सोशल मीडिया पर किसी बीमारी का इलाज तलाशते हुए अगर आपको कोई खुद को बड़ा डॉक्टर या विशेषज्ञ बताकर दवा बेचने लगे तो सावधान हो जाइए. बरेली में पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने सोशल मीडिया को ही अपना नकली क्लीनिक और घर को दवा पैकिंग सेंटर बना रखा था.
पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य Instagram पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम से पहचान बनाकर लोगों को लुभाते थे. बातचीत के दौरान खुद को डॉक्टर और वरिष्ठ पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ बताते थे और पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने का दावा कर दवाएं बेचते थे. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस के अनुसार ग्राहकों से डॉक्टर बनकर बात करने वाला आरोपी सिर्फ कक्षा 8 तक पढ़ा है. आरोप है कि वह फोन पर मरीजों की तरह बात करने वाले ग्राहकों को भरोसा दिलाता और फिर उनसे ऑनलाइन ऑर्डर लेकर पैसे अपने बैंक खातों में मंगवाता था. पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी मौके से फरार हो गया. पुलिस अब गिरोह से जुड़े दूसरे लोगों और सप्लायरों की तलाश कर रही है.
Instagram पर डॉक्टर की पहचान, पीछे से चल रहा था कथित फर्जीवाड़ा
न्यूज एजेंसी के मुताबिक पुलिस जांच में पता चला कि ग्राहकों तक पहुंचने के लिए Instagram का इस्तेमाल किया. सोशल मीडिया पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम से पहचान बनाई गई थी. इस प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को ऐसी दवाओं के बारे में बताया जाता था, जिन्हें पुरुषों की यौन कमजोरी दूर करने वाली दवा के रूप में पेश किया जाता था. ग्राहक जब सोशल मीडिया पोस्ट या संपर्क नंबर के जरिए गिरोह तक पहुंचते तो फोन पर बातचीत होती. पुलिस का आरोप है कि इसी दौरान आरोपी खुद को डॉक्टर या पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ बताते थे.
कक्षा 8 पास युवक बना डॉक्टर!
पूरे मामले का सबसे हैरान करने वाला हिस्सा आरोपी समीरुद्दीन से जुड़ा है. पुलिस के मुताबिक 24 वर्षीय समीरुद्दीन ने कक्षा 8 तक पढ़ाई की है, लेकिन वह फोन पर ग्राहकों से डॉक्टर बनकर बातचीत करता था. आरोप है कि वह ग्राहकों की समस्याएं सुनता, उन्हें दवाओं के बारे में बताता और फिर ऑर्डर लेता था. पुलिस के मुताबिक इस कथित कॉल सेंटर में ग्राहकों का डेटा कंप्यूटर पर संभालने की व्यवस्था भी थी. यानी यह सिर्फ दो लोगों का अनौपचारिक कारोबार नहीं था, बल्कि ग्राहक खोजने, फोन पर बात करने, ऑर्डर लेने, भुगतान हासिल करने और दवाओं को पैक करके भेजने का पूरा सिस्टम बनाया गया था.
250-300 रुपये में शुरू होता था ‘इलाज’
पुलिस के अनुसार ग्राहकों से प्रत्येक ऑर्डर के बदले करीब 250 से 300 रुपये या उससे अधिक की रकम UPI के जरिए बैंक खातों में मंगाई जाती थी. ऑर्डर ऑनलाइन लिया जाता और फिर दवाओं को पार्सल के जरिए ग्राहक के पते पर भेज दिया जाता. यानी ग्राहक और फर्जी डॉक्टर के बीच आमने-सामने मुलाकात की जरूरत ही नहीं थी. Instagram पर प्रचार, फोन पर बातचीत, UPI से भुगतान और कूरियर से डिलीवरी इसी डिजिटल मॉडल के जरिए कथित कारोबार चल रहा था. पुलिस का कहना है कि यह गिरोह करीब एक साल से सक्रिय था और देश के अलग-अलग हिस्सों में पार्सल भेजे जाने की जानकारी सामने आई है.
घर में कंप्यूटर से लेकर कैप्सूल भरने तक का इंतजाम
पुलिस ने सूचना के आधार पर बरेली की राजीव एन्क्लेव कॉलोनी स्थित एक मकान पर छापा मारा. पुलिस के अनुसार वहां का दृश्य किसी छोटे ऑनलाइन ऑफिस और पैकिंग यूनिट जैसा था. एक आरोपी कंप्यूटर पर ग्राहकों का डेटा संभाल रहा था, जबकि दूसरा कथित तौर पर खाली कैप्सूल में पाउडर भरकर उन्हें डिब्बों में पैक कर रहा था. पुलिस ने मौके से बड़ी मात्रा में सामान बरामद किया. बरामदगी में छह कंप्यूटर, आठ मॉनिटर, एक लैपटॉप, तीन प्रिंटर, एक स्कैनर और 12 मोबाइल फोन शामिल हैं. इसके अलावा कथित नकली दवाओं के 85 पैकेट, पैकिंग सामग्री और एक फर्जी लाइसेंस भी बरामद होने की बात पुलिस ने कही है.
नकली लाइसेंस भी तैयार कर रखा था
पुलिस के अनुसार गिरोह ने कार्रवाई से बचने के लिए कथित तौर पर एक फर्जी मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस भी तैयार कर रखा था. इससे पुलिस को आशंका है कि आरोपी सिर्फ सोशल मीडिया पर दवाओं का प्रचार करने तक सीमित नहीं थे, बल्कि अपने कथित कारोबार को वैध दिखाने के लिए दस्तावेजों का सहारा भी ले रहे थे. गिरोह द्वारा देवचंदनिया इलाके में एक दुकान चलाने की बात भी पुलिस जांच में सामने आई है. अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि दुकान, मकान और ऑनलाइन नेटवर्क के बीच क्या संबंध था.
सहारनपुर और मुरादाबाद से आता था कच्चा माल
पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को कथित तौर पर बताया कि वे सस्ता पाउडर और कच्चा माल सहारनपुर और मुरादाबाद के खुले बाजारों से खरीदते थे. इसके बाद उसी सामग्री को कैप्सूल में भरकर पैक किया जाता था. पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि यह कच्चा माल किससे खरीदा जाता था और क्या सप्लाई करने वाले लोग भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे. इसी वजह से पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जांच शुरू कर दी है.
1.99 लाख रुपये और 14 ATM कार्ड बरामद
छापे के दौरान पुलिस को 1.99 लाख रुपये नकद, छह चेकबुक और 14 ATM कार्ड भी मिले हैं. पुलिस इन बैंक खातों और लेनदेन की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कथित ऑनलाइन कारोबार से कितनी रकम जुटाई गई और पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचता था. बैंक खातों की जांच से कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों तक पहुंचने में भी पुलिस को मदद मिल सकती है. पुलिस ने इस मामले में समीरुद्दीन (24) और यूसुफ (25) को गिरफ्तार किया है. यूसुफ का भाई इलियास खान मौके से फरार हो गया. पुलिस की टीमें उसकी तलाश में छापेमारी कर रही हैं. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों और कथित सप्लायरों की भूमिका भी जांच के दायरे में है.