scorecardresearch
 

मरने के बाद जिंदा हो गया गाजियाबाद का गिरधारी! जानिए कैसे हो गया ये अजूबा 

जिस बेटे की तेरहवीं हो चुकी थी, वह 39 दिन बाद अचानक घर लौट आया. गाजियाबाद के गिरधर सिंह बिष्ट को परिवार ने मृत मानकर अंतिम संस्कार कर दिया था और हत्या का मुकदमा भी दर्ज हो गया था. लेकिन गिरधर के जिंदा लौटने से पूरा मामला पलट गया. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह किसका था? पुलिस पूरे मामले की दोबारा जांच कर रही है.

Advertisement
X
गाजियाबाद का गिरधारी जो अपने घर लौट आय (Photo : ITG)
गाजियाबाद का गिरधारी जो अपने घर लौट आय (Photo : ITG)

जिस बेटे की तस्वीर पर माला चढ़ चुकी थी, जिसकी तेरहवीं हो चुकी थी, जिसके नाम पर हत्या का मुकदमा दर्ज हो गया था. वह अचानक एक दिन घर का दरवाजा खटखटाकर सामने खड़ा हो जाए, तो क्या होगा? गाजियाबाद में ठीक ऐसा ही हुआ. 39 दिन पहले जिस गिरधर सिंह बिष्ट को परिवार हमेशा के लिए खो चुका था, वह अचानक जिंदा घर लौट आया. उसे देखते ही परिजनों की आंखों में आंसू थे, पड़ोसी हैरान थे और पुलिस के सामने ऐसे सवाल खड़े हो गए, जिनका जवाब तलाशना अब बेहद जरूरी हो गया है.

यह कहानी किसी फिल्म स्क्रिप्ट जैसी लग सकती है, लेकिन गाजियाबाद के कौशांबी थाना क्षेत्र के वैशाली स्थित कल्पना अपार्टमेंट में रहने वाले 38 वर्षीय गिरधर सिंह बिष्ट के साथ जो हुआ, उसने पूरे घटनाक्रम को रहस्य में बदल दिया है. अब सवाल केवल गिरधर के लौटने का नहीं है, बल्कि उस अज्ञात शव का भी है, जिसका अंतिम संस्कार गिरधर समझकर कर दिया गया. परिजनों के मुताबिक, 16 मई को मानसिक रूप से कमजोर बताए जा रहे गिरधर सिंह बिष्ट का स्थानीय दुकानदारों से विवाद हो गया था. सूचना मिलने पर कौशांबी पुलिस ने शांति भंग की आशंका में उन्हें हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई की और डासना जेल भेज दिया. करीब पांच दिन बाद, 21 मई को गिरधर जेल से रिहा हो गए. लेकिन घर लौटने के बजाय वह कहीं और चले गए. परिवार ने पहले रिश्तेदारों और परिचितों के यहां तलाश की. कई जगह खोजबीन की गई, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला. जैसे-जैसे दिन बीतते गए, परिवार की चिंता बढ़ती चली गई.

Advertisement

 परिवार ने मान लिया कि गिरधर अब नहीं रहे

इसी बीच 13 जून को मसूरी थाना क्षेत्र में एक अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली. पुलिस ने पहचान के लिए परिजनों को बुलाया. परिवार ने शव को गिरधर सिंह बिष्ट का मान लिया. इसके बाद पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी हुई और शव उन्हें सौंप दिया गया. परिजनों ने पूरे रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार किया. घर में मातम पसरा रहा. तेरहवीं तक की सभी धार्मिक रस्में पूरी कर दी गईं. परिवार और रिश्तेदार यही मान चुके थे कि गिरधर अब इस दुनिया में नहीं रहे. लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है. परिजनों को इस मौत पर संदेह था. उनका आरोप था कि गिरधर की हत्या की गई है. उन्होंने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए और कौशांबी थाने में प्रदर्शन किया. बाद में मसूरी थाने में कुछ नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया. पुलिस जांच आगे बढ़ने लगी. संदिग्ध लोगों से पूछताछ हुई. कई परिवारों पर हत्या के आरोपों की छाया पड़ गई. मामला लगातार गंभीर होता जा रहा था. लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही दिनों बाद पूरी कहानी पलट जाएगी.

39 दिन बाद अचानक घर पहुंच गया गिरधर

Advertisement

गुरुवार का दिन परिवार कभी नहीं भूल पाएगा. घर के बाहर अचानक एक परिचित चेहरा दिखाई दिया. पहले तो किसी को यकीन नहीं हुआ. लेकिन कुछ ही पल में साफ हो गया कि सामने खड़ा व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि वही गिरधर सिंह बिष्ट है, जिसकी मौत पर परिवार शोक मना चुका था. घर में चीख-पुकार मच गई. कुछ लोग रोने लगे, कुछ लोग हैरान रह गए. जिन पड़ोसियों ने कुछ दिन पहले शोकसभा में हिस्सा लिया था, वही अब गिरधर को अपने सामने जीवित देखकर स्तब्ध थे. कुछ ही देर में पूरे इलाके में खबर फैल गई. कल्पना अपार्टमेंट के बाहर लोगों की भीड़ जमा हो गई. हर कोई सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहा था अगर गिरधर जिंदा है, तो फिर जिस व्यक्ति का अंतिम संस्कार किया गया, वह कौन था?

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement