वाराणसी में भारत-जापान की दोस्ती और साझा सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान मिलने जा रही है. काशी स्थित रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में बुधवार को जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का लोकार्पण किया जाएगा. इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कार्यक्रम में शामिल होंगे.
वाराणसी रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक्स पर पोस्ट कर भारत-जापान संबंधों और काशी-क्योटो की साझेदारी को लेकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भारत-जापान मैत्री केवल दो देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं, बल्कि विश्वास, विकास और दो प्राचीन संस्कृतियों की आत्मीयता का जीवंत सेतु है.
मुख्यमंत्री ने लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाइयां दीं. उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच यह दोस्ती अब आस्था और संस्कृति के साथ-साथ आर्थिक साझेदारी की नई ताकत भी बन रही है.
शिंजो आबे की स्मृतियों को समर्पित है कॉरिडोर
रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर में तैयार किया गया ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ भारत और जापान के बीच मजबूत होते संबंधों और शिंजो आबे की भारत के साथ विशेष मित्रता की स्मृति को समर्पित है. काशी और क्योटो के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव को भारत-जापान संबंधों का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है.
सीएम योगी ने कहा कि काशी से क्योटो तक दोनों देशों की प्राचीन संस्कृतियों के बीच जुड़ाव अब विकास और आर्थिक सहयोग की नई राह भी बना रहा है. उन्होंने भारत-जापान संबंधों को ‘विश्वास की विरासत और विकास की साझेदारी का सेतु’ बताया.
मुख्यमंत्री ने आर्थिक मोर्चे पर भी भारत-जापान साझेदारी की बढ़ती ताकत का उल्लेख किया. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश जापानी कंपनियों के साथ करीब 90 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापन (MoU) कर चुका है. इससे राज्य में निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास की संभावनाएं और मजबूत होने की उम्मीद है.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत-जापान की यह साझेदारी अब केवल सांस्कृतिक आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है. आस्था से लेकर अर्थव्यवस्था तक दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार विस्तार ले रहा है.
काशी-क्योटो मॉडल से मजबूत हो रहे रिश्ते
काशी और जापान के क्योटो शहर के बीच सांस्कृतिक संबंध भारत-जापान मैत्री की एक खास मिसाल हैं. दोनों प्राचीन शहर अपनी धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत के लिए दुनिया भर में पहचाने जाते हैं. काशी-क्योटो साझेदारी के जरिए विरासत संरक्षण, संस्कृति और विकास को एक साथ आगे बढ़ाने की कोशिश की गई है.