scorecardresearch
 

ऑनलाइन गेमिंग की लत, 9 लाख गंवाए, पत्नी के गहने बेचे... लखनऊ के रमन की दर्दभरी कहानी

लखनऊ के रमन यादव की कहानी ऑनलाइन गेमिंग की लत के खतरों को दिखाती है. '91 क्लिप' गेम के चक्कर में उन्होंने करीब 9 लाख रुपये गंवा दिए और पत्नी के गहने तक बेच दिए. पैसे निकालने में विफल रहने के बाद वह घर छोड़कर भटक रहे हैं और रातें स्टेशन पर गुजार रहे हैं. यह मामला बताता है कि कैसे गेमिंग की लत जिंदगी बर्बाद कर सकती है और युवाओं के लिए बड़ी चेतावनी है.

Advertisement
X
रमन यादव की रातें अब स्टेशन पर गुजर रही हैं. Photo ITG
रमन यादव की रातें अब स्टेशन पर गुजर रही हैं. Photo ITG

लखनऊ की भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि आज के दौर की एक बड़ी सच्चाई को उजागर करती है. यह कहानी है 23 वर्षीय रमन यादव की है, जिसकी जिंदगी ऑनलाइन गेमिंग की लत ने पूरी तरह बदल दी. रमन यादव एक सामान्य युवक था, जो अपना जनसेवा केंद्र चलाता था और मेहनत से अपनी रोजी-रोटी कमा रहा था. परिवार भी खुशहाल था, और भविष्य को लेकर कई सपने थे. लेकिन एक दिन सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए उसकी नजर एक वीडियो पर पड़ी, जिसमें बताया जा रहा था कि मोबाइल गेम खेलकर आसानी से पैसे कमाए जा सकते हैं. यही वह पल था, जिसने उसकी जिंदगी की दिशा बदल दी.

वीडियो से प्रभावित होकर रमन ने '91 क्लिप' नाम का एक गेम डाउनलोड किया. शुरुआत में किस्मत ने उसका साथ दिया और उसने कुछ पैसे जीत भी लिए. यही जीत उसके लिए जाल बन गई. उसे लगा कि अगर थोड़ा और पैसा लगाएगा, तो बड़ा मुनाफा कमा सकता है. धीरे-धीरे वह इस खेल में डूबता चला गया.

पहले उसने अपनी बचत लगाई, फिर जनसेवा केंद्र में रखे पैसे भी गेम में झोंक दिए. जब नुकसान होने लगा, तब भी उसने हार नहीं मानी. उसे भरोसा था कि अगली बार वह सब कुछ जीतकर वापस पा लेगा. लेकिन हर बार वह और गहराई में फंसता गया. देखते ही देखते वह करीब 9 लाख रुपये हार चुका था.

हारा तो पत्नी के गहने बेच दिए
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि रमन ने अपनी पत्नी के गहने तक बेच दिए, सिर्फ इस उम्मीद में कि वह एक बड़ी बाजी जीतकर सब कुछ ठीक कर लेगा. लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया. गेम में जीतने के बाद भी पैसे निकालने में दिक्कतें आने लगीं. कई ट्रांजेक्शन रिजेक्ट हो गए, और उसे एक रुपये तक नहीं मिला.

Advertisement

अब रेलवे स्टेशन पर गुजर रही रातें
अब हालात ऐसे हो गए कि रमन घर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. पिछले तीन दिनों से वह घर से बाहर है. परिवार के फोन लगातार आ रहे हैं, लेकिन वह जवाब देने से बच रहा है. कभी फोन बंद कर देता है, तो कभी एयरप्लेन मोड पर डाल देता है. उसकी रातें रेलवे स्टेशन पर गुजर रही हैं और दिन इधर-उधर भटकते हुए.

आंखों में आंसू लिए रमन कहता है कि यह सिर्फ उसकी कहानी नहीं है, बल्कि उन हजारों युवाओं की सच्चाई है, जो ऑनलाइन गेमिंग के जाल में फंस रहे हैं. उसने मुख्यमंत्री आवास तक पहुंचकर मदद की गुहार लगाने की कोशिश की, लेकिन उसे कोई ठोस सहारा नहीं मिला.

अब रमन चाहता है कि इस तरह के गेम्स पर सख्त कार्रवाई हो, ताकि कोई और उसकी तरह अपनी जिंदगी बर्बाद न करे. उसकी यह कहानी एक चेतावनी है, मनोरंजन के लिए शुरू हुआ गेम कब लत बन जाए और कब जिंदगी को तबाह कर दे, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है.

---- समाप्त ----
Live TV

TOPICS:
Advertisement
Advertisement