
अयोध्या की पॉक्सो अदालत ने भदरसा गैंगरेप मामले में समाजवादी पार्टी के नेता मोईद खान को सभी आरोपों से बाइज्जत बरी कर दिया. न्यायाधीश ने डीएनए रिपोर्ट में मोईद खान का सैंपल मैच न होने के आधार पर यह फैसला सुनाया. वहीं, इसी मामले में सह-आ आरोपी और मोईद के नौकर राजू खान को दोषी करार देते हुए 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई. यह कानूनी प्रक्रिया जुलाई 2024 में नाबालिग लड़की के गर्भवती होने और प्राथमिकी दर्ज होने के बाद शुरू हुई थी. पुलिस ने डीएनए साक्ष्य को इस न्याय प्रक्रिया का मुख्य आधार बनाया.
अखिलेश यादव का तीखा वार
मोईद खान के बरी होते ही अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के जरिए सरकार को आड़े हाथों लिया. उन्होंने सवाल किया कि क्या भाजपा के पास ऐसा कोई बुलडोजर है जो लोगों के टूटे घर बना सके और उनके मान-सम्मान को वापस लौटा सके.
अखिलेश ने कहा कि सत्ताधीश अपने मुकदमे तो हटवा सकते हैं, लेकिन 'ऊपरवाले की अदालत' में उनके पापों का हिसाब लिखा जा रहा है. उन्होंने भाजपा की बुलडोजर नीति को विध्वंसकारी और एकतरफा पक्षपातपूर्ण रवैया बताया.
डीएनए रिपोर्ट बनी ढाल
इस सनसनीखेज मामले में वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे निर्णायक साबित हुए. जांच के दौरान कराए गए डीएनए टेस्ट में मोईद खान की रिपोर्ट नेगेटिव आई, जबकि राजू खान का डीएनए पॉजिटिव पाया गया. इसी आधार पर अदालत ने माना कि मोईद खान पर लगे आरोप साबित नहीं होते. हालांकि, दोषमुक्त होने के बाद भी मोईद खान अभी जेल में ही रहेंगे क्योंकि उन पर पहले से ही गैंगस्टर एक्ट के तहत मामला चल रहा है. राजू खान पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है.

बुलडोजर कार्रवाई पर फिर छिड़ी बहस
घटना के सामने आते ही अयोध्या प्रशासन ने सक्रियता दिखाते हुए मोईद खान की बेकरी और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स पर बुलडोजर चला दिया था. उस वक्त इस कार्रवाई को 'त्वरित न्याय' के रूप में देखा गया था, लेकिन अब अदालत से बरी होने के बाद इस पर सवाल उठ रहे हैं. अखिलेश यादव ने इसे 'साजिश बनाम सच्चाई' की लड़ाई बताते हुए कहा कि भाजपा की सियासत नाइंसाफी कर रही है और अब उसकी हार सामने है.