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अपनी ही दुकान का 22 साल बाद मिला कब्जा, भावुक बुजुर्ग दंपति बोले- DM हमारे लिए हनुमान

गाजियाबाद के गांधीनगर में 22 साल से कब्जाई गई एक दुकान को जिला प्रशासन ने मुक्त कराकर उसके असली मालिक बुजुर्ग दंपति को सौंप दिया. जांच में शिकायत सही मिलने के बाद डीएम रविंद्र कुमार ने पुलिस और प्रशासनिक टीम के साथ कार्रवाई कर दुकान खाली कराई. दुकान वापस मिलने पर भावुक दंपति ने डीएम को हनुमान जैसा बताया.

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22 साल बाद बुजुर्ग को मिली अपनी दुकान. (Photo: Screengrab)
22 साल बाद बुजुर्ग को मिली अपनी दुकान. (Photo: Screengrab)

गाजियाबाद में एक बुजुर्ग दंपति को 22 साल बाद अपनी दुकान का कब्जा वापस मिला तो उनकी आंखें नम हो गईं. सालों तक न्याय के लिए भटकने के बाद जब प्रशासन ने कार्रवाई कर दुकान खाली कराई और उसे असली मालिकों को सौंपा, तो भावुक दंपति ने जिलाधिकारी की तुलना हनुमान जी से कर दी. यह मामला अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है. मामला गाजियाबाद के गांधीनगर क्षेत्र का है, जहां एक दुकान पर पिछले 22 वर्षों से कब्जा बताया जा रहा था. बुजुर्ग दंपति ने अपनी परेशानी और शिकायत जिलाधिकारी के सामने रखी थी. उनका कहना था कि उनकी दुकान पर लंबे समय से कब्जा था और तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा था.

शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया. प्रशासन की ओर से दस्तावेजों की जांच कराई गई और पूरे मामले का परीक्षण किया गया. जांच के दौरान शिकायत सही पाई गई. इसके बाद स्क्रीनिंग कमेटी के निर्णय के आधार पर कार्रवाई का फैसला लिया गया. मंगलवार को जिलाधिकारी रविंद्र कुमार खुद पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गांधीनगर पहुंचे. प्रशासन की मौजूदगी में दुकान को कब्जे से मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की गई. पुलिस बल भी मौके पर तैनात रहा ताकि कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से पूरी की जा सके.

स्क्रीनिंग कमेटी की मंजूरी के बाद प्रशासन ने की कार्रवाई

कार्रवाई पूरी होने के बाद दुकान को उसके वास्तविक मालिक बुजुर्ग दंपति को सौंप दिया गया. इस मौके पर एक प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें जिलाधिकारी रविंद्र कुमार ने नारियल फोड़कर दुकान का उद्घाटन कराया और उसे मालिकों के हवाले कर दिया. बुजुर्ग दंपति ने बताया कि दुकान पर पिछले 22 वर्षों से कब्जा था. उनका आरोप था कि कब्जाधारी मोहम्मद इमामुद्दीन मलिक द्वारा दुकान खाली कराने की मांग करने पर उन्हें धमकियां भी दी जाती थीं. उन्होंने कहा कि वर्षों तक उन्होंने न्याय पाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली.

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दंपति के अनुसार समय के साथ उन्होंने उम्मीद भी छोड़ दी थी कि कभी उनकी दुकान वापस मिल सकेगी. लेकिन प्रशासन की कार्रवाई के बाद उनकी वर्षों पुरानी लड़ाई का अंत हो गया. दुकान वापस मिलने के बाद उनकी भावनाएं छलक पड़ीं और उन्होंने प्रशासन का धन्यवाद किया. भावुक बुजुर्ग दंपति ने कहा कि जिलाधिकारी उनके लिए हनुमान बनकर आए हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह वर्षों से चली आ रही परेशानी का अंत हुआ है, वह उनके लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और जिला प्रशासन के प्रति भी आभार व्यक्त किया.

इस पूरी कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोग भी मौके पर मौजूद रहे. प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया को पूरा किया गया. दुकान वापस मिलने की खबर इलाके में तेजी से फैल गई और यह चर्चा का विषय बन गई. स्थानीय लोग इस कार्रवाई को लंबे समय से लंबित मामलों के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं. लोगों का कहना है कि वर्षों से चले आ रहे विवाद का समाधान होने से यह संदेश गया है कि शिकायतों पर कार्रवाई की जा रही है और वास्तविक मालिकों को उनका अधिकार दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं.

पुलिस और अधिकारियों की मौजूदगी में खाली कराई दुकान

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फिलहाल बुजुर्ग दंपति अपनी दुकान वापस मिलने से बेहद खुश हैं. 22 साल के लंबे इंतजार के बाद उन्हें अपनी संपत्ति का अधिकार मिला है और इसी खुशी में उन्होंने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब उन्हें न्याय मिलने का संतोष है.
 

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