
Pitru Paksha 2026: काशी की आध्यात्मिक आस्था और सनातन परंपराओं का आकर्षण सात समंदर पार रहने वाले लोगों को भी यहां खींच लाता है. पितृ पक्ष में अमेरिका के मिशिगन से जैक्सन अपने दिवंगत चाचा नेट की अस्थियां लेकर वाराणसी पहुंचे. उन्होंने गंगा तट पर हिंदू विधि-विधान के अनुसार अस्थि विसर्जन के साथ तीर्थ श्राद्ध और पिंडदान की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की.
अस्थि विसर्जन और श्राद्ध कर्म का पूजन पुरोहित राहुल पांडेय ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कराया. राहुल पांडेय ने बताया कि जैक्सन ने गंगा में अपने चाचा की अस्थियां प्रवाहित करते हुए उनकी आत्मा की शांति और सद्गति के लिए प्रार्थना की. इसके बाद विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान की प्रक्रिया भी संपन्न हुआ.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है. वहीं काशी में पूर्वजों के निमित्त किए जाने वाले श्राद्ध और पिंडदान का विशेष महत्व बताया गया है. इसी आस्था के चलते देश ही नहीं, विदेशों से भी लोग अपने दिवंगत परिजनों के अंतिम संस्कार और धार्मिक कर्मकांड के लिए काशी पहुंचते हैं.
पिंडदान के दौरान दिवंगत व्यक्ति के प्रति श्रद्धा और स्मरण प्रकट किया जाता है, जबकि तर्पण और श्राद्ध के माध्यम से पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है. सनातन परंपरा में इसे दिवंगत परिजनों के प्रति परिजनों का धार्मिक दायित्व भी माना जाता है.

मिशिगन से हजारों किलोमीटर की दूरी तय कर काशी पहुंचे जैक्सन ने अपने चाचा की अस्थियों का गंगा में विसर्जन कर अंतिम धार्मिक दायित्व पूरा किया. गंगा तट पर पूरे श्रद्धाभाव से हुए इस अनुष्ठान में काशी की आध्यात्मिक परंपरा और सनातन संस्कृति की वैश्विक पहुंच की झलक देखने को मिली.
पुरोहित राहुल पांडेय ने बताया कि काशी में अस्थि विसर्जन, तीर्थ श्राद्ध और पिंडदान की परंपरा सदियों पुरानी है. देश-विदेश से श्रद्धालु अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए काशी आते हैं.