
रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर लोग अपने-अपने तरीके से भाव प्रकट रहे हैं. इसी कड़ी में एक मुस्लिम लड़की मुंबई से पैदल चलकर अयोध्या जा रही हैं. उनका नाम शबनम शेख है. हिजाब पहने और हाथ में भगवा ध्वज लिए शबनम का जगह-जगह स्वागत किया जा रहा है. मुंबई से अयोध्या की दूरी 1500 किलोमीटर से भी ज्यादा है.
फिलहाल, शबनम 'राम आएंगे...' गीत गुनगुनाते हुए यूपी के महोबा पहुंची हैं. इस दौरान उन्होंने 28 दिन का सफर तय किया है. अभी उन्हें और आगे जाना है, ताकि प्राण प्रतिष्ठा पर रामनगरी पहुंच सकें.
बता दें कि मुंबई से पैदल चली 20 वर्षीय शबनम शेख बीते दिन (गुरुवार) बुंदेलखंड के महोबा पहुंची हैं. 1350 किलोमीटर के सफर में महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के रास्ते महोबा पहुंचीं शबनम का हिंदू संगठनों ने जोरदार स्वागत किया. शबनम बचपन से ही भगवान राम में आस्था रखती चली आई हैं.
पैरों में छाले पड़े, पर नहीं रुके कदम
कड़ाके की ठंड के बीच पैदल यात्रा में शबनम शेख के पैरों में छाले पड़ चुके हैं. लेकिन उनकी आस्था के सामने यह छाले बौने नजर आ रहे हैं. शबनम अपने दोस्तों के साथ भगवान श्री राम की प्राण प्रतिष्ठा में शामिल होकर अपने भाव को उनके सामने रखना चाहती हैं. सफर में तमाम दुश्वारियों के बीच शबनम के चेहरे में ना थकान दिखाई दी और ना ही चेहरे पर कोई मायूसी है. राम नाम और राम भजन गाते हुए शबनम अपने सफर को आसान बना रही हैं.

हिजाब पहने शबनम के हाथ में भगवान राम का ध्वज है. साथ में कुछ दोस्त हैं. डेढ़ हजार किमी से ज्यादा लंबी यात्रा कर वो राम नगरी जा रही हैं. महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश की सीमाओं से होते हुए शबनम अपने सफर के 29वें दिन बुंदेलखंड के महोबा जिले की सीमा में दाखिल हुई हैं. महोबा पहुंचते ही शबनम और उनके साथियों का तमाम संगठन के लोगों ने भव्य स्वागत किया.
शबनम ने क्या कहा?
इतने लंबे सफर के बाद शबनम बताती हैं कि उनके पैरों में छाले पड़ चुके हैं. पैरों का दर्द भी असहनीय है. मगर प्रभु राम से अपार स्नेह और लगन के चलते यह दर्द उन्हें महसूस नहीं हो रहा. शबनम बिना रुके, बिना थके भगवान राम के दरबार जाने के लिए चली जा रही हैं. हाथ में रामध्वज लिए वो राम भजन भी गाती दिखाई दे रही हैं.

शबनम बताती है कि वह मुंबई केनजिस इलाके में रहती हैं. वहां आपसी प्रेम और भाईचारा इस कदर है कि लोग एक दूसरे के त्योहारों को परंपरागत तरीके से मानते चले आ रहे हैं. बकौल शबनम- मैंने अजान के साथ-साथ भजन को भी बचपन से सुना है. जिसके चलते मेरे मन में प्रभु राम के प्रति अपार स्नेह और लगन है. ऐसे में अब जब 500 वर्षों बाद भगवान मंदिर में विराजमान हो रहे हैं तो मैं उनके दर पर जा रही हूं. उस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनना चाहती हूं.