यूपी में 47 लाख लोगों के लिए खुशखबरी है. योगी आदित्यनाथ सरकार जल्द ही करीब 47 लाख नए पात्र लोगों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) के तहत जोड़ने जा रही है. इसका मतलब है कि जिन गरीब और जरूरतमंद परिवारों का नाम अब तक राशन योजना में शामिल नहीं हो पाया है, उन्हें भी फ्री में राशन मिलने का रास्ता साफ होगा.
प्रदेश सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य सिर्फ नए नाम जोड़ना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र व्यक्ति योजना के लाभ से वंचित न रहे. इसके लिए पूरे प्रदेश में पात्रता की जांच कराई जाएगी और जांच पूरी होने के बाद योग्य लोगों को राशन कार्ड जारी किए जाएंगे.
16 करोड़ लोगों को पहले से मिल रहा मुफ्त राशन
उत्तर प्रदेश के खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने योजना की जानकारी देते हुए कहा कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 16 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है. लेकिन सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह है कि यदि कोई गरीब और पात्र व्यक्ति किसी कारण से योजना से बाहर रह गया है तो उसे भी जल्द से जल्द इसमें शामिल किया जाए. उन्होंने कहा कि सरकार लगातार इस दिशा में काम कर रही है और अब विशेष अभियान चलाकर करीब 47 लाख नए पात्र लाभार्थियों की पहचान की जाएगी.
गरीबी और पात्रता ही होगा आधार
मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि यह देश की ऐसी योजना है, जिसमें किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जाता. योजना में शामिल होने का केवल एक ही आधार है गरीबी और पात्रता. उन्होंने कहा कि सभी पात्र लोगों का चयन समानता और पारदर्शिता के सिद्धांत पर किया जाता है. सरकार की कोशिश है कि किसी भी वर्ग, क्षेत्र या समुदाय के साथ भेदभाव न हो और हर पात्र व्यक्ति तक सरकारी योजना का लाभ पहुंचे.
क्यों चलाया जा रहा है विशेष अभियान?
प्रदेश सरकार के मुताबिक, समय के साथ कई नए परिवार आर्थिक रूप से कमजोर श्रेणी में आए हैं. वहीं कई ऐसे लोग भी हैं, जिनका नाम विभिन्न कारणों से राशन कार्ड सूची में शामिल नहीं हो सका. ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए खाद्य एवं रसद विभाग विशेष सत्यापन अभियान चला रहा है. जांच पूरी होने के बाद पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम राशन कार्ड सूची में जोड़े जाएंगे. सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में यह अभियान और तेज किया जाएगा ताकि कोई भी जरूरतमंद परिवार योजना से बाहर न रहे.
राशन वितरण में तकनीक का बड़ा इस्तेमाल
मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश ने राशन वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में उल्लेखनीय काम किया है. ई-पॉस मशीनों और डिजिटल सत्यापन के जरिए यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि राशन सही लाभार्थी तक पहुंचे और बीच में किसी तरह की गड़बड़ी न हो. उन्होंने कहा कि तकनीक के इस्तेमाल से घटतौली, कालाबाजारी और फर्जीवाड़े जैसी शिकायतों में काफी कमी आई है. यही वजह है कि उत्तर प्रदेश का मॉडल अब दूसरे राज्यों के लिए भी उदाहरण बन रहा है.
अनियमितता मिली तो होगी सख्त कार्रवाई
सरकार ने साफ कर दिया है कि राशन वितरण में किसी भी तरह की लापरवाही या भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत यदि कोई कोटेदार, बिचौलिया, अधिकारी या कर्मचारी राशन वितरण में गड़बड़ी करता हुआ पाया जाता है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि जहां भी अनियमितताओं की शिकायत मिली है, वहां कार्रवाई भी की गई है और आगे भी यह सिलसिला जारी रहेगा.
पात्र लोगों को कैसे मिलेगा लाभ?
खाद्य एवं रसद विभाग के अनुसार, नए लाभार्थियों को जोड़ने से पहले उनके दस्तावेजों और पात्रता की जांच होगी. जांच पूरी होने के बाद पात्र परिवारों के राशन कार्ड बनाए जाएंगे और उन्हें मुफ्त राशन योजना का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा. इस प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन और खाद्य विभाग की टीमें मिलकर काम करेंगी ताकि चयन पूरी तरह पारदर्शी रहे. मंत्री मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि "एक भी पात्र व्यक्ति योजना से बाहर नहीं रहना चाहिए." इसी उद्देश्य से बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि खाद्य सुरक्षा जैसी योजनाएं सीधे गरीब परिवारों से जुड़ी होती हैं. इसलिए सरकार चाहती है कि हर जरूरतमंद परिवार तक समय पर राशन पहुंचे और किसी को भी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें.
गरीब परिवारों को मिलेगी बड़ी राहत
यदि सरकार की योजना के अनुसार 47 लाख नए लाभार्थियों को राशन योजना से जोड़ दिया जाता है तो लाखों परिवारों को हर महीने मुफ्त खाद्यान्न का लाभ मिलेगा. इससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के खर्च में कमी आएगी और खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी. सरकार का मानना है कि मुफ्त राशन योजना केवल अनाज उपलब्ध कराने की योजना नहीं है, बल्कि यह गरीब परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि पात्र लोगों की पहचान का अभियान लगातार जारी रहेगा और भविष्य में भी जरूरत के अनुसार नए लाभार्थियों को योजना से जोड़ा जाता रहेगा.