नोएडा के सेक्टर-80 में मजदूरों ने फिर से प्रदर्शन शुरू कर दिया. हालांकि, सोमवार को हुई हिंसा के बाद अलर्ट पुलिस ने फौरन एक्शन लिया और उप्रदवियों को मौके से खदेड़ दिया. इस दौरान कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थरबाजी भी की. फिलहाल, स्थिति नियंत्रण में है और भारी फोर्स मौजूद है. कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है.
गौरतलब है कि यूपी सरकार ने श्रमिक आंदोलन के बाद देर रात मजदूरी बढ़ा दी है. नोएडा/गाजियाबाद में अकुशल मजदूरों को पहले 11313 रुपये महीना मिलते थे लेकिन 1 अप्रैल से 13690 रुपये मिलेंगे. इसी तरह अर्द्धकुशल और कुशल मजदूरों के पैसे बढ़ाए गए हैं. प्रदेश के अन्य नगर निगम और जिलों में भी अलग-अलग रेट वृद्धि की गई है.
उत्तर प्रदेश में हाल ही में अधिसूचित दरें इस प्रकार हैं:
अकुशल श्रमिक: ₹11,313.65 प्रति माह (दैनिक: ₹435.14)
अर्धकुशल श्रमिक: ₹12,446 प्रति माह (दैनिक: ₹478.69)
कुशल श्रमिक: ₹13,940.37 प्रति माह (दैनिक: ₹536.16)
उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा में अशांति के बाद श्रमिक श्रेणियों में न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी की है, संशोधित दरें 1 अप्रैल से पूर्वव्यापी प्रभाव से लागू होंगी. गौतमबुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम ने कहा, "वेतन वृद्धि उच्चाधिकार प्राप्त समिति द्वारा की गई है... इस फैसले को कल देर रात सीएम यूपी ने मंजूरी दे दी."
एक आधिकारिक बयान के अनुसार, गौतम बौद्ध नगर और गाजियाबाद में, अकुशल श्रमिकों को अब 11,313 रुपये से बढ़कर 13,690 रुपये प्रति माह मिलेंगे, जबकि अर्ध-कुशल श्रमिकों को 15,059 रुपये और कुशल श्रमिकों को 16,868 रुपये मिलेंगे.
अन्य नगर निगम क्षेत्रों के लिए, संशोधित मासिक वेतन अकुशल श्रमिकों के लिए 13,006 रुपये, अर्ध-कुशल श्रमिकों के लिए 14,306 रुपये और कुशल श्रमिकों के लिए 16,025 रुपये तय किया गया है.
शेष जिलों में अकुशल श्रमिकों को 12,356 रुपये, अर्ध-कुशल श्रमिकों को 13,591 रुपये और कुशल श्रमिकों को 15,224 रुपये प्रति माह मिलेंगे.
यह कदम सोमवार को नोएडा में फैक्ट्री श्रमिकों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन के बाद आया है, जब हजारों लोगों ने उच्च वेतन और बेहतर कामकाजी परिस्थितियों की मांग की थी.
जिले के कुछ हिस्सों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, जिससे सरकार को स्थिति से निपटने और श्रमिकों और नियोक्ताओं के साथ बातचीत करने के लिए एक समिति का गठन करना पड़ा.
बयान के अनुसार, समिति बातचीत और समन्वय के माध्यम से औद्योगिक कलह को हल करने की दिशा में काम कर रही है, साथ ही श्रमिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए और उपायों पर भी विचार कर रही है.
इसमें कहा गया है कि उद्योगों को बढ़ती इनपुट लागत और घटते निर्यात सहित वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वेतन, ओवरटाइम, सुरक्षा और कामकाजी परिस्थितियों के संबंध में श्रमिकों की मांगें "प्रासंगिक और महत्वपूर्ण" बनी हुई हैं.
सरकार ने कहा, "ऐसी स्थिति में, उद्योग और श्रम के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है." सरकार ने कहा कि नए श्रम संहिता के तहत प्रावधानों का उद्देश्य उचित वेतन सुनिश्चित करना और श्रमिकों के हितों की रक्षा करना है.
इसमें कहा गया है कि वह इंडेक्सेशन के आधार पर वेतन में अंतरिम वृद्धि पर विचार कर रहा है और जल्द ही गठित होने वाले वेतन बोर्ड की सिफारिशों पर अंतिम वेतन निर्धारण की प्रक्रिया शुरू करेगा.
इस बीच, सरकार ने सोशल मीडिया पर प्रसारित उन रिपोर्टों को "फर्जी और भ्रामक" बताते हुए खारिज कर दिया, जिनमें दावा किया गया था कि श्रमिकों के लिए प्रति माह 20,000 रुपये का एक समान न्यूनतम वेतन तय किया गया था.
स्थिति स्पष्ट करते हुए, इसने कहा कि नए श्रम कोड के तहत राष्ट्रीय "फ्लोर वेज" निर्धारित करने की प्रक्रिया केंद्रीय स्तर पर चल रही है और ऐसी कोई अधिसूचना जारी नहीं की गई है.
बयान में कहा गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नियोक्ताओं से विशेष रूप से महिला श्रमिकों के लिए सुरक्षित कामकाजी परिस्थितियों को बनाए रखते हुए वेतन का समय पर भुगतान, उचित ओवरटाइम मुआवजा, साप्ताहिक अवकाश, बोनस और सामाजिक सुरक्षा लाभ सुनिश्चित करने की अपील की.