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कानपुर: मां का कटा हाथ, फौजी बेटे को चाहिए इंसाफ... पुलिस कमिश्नर ऑफिस पहुंच गए हथियारों से लैस ITBP जवान; पूरी पलटन देख बढ़ी हलचल

कानपुर में ITBP जवान की मां का इलाज के दौरान हाथ काटे जाने के मामले में नया मोड़ आ गया है. सीएमओ की जांच रिपोर्ट में अस्पताल को क्लीन चिट मिलने से नाराज ITBP के दर्जनों हथियारबंद जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. दोबारा जांच के आश्वासन के बाद ही तनाव शांत हुआ.

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कानपुर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुंचे आईटीबीपी के अफसर (Photo- ITG)
कानपुर पुलिस कमिश्नर के दफ्तर पहुंचे आईटीबीपी के अफसर (Photo- ITG)

देश की सीमाओं पर तैनात जवान अपनी ड्यूटी निभा रहे हैं, लेकिन यूपी के कानपुर में एक जवान अपनी मां को इंसाफ दिलाने के लिए सिस्टम से जूझता नजर आया. दरअसल, इलाज के दौरान एक साथी की मां का हाथ काटे जाने के मामले में कार्रवाई न होने और जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने के बाद आईटीबीपी के जवानों का गुस्सा फूट पड़ा. शनिवार को बड़ी संख्या में हथियारबंद जवान कानपुर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए, जिससे पूरे परिसर में हड़कंप मच गया. 

बता दें कि महाराजपुर स्थित 32वीं बटालियन में तैनात आईटीबीपी कांस्टेबल विकास सिंह की मां निर्मला देवी को 13 मई को सांस लेने में परेशानी होने पर टाटमिल स्थित कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान लापरवाही की वजह से उनके हाथ में गंभीर संक्रमण फैल गया. हालत बिगड़ने पर उन्हें पारस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों को 17 मई को उनका हाथ काटना पड़ा. 

यह भी पढ़ें: कानपुर: मां का कटा हाथ लेकर 3 दिन तक भटकता रहा ITBP जवान, बटालियन में आक्रोश; जानें मामला

मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर विकास सिंह लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे. 20 मई को वह अपनी मां का कटा हुआ हाथ लेकर पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे. इसके बाद पुलिस आयुक्त ने पूरे मामले की जांच स्वास्थ्य विभाग से कराई, लेकिन आई जांच रिपोर्ट से पीड़ित परिवार और आईटीबीपी अधिकारी संतुष्ट नहीं हुए. 

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शनिवार सुबह आईटीबीपी के कमांडेंट गौरव प्रसाद, लाइजनिंग अफसर अर्पित और 50 से ज्यादा जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंच गए. जवानों की मौजूदगी से पूरा परिसर छावनी में तब्दील हो गया. अधिकारियों ने पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल और अपर पुलिस आयुक्त कानून-व्यवस्था डॉ. विपिन ताडा से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई की मांग उठाई. 

करीब एक घंटे तक चली बैठक में आईटीबीपी अधिकारियों ने स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर गंभीर सवाल खड़े किए. उनका आरोप था कि रिपोर्ट में सिर्फ संभावनाओं का जिक्र किया गया है, लेकिन यह नहीं बताया गया कि संक्रमण आखिर फैला कैसे और मरीज की हालत इतनी गंभीर क्यों हुई. अधिकारियों ने जांच टीम पर अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों को बचाने का आरोप भी लगाया. 

अपर पुलिस आयुक्त डॉ. विपिन ताडा ने बताया कि पीड़ित पक्ष जांच रिपोर्ट के कई बिंदुओं से असहमत था. इसी वजह से आईटीबीपी के अधिकारी और जवान पुलिस कमिश्नर कार्यालय पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि सीएमओ को दोबारा जांच के निर्देश दिए गए हैं और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

मां के इलाज में कथित लापरवाही और इंसाफ की लड़ाई ने अब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग दोनों को कटघरे में खड़ा कर दिया है. वहीं, जवानों के प्रदर्शन के बाद यह मामला कानपुर में चर्चा का विषय बना हुआ है. जब मीडिया ने सीएमओ से पूरे मामले में जवाब मांगे और पूछा कि कैसे अपने क्लीन चिट दे दी तो वह कैमरे के सामने बचते हुए नजर आए. 

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