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6 दिन में चार्जशीट, 13 गवाह, 40 दिन में फैसला... पटककर की गई थी मासूम की हत्या, फिरोजाबाद कांड की पूरी कहानी

30 मई 2026... उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद में हुई एक ऐसी वारदात, जिसने पूरे देश को झकझोर दिया. डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला गया. घटना का वीडियो और खबर सामने आई तो हर तरफ गुस्सा था. इस हत्याकांड में महज 6 दिन में चार्जशीट दाखिल हुई. 13 गवाहों के बयान हुए और 40 दिन के भीतर जिला अदालत का फैसला आ गया.

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बच्चे की मां से शादी करना चाहता था विराज. (Photo: Screengrab)
बच्चे की मां से शादी करना चाहता था विराज. (Photo: Screengrab)

30 मई 2026... फिरोजाबाद की एक सड़क पर डेढ़ साल का मासूम आरव अपनी मां की गोद से छिन गया. एकतरफा प्यार में पागल युवक ने बच्चे को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला. पूरा देश इस वारदात से सिहर गया. पुलिस ने महज 6 दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी, कोर्ट में 13 गवाह पेश हुए और 40 दिन के भीतर जिला कोर्ट ने मौत की सजा सुना दी. आइए पूरी टाइमलाइन समझते हैं.

30 मई की दोपहर शिकोहाबाद की यादव कॉलोनी में लोग अपने-अपने काम में लगे थे. तभी कुछ ही मिनटों में ऐसा मंजर सामने आया, जिसे देखने वालों की रूह कांप गई. बदायूं के रहने वाले विराज उर्फ जितेंद्र पाठक ने डेढ़ साल के मासूम आरव को सड़क पर पटक-पटककर मार डाला. मासूम का कसूर सिर्फ इतना था कि वह उस महिला का बेटा था, जिससे आरोपी शादी करना चाहता था.

firozabad aarav murder case charge sheet to death sentence complete timeline

परिवार के मुताबिक, विराज रति से शादी करना चाहता था, लेकिन रति ने इससे इनकार कर दिया. इसी एकतरफा जुनून और बदले की भावना में आरोपी ने परिवार को ऐसी चोट दी, जिसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती. वह बहाने से बच्चे को अपने साथ ले गया और सड़क पर पटककर बर्बर तरीके से हत्या कर दी. इस हत्याकांड ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी. यह वारदात पास में लगे एक सीसीटीवी में कैद हुई थी. इसका वीडियो फुटेज जब सामने आया तो वह रूह कंपा देने वाला था.

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यह भी पढ़ें: 30 सेकंड में बच्चे को 8 बार पटका... मासूम आरव की जितेंद्र ने क्यों ली थी जान, दरिंदगी की पूरी कहानी

इस वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इसे प्राथमिकता पर लिया. मौके से सबूत जुटाए गए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए गए और आरोपी की तलाश शुरू हुई. आमतौर पर ऐसे मामलों में चार्जशीट तैयार होने में महीनों लग जाते हैं. लेकिन इस केस में पुलिस की प्राथमिकता साफ थी- सबूत मजबूत हों और केस जल्द अदालत तक पहुंचे.

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घटना के महज छह दिन बाद पुलिस ने अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी. इसका मतलब था कि जांच एजेंसी ने रिकॉर्ड समय में अपने सबूत और दस्तावेज कोर्ट के सामने रख दिए. चार्जशीट दाखिल होने के बाद जिला एवं सत्र न्यायालय में सुनवाई शुरू हुई. अभियोजन पक्ष ने 13 गवाह पेश किए. इन गवाहों के बयान, जांच के दौरान जुटाए गए साक्ष्य और अन्य दस्तावेज अदालत के सामने रखे गए.

बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश किया गया. लगातार सुनवाई के दौरान अदालत ने हर पहलू को परखा. अभियोजन का दावा था कि आरोपी के खिलाफ मौजूद साक्ष्य संदेह की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ते.

पूरी टाइमलाइन एक नजर में...

  • 30 मई 2026: शिकोहाबाद में डेढ़ साल के आरव की सड़क पर पटककर हत्या.
  • 31 मई- 5 जून: पुलिस की जांच, साक्ष्य जुटाए गए और आरोपी के खिलाफ केस मजबूत किया गया.
  • 6 दिन के भीतर: अदालत में चार्जशीट दाखिल.
  • जून-जुलाई: जिला अदालत में नियमित सुनवाई, अभियोजन की ओर से 13 गवाह और बचाव पक्ष की ओर से एक गवाह पेश.
  • 9 जुलाई 2026: अदालत ने हत्या करने वाले को दोषी करार दिया.
  • 10 जुलाई 2026: जिला जज ने विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को मृत्युदंड की सजा सुनाई.

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करीब डेढ़ महीने की सुनवाई के बाद 9 जुलाई को अदालत ने अपना फैसला सुनाया. जिला एवं सत्र न्यायालय ने विराज उर्फ जितेंद्र पाठक को दोषी करार दिया. इसके बाद सभी की नजर सजा के ऐलान पर टिक गई. 10 जुलाई को जिला जज ने सजा पर फैसला सुनाया. जज ने विराज को मृत्युदंड देने का आदेश दिया तो कोर्ट का माहौल बदल गया.

सरकारी अधिवक्ता राजीव प्रियदर्शी के मुताबिक, फैसला सुनने के बाद आरोपी ने कोर्ट के भीतर खुद को थप्पड़ मारना शुरू कर दिया. 40 दिन पहले जिस वारदात ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था, उसी मामले में जिला अदालत ने अपना फैसला सुना दिया.

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फैसले के बाद बच्चे की मां ने क्या कहा?

फैसले के बाद जब मृतक बच्चे की मां रति शर्मा से बात की तो उन्होंने पुलिस, प्रशासन, अभियोजन और अदालत का धन्यवाद करते हुए कहा कि उन्हें न्याय मिला है. लेकिन उनका बेटा कभी वापस नहीं आएगा. रति शर्मा ने कहा कि अब उन्हें उम्मीद है कि हाईकोर्ट में भी यही फैसला बरकरार रहेगा और दोषी को जल्द फांसी मिले.

उन्होंने उन 13 गवाहों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने अदालत में जाकर सच बोलने की हिम्मत दिखाई. उनकी एक और बात चर्चा में रही. उन्होंने कहा कि जिस तरह उनके बेटे के केस में 40 दिन के भीतर फैसला आया, उसी तरह दूसरे गंभीर मामलों में भी पीड़ित परिवारों को वर्षों इंतजार नहीं करना चाहिए.

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रति शर्मा के मायके बामई गांव में भी फैसले को लेकर चर्चा रही. ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने जिस दर्द के साथ मासूम की मौत देखी थी, अदालत के फैसले से उन्हें यह भरोसा मिला कि कानून पीड़ित के साथ है. लोगों ने पुलिस और अदालत की तेजी की भी सराहना की और उम्मीद जताई कि ऊपरी अदालतों में भी यही फैसला कायम रहेगा.

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