सपनों को लेकर अक्सर लोग कहते हैं कि सुबह के समय देखे गए सपने सच होते हैं. जबकि रात के अन्य समय में देखे गए सपनों का कोई महत्व नहीं होता है. ज्योतिषाचार्य शैलेंद्र पांडेय के अनुसार, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है. उनका कहना है कि सपने सच होने का संबंध समय से नहीं, बल्कि सपने की प्रकृति और उसे देखने वाले व्यक्ति से जुड़ा होता है. आइए जानते हैं कि ज्योतिषाचार्य ने स्वप्न शास्त्र के आधार पर क्या बताया है.
व्यक्ति को कब आते हैं सपने?
ज्योतिषाचार्य का कहना है कि नींद के समय व्यक्ति न तो पूरी तरह सो रहा होता है और न पूरी तरह जगा होता है. इसे नींद और जागने के बीच की अवस्था कहा जा सकता है. इसी अवस्था में शरीर निष्क्रिय और मन सक्रिय रहता है. इस अवस्था में ही किसी व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के सपने दिखाई देते हैं.
क्या सिर्फ सुबह के सपने सच होते हैं?
ज्योतिषविद ने बताया कि यह मान लेना गलत है कि केवल सुबह के सपने ही सच होते हैं. यदि कोई सपना अंतर्ज्ञान या भविष्य के संकेतों से जुड़ा हो, तो वह दिन या रात किसी भी समय देखा गया हो, उसके सच होने की संभावना ज्यादा हो सकती है. इसलिए केवल समय के आधार पर किसी सपने को शुभ या अशुभ मानना उचित नहीं है.
किन लोगों के सपने भविष्य का संकेत देते हैं?
ज्योतिषाचार्य के अनुसार जिन लोगों की अंतर्ज्ञान शक्ति (इंट्यूशन) मजबूत होती है और जिनका मन स्वच्छ व सकारात्मक होता है, उन्हें कई बार सपनों के माध्यम से आने वाली घटनाओं के संकेत मिल सकते हैं. ऐसे लोगों को रात, सुबह या दिन में हल्की झपकी के दौरान भी महत्वपूर्ण सपने संकेत के रूप में दिखाई दे सकते हैं.
हर सपना भविष्यवाणी नहीं होता
ज्योतिषविद ने कहा कि हर सपने को भविष्य से जोड़कर देखना उचित नहीं है. बहुत सारे सपने केवल मन में चल रहे विचारों, इच्छाओं, तनाव या कल्पनाओं का परिणाम भी हो सकते हैं. इसलिए किसी भी सपने का अर्थ समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि वह केवल मानसिक कल्पना है या वास्तव में किसी संकेत की ओर इशारा कर रहा है.
सपनों की सही व्याख्या जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार सपनों का विश्लेषण (ड्रीम इंटरप्रिटेशन) एक अलग विषय है. इसलिए किसी भी सपने को केवल उसके समय के आधार पर सच या झूठ नहीं माना जा सकता. सपने का अर्थ उसकी परिस्थितियों, प्रतीकों और उसे देखने वाले व्यक्ति की मानसिक अवस्था के आधार पर समझना ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है.