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बिजनौर: समझाने के बाद भी सड़क किनारे बैठकर अदा की नमाज, 35 लोगों पर FIR

चांदपुर क्षेत्र में बकरीद के मौके पर ईदगाह के बाहर सार्वजनिक सड़क पर नमाज अदा करने के मामले में पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है. सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल होने के बाद पुलिस ने घटना का संज्ञान लेते हुए 15 नामजद और करीब 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है.

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बिजनौर में सड़क किनारे नमाज (Photo- Screengrab)
बिजनौर में सड़क किनारे नमाज (Photo- Screengrab)

Uttar Pradesh News: बिजनौर की चांदपुर थाना पुलिस ने 28 मई की सुबह जलीलपुर रोड स्थित ईदगाह के बाहर सार्वजनिक मार्ग पर नमाज अदा करने के मामले में एक्शन लिया है. 15 नामजद और 20-25 अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. बकरीद के त्योहार पर बड़ी संख्या में लोग नमाज के लिए पहुंचे थे, जहां सुबह लगभग 6:45 बजे कुछ लोग ईदगाह परिसर से बाहर निकलकर सड़क किनारे बैठ गए. ड्यूटी पर तैनात पुलिस बल और अधिकारियों ने शासन की गाइडलाइन और जिला प्रशासन के आदेशों का हवाला देकर उन्हें सार्वजनिक स्थान पर नमाज न पढ़ने के लिए समझाया था. इसके बावजूद कुछ लोगों ने आदेशों की अवहेलना करते हुए सड़क पर नमाज अदा की, जिसके बाद पुलिस ने यह कानूनी कार्रवाई की.

सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल

मामले ने उस समय तूल पकड़ लिया जब सड़क पर नमाज अदा करते लोगों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं. इसके बाद प्रभारी निरीक्षक राहुल सिंह की ओर से मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई गई. पुलिस का साफ कहना है कि सार्वजनिक स्थान पर इस प्रकार का जमावड़ा लगाना और सरकारी आदेशों का उल्लंघन करना कानूनन गलत है. इसी आधार पर त्वरित कार्रवाई शुरू की गई है.

सलीम, मुशर्रफ समेत 15 पर केस

पुलिस ने जिन लोगों को इस मामले में नामजद किया है, उनमें समून, नवी बख्श, ऐजाज, सलीम, मुशर्रफ, मोहम्मद अहमद, अलीम चौधरी, हाजी अनवार, बदरुद्दीन, बिकालुद्दीन, तमीदुद्दीन, अब्दुल रऊफ, मुमताज, छम्मन उर्फ शैफुद्दीन और इरफान शामिल हैं. इसके साथ ही 20 से 25 अज्ञात व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, घटना की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी गई है और साक्ष्यों के आधार पर आगे कदम उठाए जाएंगे.

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कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्राथमिकता

इस प्रशासनिक कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में चर्चा का माहौल बना हुआ है. पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि त्योहारों के दौरान शांति, कानून-व्यवस्था और सुचारू यातायात बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है. शासन द्वारा सार्वजनिक मार्गों पर धार्मिक आयोजन या भीड़ जुटाने को लेकर जो दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, उनका पालन सभी नागरिकों के लिए अनिवार्य है और इसका सख्ती से पालन कराया जाएगा.

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