लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से जुड़े कथित धर्मांतरण मामले में जांच के दौरान कई डिजिटल सबूत सामने आए हैं. आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन के लैपटॉप और मोबाइल से महिला डॉक्टरों की आपत्तिजनक तस्वीरें, वीडियो और सोशल मीडिया चैट की स्क्रीन रिकॉर्डिंग मिली हैं. आरोप है कि इनका इस्तेमाल महिलाओं को ब्लैकमेल करने में हो रहा था. पुलिस अब इस पूरे मामले की जांच कर रही है.
आजतक की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, फॉरेंसिक जांच में गैर-मुस्लिम महिला डॉक्टरों और दूसरी महिलाओं से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. आरोप है कि इन तस्वीरों और बातचीत की रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल महिलाओं पर दबाव बनाने और उनका धर्म परिवर्तन कराने के लिए किया जाता था. हालांकि, पुलिस अभी जांच कर रही है कि ये तस्वीरें और वीडियो किसने बनाए, क्या इन्हें किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर किया गया और क्या इनके जरिए दूसरी महिलाओं को भी ब्लैकमेल किया गया.
जांच में सामने आया कि डॉ. रमीज के HP लैपटॉप की 500 GB हार्ड डिस्क में शिकायतकर्ता महिला डॉक्टर और दूसरी महिलाओं की तस्वीरें और वीडियो मिले हैं. इसके अलावा Acer लैपटॉप की दूसरी 500 GB हार्ड डिस्क में भी महिलाओं की तस्वीरें व वीडियो मिले. डॉ. रमीज के मोबाइल की जांच में भी महिलाओं की तस्वीरें और सोशल मीडिया पर हुई बातचीत की स्क्रीन रिकॉर्डिंग मिली हैं.
पुलिस ने इन सबूतों को सुरक्षित कर लिया है. हार्ड डिस्क को सील किया गया है, ताकि जांच के दौरान डेटा के साथ छेड़छाड़ न हो. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि तस्वीरें और वीडियो किन परिस्थितियों में बनाए गए थे और उनका इस्तेमाल किस मकसद से किया गया.
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इस मामले में सबसे गंभीर आरोप ब्लैकमेलिंग से जुड़ा है. आरोप है कि डॉ. रमीज महिलाओं से सोशल मीडिया पर बातचीत करता था और उनकी बातचीत की स्क्रीन रिकॉर्डिंग रखता था. यह भी आरोप है कि महिलाओं की प्राइवेट तस्वीरों और वीडियो के जरिए उन पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाया जाता था. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि क्या शिकायतकर्ता के अलावा दूसरी महिलाएं भी इस तरह के दबाव या ब्लैकमेलिंग का शिकार हुई थीं.
दो प्रोफेसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में
इस मामले में KGMU के बायोकेमिस्ट्री विभाग के एक प्रोफेसर समेत दो प्रोफेसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है. एसटीएफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों प्रोफेसरों पर मुस्लिम जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों और रिसर्च स्कॉलर्स की मदद करने के आरोप हैं. जांच एजेंसी यह भी देख रही है कि कहीं सरकारी रिसर्च बजट और फेलोशिप के पैसों का गलत इस्तेमाल तो नहीं हुआ. इसके अलावा एरा मेडिकल कॉलेज और इंटीग्रल यूनिवर्सिटी में इनवेस्टमेंट से जुड़े एंगल की भी जांच की जा रही है. 6 नवंबर को KGMU की कार्यपरिषद की बैठक होनी है. इस बैठक में दोनों प्रोफेसरों के वित्तीय अधिकार रोकने के प्रस्ताव पर चर्चा हो सकती है.
दिसंबर 2025 में महिला डॉक्टर ने दर्ज कराई थी शिकायत
इस मामले की शुरुआत दिसंबर 2025 में दर्ज एक शिकायत से हुई थी. एक महिला डॉक्टर ने डॉ. रमीज के खिलाफ लखनऊ के चौक थाने में केस दर्ज कराया था. महिला डॉक्टर ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने, प्रताड़ित करने और रेप के आरोप लगाए थे. इसके बाद एक दूसरी महिला डॉक्टर ने भी डॉ. रमीज पर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को सौंप दी गई थी.
अब फॉरेंसिक जांच में मिले डिजिटल सबूतों और दूसरे आरोपों के आधार पर जांच चल रही है. पुलिस और एसटीएफ यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस मामले में कौन-कौन शामिल था, महिलाओं की तस्वीरों और वीडियो का इस्तेमाल किस तरह किया गया और क्या इसमें आर्थिक लेनदेन या दूसरे संस्थानों की भूमिका भी थी.