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मां इंतजार करती रही, घर पहुंची बेटे की लाश: करोल बाग बस हादसे में बरेली के महेश ने गंवाई जान, अप्रैल में थी शादी

राजधानी दिल्ली के करोल बाग इलाके में मंगलवार और बुधवार की दरम्यानी रात एक बेकाबू टूरिस्ट बस पलट गई. जयपुर से आ रही इस बस की रफ्तार इतनी तेज थी कि इसने हनुमान मंदिर के पास कई पलटियां खाईं. हादसे में बरेली के महेश और बिजनौर के शहबाज की मौत हो गई, जबकि 23 अन्य घायल हैं.

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बरेली का रहने वाला 22 वर्षीय महेश लॉजिस्टिक्स वर्कर था.(Photo: Representational)
बरेली का रहने वाला 22 वर्षीय महेश लॉजिस्टिक्स वर्कर था.(Photo: Representational)

दिल्ली के करोल बाग में हनुमान मंदिर के पास एक तेज रफ्तार टूरिस्ट बस पलट गई, जिसमें यूपी के बरेली निवासी महेश (22) और बिजनौर के शहबाज आलम (30) की जान चली गई. जयपुर से दिल्ली आ रही इस बस में करीब 30 यात्री सवार थे, जिनमें से 23 लोग घायल हुए हैं.

चश्मदीदों के अनुसार, बस की रफ्तार लगभग 100 किमी प्रति घंटा थी और गोलचक्कर पर अचानक मुड़ने के कारण वह अनियंत्रित होकर हवा में दो-तीन बार पलटी. पुलिस और दमकल विभाग ने मौके पर पहुंचकर जेसीबी की मदद से बस को सीधा किया और घायलों को आरएमएल व लेडी हार्डिंग अस्पताल पहुंचाया. राजस्थान के अलवर निवासी ड्राइवर पंकज कुमार को हिरासत में ले लिया गया है.

शादी की खुशियां मातम में बदलीं

बरेली का रहने वाला 22 वर्षीय महेश लॉजिस्टिक्स वर्कर था और हरियाणा के बिलासपुर से अपने भाई मुकेश के साथ घर लौट रहा था. महेश की शादी आगामी 20 अप्रैल को तय थी, लेकिन इस हादसे ने घर की शहनाइयों को मातम में बदल दिया. मुकेश ने बताया कि उन्होंने कई बार ड्राइवर से रफ्तार कम करने को कहा, लेकिन वह नहीं माना. महेश की मां का रो-रोकर बुरा हाल है, जो सुबह अपने बेटे के घर पहुंचने का इंतजार कर रही थीं.

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'मैया इंतजार कर रही थी कि बेटा...'

महेश की मां ने न्यूज एजेंसी से रोते हुए कहा- "मैया इंतजार कर रही थी कि बेटा सुबह आ जाएगा, लेकिन उसकी लाश घर आई." वहीं, भाई मुकेश ने बताया- "हमने ड्राइवर से कई बार बस की रफ्तार धीमी करने को कहा, लेकिन उसने हमारी बात नहीं मानी. वह नशे में भी था. रात करीब 11:30 बजे उसने एक ढाबे के पास बस रोक दी और हमसे फ्रेश होने और खाना खाने को कहा. बस करीब आधे घंटे तक वहीं रुकी रही."

मुकेश ने दावा किया कि बस का रुकने का समय बढ़कर करीब एक घंटा हो गया, और इसी दौरान ड्राइवर ने शराब पी ली. उसने यह भी दावा किया कि बस में कोई भी इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) काम नहीं कर रहा था. "मेरा भाई कई दूसरे लोगों के साथ बस के नीचे फंसा हुआ था. वहां एक महिला थी जिसके पैर तो दिख रहे थे, लेकिन बाकी शरीर बस के नीचे दबा हुआ था. मैंने लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की, और फिर अपने भाई को एम्बुलेंस से अस्पताल ले गया." हालांकि, पुलिस ने इस दावे को गलत बताया कि ड्राइवर नशे में था.  

गर्भवती पत्नी का सहारा छिना

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हादसे का दूसरा शिकार बिजनौर का कपड़ा व्यापारी शहबाज आलम हुआ. शहबाज अपने चचेरे भाई के साथ जयपुर में ईद मनाकर लौट रहा था. वह अपने परिवार का इकलौता कमाने वाला सदस्य था. शहबाज की शादी को अभी करीब एक साल ही हुआ था और उसकी पत्नी तीन महीने की गर्भवती है. परिजनों का आरोप है कि ड्राइवर की लापरवाही और जल्दबाजी ने उनके घर का चिराग बुझा दिया. शहबाज के पीछे उसके बुजुर्ग पिता और छोटा भाई भी हैं.

यात्रियों ने लगाया ड्राइवर पर लापरवाही का आरोप

बस में सवार अन्य यात्रियों ने बताया कि ड्राइवर सफर के दौरान काफी जल्दबाजी में था. एक यात्री ने दावा किया कि बस का इमरजेंसी गेट भी जाम था, जिससे लोगों को निकलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी. हालांकि, पुलिस ने ड्राइवर के नशे में होने के दावों को मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर खारिज किया है, लेकिन वाहन के मैकेनिकल निरीक्षण की बात कही है. घायलों में 4 साल का बच्चा और कई महिलाएं भी शामिल हैं, जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है.

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