रात के ठीक दो बजे थे… सामने वाले फ्लैट की बालकनी में लाइट जल रही थी. मेरी नजर वहीं चली गई, क्योंकि उस वक्त कोई अगर रेलिंग पर बैठा दिखे तो नॉर्मल नहीं लगता. मुझे लगा कोई कपल है. एक आदमी जैसे पीछे की तरफ कूदने की कोशिश कर रहा था और दूसरा उसे अपनी ओर खींच रहा था, बचाने की कोशिश कर रहा था
यह शब्द हैं अरुण कुमार के, यह वह शख्स हैं, जिन्होंने गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की जिंदगी एक साथ खत्म होते देखी. उन्होंने बताया कि उन्हें ऐसा लगा कि पहले एक लड़की रेलिंग से नीचे उतरी, फिर दोबारा रेलिंग पर बैठ गई. तभी दूसरी बच्ची आकर उससे लिपट गई. इसके बाद तीसरी ने दोनों को अपनी ओर खींचने की कोशिश की, लेकिन उसी पल तीनों एक साथ नीचे गिर गईं. अरुण कहते हैं, मैं तुरंत भागा. सबसे पहले एंबुलेंस को कॉल किया, फिर पुलिस को सूचना दी. गार्ड्स को भी बुलाया. उन्होंने बताया कि उस समय तक उन्हें बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि गिरने वाली तीनों नाबालिग बहनें हैं. उन्हें पूरा दृश्य पति-पत्नी और एक बच्चे जैसा ही लगा. अरुण पेशे से बिजनेसमैन हैं और उन्होंने बताया कि जो कुछ उन्होंने देखा, वही उन्होंने पुलिस को भी बताया है.
कमरे के अंदर का सन्नाटा
घटना के बाद जब पुलिस फ्लैट के अंदर पहुंची, तो वहां का मंजर किसी क्राइम सीन से कम नहीं था. कमरे में कदम रखते ही नजर फर्श पर बिखरी परिवार की तस्वीरों पर गई. ऐसा लग रहा था जैसे उन्हें जमीन पर फेंका गया हो. पुलिस को एक सुसाइड नोट मिला. और दीवार पर लिखे अंग्रेज़ी के शब्द. दीवार पर लिखा था- I AM REALLY VERY ALONE, MY LIFE IS VERY VERY ALONE , I AM VERY VERY ALONE
डायरी में छुपा हो सकता है राज
कमरे से पुलिस को एक डायरी भी मिली है. वही डायरी, जिसे अब इस केस की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है. डायरी में बच्चियों ने लिखा है कि जो कुछ उन्होंने उसमें दर्ज किया है, वह सब सच है. उन्होंने साफ कहा है कि डायरी पढ़ी जाए. फिलहाल यह डायरी पुलिस के कब्जे में है. जांच अधिकारी मानते हैं कि तीनों बच्चियों की मौत का असली सच इन्हीं पन्नों में छुपा हो सकता है. डायरी में क्या लिखा है, इस पर पुलिस फिलहाल चुप है, लेकिन इतना जरूर कहा जा रहा है कि मामला जितना बाहर से दिख रहा है, उससे कहीं ज्यादा गहरा है.
घर की उलझी कहानी: दो शादियां, पांच बच्चे
इस केस का पारिवारिक एंगल भी कम चौंकाने वाला नहीं है. बच्चियों के पिता ने दो शादियां की थीं. पहली शादी के कई साल बाद तक संतान नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने उसी पत्नी की छोटी बहन यानी अपनी साली से दूसरी शादी कर ली. दूसरी शादी के बाद तीन बच्चे हुए. इसी दौरान पहली पत्नी से भी दो बच्चे पैदा हो गए. इस तरह घर में दो पत्नियां, पांच बच्चे और एक साझा जीवन था. जिन तीन बहनों ने आत्महत्या की, उनमें दो दूसरी पत्नी की बेटियां थीं, जबकि एक पहली पत्नी की बेटी थी. दोनों पत्नियां और सभी बच्चे एक ही घर में साथ रहते थे. बाहर से देखने पर परिवार सामान्य लगता था. लेकिन अंदर क्या चल रहा था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था.
दो साल से स्कूल से दूरी
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बच्चियां पिछले करीब दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं. बताया जा रहा है कि पढ़ाई में कमजोर होने के कारण उन्हें घर पर ही रखा गया था. पड़ोसियों के मुताबिक, बच्चियां शांत रहती थीं, ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं. लेकिन कभी ऐसा नहीं लगा कि वे किसी बड़े मानसिक दबाव में हैं.
50 टास्क और आखिरी दिन
पुलिस की शुरुआती जांच में एक अहम संकेत मिला है. आशंका जताई जा रही है कि तीनों बच्चियां किसी टास्क आधारित गतिविधि या गेम से जुड़ी थीं. जांच अधिकारियों को यह जानकारी मिली है कि कुल 50 टास्क थे और जिस दिन यह घटना हुई, वही आखिरी टास्क का दिन था. हालांकि पुलिस अभी यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि यह कोई संगठित ऑनलाइन गेम था या सोशल मीडिया, वीडियो कंटेंट और मानसिक दबाव से बना हुआ कोई सिलसिला. लेकिन जिस तरह बच्चियों ने अपने व्यवहार से किसी को शक नहीं होने दिया, वह इस आशंका को मजबूत करता है कि वे किसी मानसिक प्रक्रिया का हिस्सा थीं.
बीच वाली बहन और ‘लीडर’ की भूमिका
जांच में पुलिस को शक है कि तीनों बहनों में से बीच वाली बच्ची इस पूरे सिलसिले की लीडर थी. वही तय करती थी कि क्या करना है, कब करना है और कैसे करना है. बाकी दोनों बहनें उसी के निर्देशों पर चलती थीं. तीनों बहनें हर काम साथ करती थीं—उठना, बैठना, खाना, समय बिताना. जांचकर्ताओं को लगता है कि यह सामूहिकता भी किसी टास्क का हिस्सा हो सकती है, जिसमें धीरे-धीरे अलग सोचने की क्षमता खत्म हो जाती है.
मोबाइल, डिजिटल दुनिया और जांच
घटना के बाद पुलिस ने बच्चों के सभी मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जब्त कर लिए हैं. डिजिटल फोरेंसिक टीम कॉल रिकॉर्ड, चैट, सोशल मीडिया अकाउंट, वीडियो, नोट्स और इंस्टॉल किए गए ऐप्स की जांच कर रही है. यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि बच्चियां किस तरह के कंटेंट से जुड़ी थीं और क्या किसी बाहरी व्यक्ति या ग्रुप का उन पर प्रभाव था. परिवार के मुताबिक, कुछ समय पहले बच्चों के मोबाइल इस्तेमाल पर रोक भी लगाई गई थी. लेकिन यह रोक क्यों लगाई गई थी, इसकी वजह भी जांच का हिस्सा है.
डीसीपी निमिष पाटिल की मौजूदगी
डीसीपी निमिष पाटिल खुद मौके पर पहुंचे और उस कमरे का निरीक्षण किया, जहां यह सब हुआ. उन्होंने परिवार के सदस्यों से लंबी बातचीत की. डीसीपी के मुताबिक, शुरुआती जांच में सामने आया है कि बच्चियां कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं. सुसाइड नोट और डायरी में भी कोरियन कल्चर का जिक्र होने की बात सामने आई है. हालांकि अभी तक किसी खास गेम या टास्क का ठोस सबूत नहीं मिला है. डीसीपी का कहना है कि जांच जारी है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी. सबसे बड़ा सवाल यही है कि तीन नाबालिग बहनें, जिनके आसपास परिवार था, घर था, लोग थे, वे खुद को बहुत-बहुत अकेला क्यों महसूस कर रही थीं? क्या डिजिटल दुनिया ने उन्हें इस कदर घेर लिया था कि असल दुनिया उनसे छूटती चली गई?
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