एक ठेकेदार ने बताया कि इलाके में लगातार नए मकान और दुकानें बन रही हैं. उनका कहना है कि कई लोग जमीन खरीद रहे हैं, लेकिन वे कहां से आ रहे हैं, इसकी जांच होनी चाहिए.
पहले 900 घर थे, अब 2000 से पार हुई संख्या
एक स्थानीय ठेकेदार ने भी कहा कि, 'निर्माण लगातार बढ़ रहा है, लोग बाहर से आकर जमीन खरीद रहे हैं, जांच होगी तो स्थिति साफ होगी' वार्ड 12 से जुड़े मनोनीत पार्षद प्रेम जायसवाल का दावा है कि इलाके में वोटरों की संख्या तेजी से बढ़ी है. उनका कहना है कि पहले जहां करीब 900 घर थे, अब संख्या 2000 से ऊपर पहुंच गई है. उन्होंने कहा कि 'इतनी तेजी से आबादी और वोटर कैसे बढ़े, इसकी जांच होनी चाहिए.'
नेपाल सीमा से घुसपैठ की आशंका
कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाए कि नेपाल बॉर्डर के रास्ते घुसपैठ की आशंका बनी रहती है. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लोगों ने सुरक्षा एजेंसियों से जांच की मांग की है. स्थानीय निवासी ओम प्रकाश वर्मा का कहना है कि पिछले कई वर्षों में बॉर्डर इलाके की डेमोग्राफी तेजी से बदली है और इस पूरे मामले की विस्तृत जांच की जरूरत है.
भारत-नेपाल सीमा खुली होने के कारण यहां आवाजाही आसान रहती है. ऐसे में स्थानीय लोग लगातार सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन से सत्यापन और निगरानी बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. सोनौली बॉर्डर इलाके में बदलती आबादी, तेजी से बढ़ते निर्माण और स्थानीय लोगों के दावों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना होगा कि प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां इन दावों की जांच किस तरह करती हैं.