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जौनपुर का एटम बम, शामली की पलंगतोड़... सरकार की लिस्ट में 225 फूड, यूपी के जायकों की कहानी

अगर कोई आपसे कहे कि उत्तर प्रदेश में 'एटम बम' और 'पलंगतोड़' दोनों मिलते हैं, तो शायद आप चौंक जाएं. लेकिन अब ये सिर्फ दिलचस्प नाम नहीं, बल्कि यूपी की आधिकारिक खाद्य विरासत का हिस्सा हैं. योगी सरकार ने 'एक जनपद एक व्यंजन' योजना के तहत 75 जिलों के 225 पारंपरिक व्यंजनों की लिस्ट जारी की है, जिसमें जौनपुर का 'एटम बम' और शामली की 'पलंगतोड़ मिठाई' भी शामिल हैं.

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यूपी सरकार की नई फूड लिस्ट ने बढ़ाई दिलचस्पी. (Photo: Representational)
यूपी सरकार की नई फूड लिस्ट ने बढ़ाई दिलचस्पी. (Photo: Representational)

अगर कोई आपसे पूछे कि उत्तर प्रदेश में सबसे ताकतवर चीज क्या है, तो आप क्या जवाब देंगे? कोई कहेगा राजनीति, कोई कहेगा आबादी. लेकिन यूपी सरकार की नई सूची देखने के बाद जवाब बदल सकता है. क्योंकि यहां 'एटम बम' भी है और 'पलंगतोड़' भी. घबराइए मत, ये हथियार नहीं हैं. एक जौनपुर की मशहूर डिश है और दूसरी शामली की चर्चित मिठाई. अब दोनों को सरकार ने आधिकारिक पहचान दे दी है.

यूपी सरकार ने 'एक जनपद एक व्यंजन' यानी One District One Cuisine योजना के तहत प्रदेश के 75 जिलों के 225 पारंपरिक व्यंजनों की लिस्ट जारी की है. मकसद है- हर जिले के उस स्वाद को पहचान देना, जो सालों से वहां की संस्कृति, परंपरा और पहचान का हिस्सा रहा है. सरकार चाहती है कि जिस तरह 'वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट' योजना ने स्थानीय उत्पादों को पहचान दिलाई, उसी तरह अब स्थानीय व्यंजन भी देश-दुनिया में अपनी जगह बनाएं.

लिस्ट जारी हुई और लोगों की नजर सबसे पहले दो नामों पर अटक गई. पहला नाम था- शामली की 'पलंगतोड़ मिठाई' का... नाम ऐसा कि सुनते ही लोग पूछ बैठें, 'आखिर इसमें ऐसा क्या है?' पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह मिठाई लंबे समय से मशहूर है. अब इसे सरकारी सूची में भी जगह मिल गई है.

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दूसरा नाम था- जौनपुर का 'एटम बम'... नाम सुनकर लगता है मानो किसी मिसाइल की बात हो रही हो. लेकिन जौनपुर वालों के लिए यह स्वाद की दुनिया का 'एटम बम' है. स्थानीय लोगों के बीच इसकी अपनी पहचान है और अब सरकार ने भी उस पहचान पर मुहर लगा दी है.

यह भी पढ़ें: 'फुलौरी बिना चटनी कैसे बनी'... जानिए क्या है यह सॉफ्ट और स्पंजी डिश, जिसके बिना चटनी का स्वाद है अधूरा

इस पूरी लिस्ट में एक और दिलचस्प बात सामने आई. उत्तर प्रदेश का शायद ही कोई ऐसा कोना हो, जहां चाट का दीवाना न मिले, सरकारी सूची बताती है कि औसतन हर तीसरे जिले में चाट को प्रमुख व्यंजन के तौर पर शामिल किया गया है. यानी अगर यूपी की फूड पार्लियामेंट बैठाई जाए, तो सबसे ज्यादा सीटें शायद चाट के खाते में ही जाएंगी. आलू टिक्की, दही-भल्ला, टमाटर चाट, पानी के बताशे और न जाने कितनी किस्में... चाट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि वह सिर्फ स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि यूपी की सांस्कृतिक पहचान है.

अब स्वाद का भी बनेगा 'सिलेबस'

सरकार की योजना सिर्फ लिस्ट बनाने तक सीमित नहीं है. अब इन व्यंजनों की स्टैंडर्ड रेसिपी मैन्युअल तैयार की जाएगी. आसान भाषा में कहें तो यह तय होगा कि किसी जिले की मशहूर डिश का असली स्वाद क्या है, उसे बनाने का तरीका क्या है और उसकी पहचान किन चीजों से बनती है. ताकि कल को कोई भी उस व्यंजन के नाम पर कुछ भी बेचकर उसकी मूल पहचान खराब न कर सके.

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FSSAI और NIFTEM भी आएंगे मैदान में

सरकार ने इस काम के लिए FSSAI और NIFTEM जैसी संस्थाओं को भी जोड़ा है. इनकी मदद से पारंपरिक व्यंजनों के नए वैरिएंट विकसित किए जाएंगे. यानी पुराना स्वाद रहेगा, लेकिन उसे नए जमाने की पैकेजिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग भी मिलेगी. सीधे शब्दों में कहें तो सरकार चाहती है कि गांव-कस्बों की रसोई से निकले व्यंजन सुपरमार्केट की शेल्फ और अंतरराष्ट्रीय फूड फेस्टिवल तक पहुंचें.

इस योजना के पीछे एक बड़ा आर्थिक गणित भी है. अगर किसी जिले की खास डिश मशहूर होती है, तो उससे जुड़े हलवाई, छोटे कारोबारी, रेस्तरां, फूड स्टार्टअप और पर्यटन उद्योग को भी फायदा होता है. यानी यह योजना सिर्फ स्वाद बचाने की नहीं, बल्कि रोजगार बढ़ाने की भी कोशिश है.

आखिर क्यों जरूरी है यह पहल?

भारत में हर कुछ किलोमीटर पर भाषा बदलती है, बोली बदलती है और खाना भी बदल जाता है. लेकिन आधुनिकता की दौड़ में कई स्थानीय व्यंजन धीरे-धीरे गुम होते जा रहे हैं. ऐसे में 'एक जनपद एक व्यंजन' जैसी पहल उन स्वादों को बचाने की कोशिश है, जो पीढ़ियों से लोगों की थाली और यादों का हिस्सा रहे हैं. जिस राज्य की सूची में 'पलंगतोड़' और 'एटम बम' जैसे नाम हों, वहां की फूड स्टोरी दिलचस्प न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता.

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