दुकान पर पिता अपनी बेटी के साथ पहुंचा. दोनों बिल्कुल सामान्य ग्राहक नजर आ रहे थे. कुछ देर तक दुकानदार से सामान को लेकर बातचीत होती रही. फिर पिता ने अपनी बेटी से कहा कि वह दुकानदार के साथ अंदर जाकर खाद देख ले. बेटी दुकानदार के साथ अंदर चली गई और पिता बाहर ही खड़ा रहा. दुकानदार को उस वक्त जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही मिनट बाद उसकी दुकान का गल्ला खाली हो जाएगा. जब वह वापस आया और गल्ला खोला तो उसके होश उड़ गए. उसमें रखे डेढ़ लाख रुपये गायब थे.
बिजनौर के चांदपुर क्षेत्र में हुई इस वारदात की जांच जब पुलिस ने शुरू की तो सामने आई कहानी ने पुलिस को भी चौंका दिया. पुलिस के मुताबिक चोरी करने वाली कोई आम जोड़ी नहीं थी, बल्कि पिता और उसकी अपनी बेटी थे. आरोप है कि दोनों दुकानदारों को इसी तरीके से उलझाकर मौका मिलते ही नकदी और कीमती सामान पर हाथ साफ करते थे. पुलिस ने पिता-पुत्री को गिरफ्तार कर लिया है. जांच में दोनों के तार बिजनौर के अलावा मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर समेत कई जिलों की घटनाओं से जुड़ने का दावा किया गया है.
25 सितंबर को दुकान पर पहुंचे थे पिता-बेटी
घटना 25 सितंबर की है. चांदपुर क्षेत्र के जलीलपुर स्थित किसान सेवा केंद्र पर एक व्यक्ति अपनी बेटी के साथ पहुंचा. दोनों ने सामान खरीदने की बात कही और दुकानदार से बातचीत शुरू कर दी. दुकान पर ग्राहक आए तो दुकानदार का ध्यान उनकी तरफ जाना स्वाभाविक था. पुलिस के मुताबिक इसी दौरान पिता ने अपनी बेटी को दुकानदार के साथ दुकान के अंदर जाने के लिए कहा. बेटी अंदर चली गई और पिता बाहर ही रुक गया. कुछ देर बाद दोनों वहां से निकल गए. दुकानदार को उस समय तक कुछ भी असामान्य नहीं लगा. लेकिन जब उसने गल्ला खोला तो उसमें रखी करीब डेढ़ लाख रुपये की रकम गायब थी. तुरंत उसे समझ आया कि दुकान पर कुछ देर पहले आए दोनों लोगों पर शक करना जरूरी है.
पिता बाहर, बेटी अंदर... पुलिस को मिला वारदात का तरीका
पुलिस की जांच में इस घटना का सबसे अहम पहलू यही सामने आया कि पिता और बेटी की भूमिकाएं कथित तौर पर अलग-अलग थीं. पुलिस के मुताबिक बेटी दुकानदार से बातचीत करती या उसके साथ अंदर चली जाती थी, जबकि पिता बाहर रहकर स्थिति पर नजर रखता था. दुकानदार का ध्यान बंटते ही कथित तौर पर गल्ले या ऐसी जगह को निशाना बनाया जाता था, जहां नकदी रखी हो. इस तरीके में महिला के साथ होने का फायदा भी उठाया जाता था. पुलिस के अनुसार पिता-बेटी होने के कारण उन पर सामान्य तौर पर आसानी से शक नहीं होता था. यही कथित रणनीति दोनों को कई जगहों पर वारदात करने में मदद करती रही.
मोटर साइकिल बनी अहम सुराग
डेढ़ लाख रुपये गायब होने के बाद किसान सेवा केंद्र के संचालक ने चांदपुर थाने में शिकायत दर्ज कराई. पुलिस ने मामला दर्ज करने के बाद आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की. दुकान के आसपास के कैमरों से लेकर आरोपियों के संभावित रास्ते तक की फुटेज देखी गई. जांच में एक मोटरसाइकिल और उस पर सवार दो लोगों की गतिविधियां पुलिस के लिए अहम सुराग बनीं. इसके बाद पुलिस ने यह पता लगाने की कोशिश शुरू की कि दोनों किस रास्ते से आए और वारदात के बाद कहां गए. जांच धीरे-धीरे दूसरे जिलों तक पहुंची.
बिजनौर से मुरादाबाद और सहारनपुर तक जुड़ते गए तार
पुलिस के अनुसार पूछताछ और जांच के दौरान सामने आया कि दोनों पर सिर्फ जलीलपुर की घटना का संदेह नहीं है. बिजनौर के धामपुर, नगीना और कोतवाली देहात क्षेत्र में हुई कुछ घटनाओं के अलावा मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में भी इसी तरह की वारदातों से उनके तार जुड़ने की बात सामने आई. पुलिस का कहना है कि आरोपियों ने पूछताछ में कई घटनाओं में शामिल होने की बात कथित तौर पर स्वीकार की है. अब पुलिस संबंधित जिलों की पुलिस से संपर्क कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वहां दर्ज मामलों में इन दोनों की भूमिका थी या नहीं.
सहारनपुर के गांव से दोनों गिरफ्तार
CCTV और दूसरे सुरागों के आधार पर पुलिस आरोपियों तक पहुंची. इसके बाद सहारनपुर के गांव गुनारसा में दबिश देकर पुलिस ने योगेंद्र और उसकी बेटी लक्ष्मी को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के मुताबिक जलीलपुर किसान सेवा केंद्र से चोरी की गई डेढ़ लाख रुपये की रकम में से 30,200 रुपये बरामद किए गए हैं. बाकी रकम कहां खर्च हुई या किसके पास है, इसे लेकर भी पुलिस जांच कर रही है.
शादीशुदा बेटी, फिर भी पिता के साथ चोरी के आरोप
पुलिस अधीक्षक केके बिश्नोई के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि योगेंद्र और लक्ष्मी पिता-पुत्री हैं और लक्ष्मी की शादी भी हो चुकी है. इसके बावजूद दोनों कथित तौर पर चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के लिए अलग-अलग जिलों में घूमते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह तरीका कब से अपनाया जा रहा था और अब तक कितनी दुकानों को निशाना बनाया गया. पुलिस के मुताबिक पिता-पुत्री ने पहचान छिपाने के लिए भी इंतजाम कर रखा था. दोनों कथित तौर पर बाइक पर हेलमेट और मास्क लगाकर चलते थे. इससे CCTV फुटेज में चेहरा स्पष्ट नजर न आए. इतना ही नहीं, मोटरसाइकिल की पहचान छिपाने के लिए बिना नंबर की बाइक का इस्तेमाल करने की बात भी सामने आई है. यानी दुकान पर पहुंचने से लेकर वहां से निकलने तक पहचान छिपाने की कोशिश की जाती थी. लेकिन CCTV कैमरों की अलग-अलग फुटेज को जोड़कर पुलिस आखिरकार दोनों तक पहुंच गई.
दुकानदारों को ऐसे बनाते थे निशाना
पुलिस के अनुसार दोनों ऐसे दुकानदारों को निशाना बनाते थे जिन्हें देखकर लगता था कि वे सरल स्वभाव के हैं और दुकान पर अकेले या कम लोगों के साथ रहते हैं. पहले ग्राहक बनकर बातचीत शुरू होती. इसके बाद किसी सामान की कीमत, खरीदारी या दूसरी बात में दुकानदार का ध्यान लगाया जाता. जैसे ही दुकानदार किसी दूसरे काम में व्यस्त होता, कथित तौर पर नकदी या कीमती सामान चोरी कर लिया जाता. पुलिस का दावा है कि महिला के साथ होने की वजह से दोनों पर पहली नजर में संदेह कम होता था.