
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में तीन महिलाओं ने मुश्किल हालात के आगे हार मानने की बजाय अपनी जिंदगी बदलने की ठानी. किसी को पति ने तीन बेटियों के साथ घर से निकाल दिया था तो कोई आर्थिक तंगी से जूझ रही थी. लेकिन स्वयं सहायता समूह से मिले कर्ज ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का रास्ता दिखाया.
बाराबंकी के बंकी ब्लॉक की नूरपुर ग्राम पंचायत की निवासी सकीना बानो ने साल 2021 में ख्वाजा स्वयं सहायता समूह से कर्ज लेकर अपना पहला ई-रिक्शा खरीदा. कमाई शुरू हुई तो उन्होंने कर्ज चुकाया और दूसरा ई-रिक्शा भी खरीद लिया. इसके बाद चार लाख रुपये का कर्ज लेकर, भाइयों की मदद और अपनी जमा-पूंजी से एक कार खरीदी और उसे ओला में लगा दिया.
आज सकीना बानो के पास दो ई-रिक्शा और एक कार है. उनके मुताबिक, तीनों गाड़ियों से हर महीने 25 से 30 हजार रुपये की कमाई हो रही है. इसी कमाई से वह अपने परिवार का खर्च उठाने के साथ तीनों बेटियों की पढ़ाई और परवरिश भी कर रही हैं. उन्होंने इसके लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया है.
सकीना बानो की तरह बारांकी की मोनी विश्वकर्मा ने फसल काटने की मशीन खरीदकर रोजगार शुरू किया, जबकि निशा यादव ने मसाला और आटा पीसने की चक्की लगाई. ग्रामीण आजीविका योजना और स्वयं सहायता समूह से जुड़कर इन महिलाओं ने न सिर्फ अपनी आर्थिक स्थिति बदली बल्कि आत्मनिर्भरता की मिसाल भी पेश की.

मोनी विश्वकर्मा का कहना है कि स्वयं सहायता समूह की वजह से उन्हें समाज में नई पहचान मिली है. उन्होंने कहा, 'हमने समूह बनाया, फिर फसल काटने वाली मशीन करीब डेढ़ लाख रुपये में ली. इतना ही समूह से लोन लिया. इससे हमें हर फसल की कटाई में 30 से 35 हजार की कमाई हो जाती है. पहले हमारे घर के हालात अच्छे नहीं थे, हमारी माली हालत भी अच्छी नहीं थी. अब पहले से सब ठीक हैं.'
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निशा यादव नामक महिला ने चक्की लगाकर अपना रोजगार शुरू किया. निशा दाउदपुर की रहने वाली हैं. उन्होंने शिव स्वयं महिला सहायता समूह से 50 हजार रुपये का कर्ज लेकर मसाला और आटा पीसने की चक्की लगाई. निशा के मुताबिक, उन्हें इस काम से हर महीने 15 से 20 हजार रुपये की बचत हो जाती है.
उनका कहना है कि इस कारोबार से उन्हें घर चलाने में मदद मिलती है और बच्चों की फीस भी जमा हो जाती है. उन्होंने कहा, 'हमने समूह से 50 हजार रुपये लोन लेकर चक्की लगाई है. इसमें गांव के लोग आकर मसाला या आटा पिसवाते हैं. अब हमें महीने के 15 से 20 हजार रुपये बच जाते हैं.'
बाराबंकी उपायुक्त सुनील कुमार कौशल के मुताबिक, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री की योजनाओं के तहत हर साल हजारों महिलाओं को लखपति बनाने का लक्ष्य लेकर काम किया जा रहा है. गांवों में महिलाओं के स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें पंजीकृत किया जाता है. ताकि वे समूहों के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों से जुड़ सकें. उन्होंने बताया कि सकीना ने दो ई-रिक्शा खरीदने के बाद कार लेकर उसे ओला में लगाया है. वहीं, दाउदपुर की दो अन्य महिलाओं ने भी समूह से जुड़कर रोजगार शुरू किया है.