scorecardresearch
 

राहुल गांधी ने मांगा कांशीराम के लिए 'भारत रत्न', मायावती ने पलटवार कर याद दिलाया इतिहास

राहुल गांधी ने लखनऊ में कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की थी. इस पर मायावती ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिन लोगों ने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न योग्य नहीं समझा और मान्यवर कांशीराम के निधन पर एक दिन का शोक तक नहीं मनाया, जबकि कांग्रेस की ही सरकार थी. ऐसे में राहुल गांधी कैसे यह बात कह रहे हैं.

Advertisement
X
लखनऊ में राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की. (Photo: ITG)
लखनऊ में राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की. (Photo: ITG)

कांग्रेस पार्टी ने लखनऊ में कांशीराम की जयंती पर एक कार्यक्रम किया. राहुल गांधी ने खासतौर पर इसमें शिरकत की. राहुल गांधी ने जो कहा उससे यह साफ हो गया की उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का एजेंडा क्या है. कांग्रेस जानती है कि मुसलमान कांग्रेस के साथ एकजुट खड़े हैं. अब उन्हें अपना पुराना दलित वोट चाहिए.

राहुल गांधी खासतौर पर कांग्रेस के भीतर दलित कार्यकर्ताओं को संबोधित करने आए थे, राहुल ने इसके लिए कांशीराम की जयंती की पूर्व संध्या का मौका चुना. राहुल गांधी ने कई अहम बातें कहीं.

पहली बात, अगर कांग्रेस पार्टी ने अपना काम ठीक से किया होता तो कांशीराम होते ही नहीं. दूसरी बात अगर जवाहरलाल नेहरू होते तो कांशीराम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री होते.

राहुल गांधी के इन दो बयानों से यह साफ हो जाता है कि कांग्रेस पार्टी दलित वोटो के लिए किस कदर उतावली है.

वह मान रही है कि कांग्रेस ने अपने वक्त में दलितों को वह तवज्जो नहीं दी जो उन्हें मिलना चाहिए था. इसी वजह से काशीराम जैसे नेता पैदा हुए, और यह भी माना कि अगर काशीराम को यानी दलित को जो तवज्जो जवाहरलाल नेहरू के वक्त में मिला वह कभी नहीं मिल पाया. 

यह भी पढ़ें: सिलेंडर की कालाबाजारी का भंडाफोड़, ऊंचे दामों पर हो रही थी अवैध बिक्री, Black Marketing पर बड़ा एक्शन

मायावती का पलटवार

Advertisement

राहुल गांधी के बयानों के बाद मायावती ने पलटवार किया है. गुरुवार को लखनऊ में राहुल गांधी ने कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग की थी, मायावती ने राहुल गांधी की मांग के बाद कांग्रेस को आईना दिखाते हुए लंबा चौड़ा एक पोस्ट लिखा.

मायावती ने कहा कि जिन्होंने बाबा साहब भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न लायक नहीं समझा और मान्यवर कांशीराम के निधन पर एक दिन का शौक तक नहीं मनाया, जबकि कांग्रेस की सरकार थी ऐसे में राहुल गांधी किस मुंह से मान्यवर कांशीराम जी के लिए ऐसी बातें कह रहे हैं.

बहरहाल सिर्फ कांग्रेस ही नहीं, अखिलेश यादव भी लगातार कांशीराम को अपना बनाने पर तुले हैं. अखिलेश यादव तो मुलायम और कांशीराम को एक साथ लेकर चल रहे हैं और कांशीराम के जन्म जयंती पर बाकायदा कार्यक्रम कर रहे हैं. 

पिछले कई सालों से अखिलेश यादव कांशीराम की जन्म जयंती पर हर साल उन्हें याद करते हैं. उधर भाजपा भी पीछे नहीं है. कहा जा रहा है बीजेपी के भीतर कांशीराम को भारत रत्न देने की मांग उठने लगी है और पार्टी के एक धड़े को लगता है, कि अगर मोदी सरकार के रहते कांशीराम को भारत रत्न की उपाधि मिल गई, तो दलितों के एक बड़े तबके को साथ लाया जा सकता है.

Advertisement

यही नहीं पार्टी के भीतर इस बात को लेकर मंथन चल रहा है कि अगर कोई भी दूसरी सरकार आई, तो वह काशीराम को जरूर भारत रत्न देगी. तो क्यों न बीजेपी ही इसका श्रेय ले.

कांशीराम फिलहाल सबके हैं, क्योंकि 2027 का चुनाव है. सभी के लिए और खासकर सपा और कांग्रेस के लिए दलित वोट तो उनके अस्तित्व से जुड़ गया है. अगर दलितों ने 2024 की तरह सपा और कांग्रेस की तरफ रुख किया तो उनकी सरकार बन सकती है, लेकिन अगर दलित खासकर जाटव 2027 में बीएसपी के साथ ही बने रहे तो सरकार बनाना मुश्किल होगा.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement