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अयोध्या: सुरक्षा पर 11 महीने में 10 करोड़ का खर्च फिर भी हो गई चोरी, जांच के घेरे में कई बड़े नाम

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच और गहरी हो गई. एसआईटी अब सिर्फ आरोपी टिन्नू यादव ही नहीं, बल्कि सीसीटीवी सिस्टम, पास जारी करने की प्रक्रिया, सुरक्षा व्यवस्था और तकनीकी कर्मचारियों की भूमिका भी खंगाल रही है. 11 महीनों में सुरक्षा पर 10 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद इस चोरी के आरोपों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ हो चुकी है.

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अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम (Photo- ITG)
अयोध्या पहुंची एसआईटी की टीम (Photo- ITG)

रामनगरी में इन दिनों श्रद्धा और सवाल दोनों साथ-साथ चल रहे हैं. एक ओर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रामलला का भव्य मंदिर है, दूसरी ओर उसी परिसर में चल रही जांच ने कई नई जिज्ञासाओं को जन्म दे दिया है. SIT जांच का दायरा तेजी से बढ़ रहा है और कई जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है.

अब तक जांच में सबसे बड़ा नाम रमाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव रहा है. लेकिन सूत्रों के मुताबिक एसआईटी अब उन लोगों की भूमिका भी समझने की कोशिश कर रही है जो मंदिर की सुरक्षा, निगरानी और प्रवेश व्यवस्था से सीधे जुड़े हुए हैं. यही वजह है कि तकनीकी स्टाफ, सुरक्षा कर्मियों और प्रशासनिक कर्मचारियों से लगातार पूछताछ की जा रही है. जांचकर्ताओं का मानना है कि किसी भी बड़े परिसर में होने वाली गतिविधियों को समझने के लिए सिर्फ घटना नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था का अध्ययन जरूरी होता है. यही कारण है कि अब फोकस पूरे सिस्टम पर है.

17 साल से एक ही जगह तैनाती, जांच के घेरे में RMO

जांच के दौरान जिस नाम ने सबसे ज्यादा ध्यान खींचा, वह रेडियो मेंटिनेंस ऑफिसर (RMO) का है. यह वही अधिकारी है जिसके जिम्मे मंदिर परिसर की सीसीटीवी निगरानी व्यवस्था और उससे जुड़े कई तकनीकी पहलुओं की जिम्मेदारी है. सूत्र बताते हैं कि यह अधिकारी लगभग 17 वर्षों से मंदिर व्यवस्था से जुड़ा हुआ है और इतने लंबे समय में उसका तबादला नहीं हुआ. अब जांच एजेंसियां यह समझने का प्रयास कर रही हैं कि आखिर इतनी लंबी तैनाती किन परिस्थितियों में बनी रही. एसआईटी ने सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली, रिकॉर्डिंग सिस्टम, बैकअप व्यवस्था, डेटा संरक्षण और तकनीकी नियंत्रण से जुड़े तमाम पहलुओं पर विस्तार से जानकारी जुटाई है. पेन ड्राइव, डिजिटल रिकॉर्ड, स्टोरेज सिस्टम और तकनीकी दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है. जांच के दौरान बार-बार सीसीटीवी सिस्टम से जुड़े सवाल पूछे जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि एजेंसियां इस कड़ी को बेहद महत्वपूर्ण मान रही हैं.

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सबसे बड़ा सवाल: कैमरे थे तो फिर चूक कहां हुई?

राम मंदिर देश के सबसे सुरक्षित धार्मिक परिसरों में गिना जाता है. यहां सैकड़ों कैमरे, बहुस्तरीय सुरक्षा जांच, पुलिस बल, विशेष सुरक्षा इंतजाम और आधुनिक निगरानी तंत्र मौजूद हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर दान पेटियों या चढ़ावे में किसी तरह की अनियमितता हुई तो वह इतनी मजबूत व्यवस्था के बीच कैसे संभव हुई?

 पास व्यवस्था भी जांच के दायरे में

एसआईटी की नजर अब उस व्यवस्था पर भी है जिसके जरिए मंदिर परिसर में प्रवेश के लिए विशेष पास जारी किए जाते हैं. सूत्रों के अनुसार जांचकर्ता यह जानना चाहते हैं कि किन लोगों को विशेष अनुमति दी गई, किस आधार पर पास जारी हुए और प्रवेश-निकास की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी रही. कुछ विशेष व्यक्तियों के आने-जाने के रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं. जांच एजेंसी यह समझना चाहती है कि क्या किसी ने इस व्यवस्था का अनुचित लाभ उठाया या फिर नियमों में किसी प्रकार की ढील बरती गई.

10 करोड़ की सुरक्षा और उठते सवाल

इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा उस आंकड़े की हो रही है जिसके अनुसार पिछले 11 महीनों में मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर लगभग 10 करोड़ रुपये खर्च किए गए. यह खर्च सुरक्षा उपकरणों, निगरानी तंत्र, मानव संसाधन और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं पर किया गया. इतनी बड़ी राशि और इतने व्यापक इंतजामों के बावजूद चोरी के आरोप सामने आना कई सवाल खड़े कर रहा है. 

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वायरल वीडियो ने बढ़ाई हलचल

इसी बीच दान की गिनती का एक वीडियो सामने आने के बाद चर्चा और तेज हो गई है. वीडियो में दान राशि की गिनती की प्रक्रिया दिखाई देती है. पहली नजर में सब कुछ व्यवस्थित दिखाई देता है. लेकिन जांच अधिकारी इस वीडियो को अंतिम सच मानने के बजाय कई और पहलुओं से जोड़कर देख रहे हैं. दरअसल, वीडियो जितने जवाब देता है, उससे कहीं ज्यादा सवाल भी खड़े करता है. यदि पूरी प्रक्रिया कैमरों की निगरानी में थी तो फिर जांच एजेंसियां रिकॉर्डिंग सिस्टम पर इतना जोर क्यों दे रही हैं?

200 लोगों से पूछताछ की तैयारी

सूत्रों के अनुसार एसआईटी लगभग 200 लोगों से पूछताछ की योजना पर काम कर रही है. अब तक 125 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की जा चुकी है. कई कर्मचारियों को दोबारा बुलाया गया है. कुछ लोगों के बयान दोबारा दर्ज किए जा रहे हैं. इससे यह संकेत मिलता है कि जांच एजेंसी केवल औपचारिक पूछताछ नहीं कर रही, बल्कि अलग-अलग बयानों का मिलान भी कर रही है. टिन्नू यादव से भी घंटों तक पूछताछ हुई है और जांचकर्ताओं के सवालों का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है.

ट्रस्ट के जिम्मेदार पदों पर भी निगाह

जांच के बीच मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक संरचना भी चर्चा में है. ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपाल दास महत्वपूर्ण बैठकों और प्रतिनिधित्व की भूमिका निभाते हैं. महासचिव चंपतराय ऑडिट समिति और व्यवस्थाओं का संचालन देखते हैं. कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि वित्तीय मामलों और दान प्रबंधन से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी संभालते हैं. इसके अलावा नृपेंद्र मिश्र निर्माण समिति, स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ धार्मिक गतिविधियों और डॉ. अनिल कुमार मिश्र प्रशासनिक कार्यों से जुड़े दायित्व निभाते हैं. विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव दर्शन और पास व्यवस्था से जुड़े प्रबंधन को देखते हैं. हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी किसी भी वरिष्ठ पदाधिकारी की भूमिका को लेकर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है, लेकिन पूरे प्रशासनिक ढांचे की कार्यप्रणाली को समझने की कोशिश जरूर की जा रही है.

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श्रद्धालुओं के मन में भी उठ रहे सवाल

मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं के बीच भी इस मामले की चर्चा साफ सुनाई दे रही है. लोगों की जिज्ञासा सिर्फ चोरी तक सीमित नहीं है. अधिकांश लोगों के मन में एक ही सवाल है कि अगर देश के सबसे चर्चित और सबसे सुरक्षित धार्मिक स्थलों में से एक में ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है तो आखिर चूक कहां हुई?

आने वाले दिन अहम

फिलहाल एसआईटी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की जल्दबाजी में नहीं दिख रही. जांच एजेंसी हर कड़ी को जोड़कर पूरे घटनाक्रम की तस्वीर साफ करना चाहती है. लेकिन चौथे दिन की जांच ने इतना जरूर स्पष्ट कर दिया है कि मामला अब सिर्फ चढ़ावे की कथित चोरी तक सीमित नहीं है. जांच की दिशा यह संकेत दे रही है कि सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र, प्रवेश नियंत्रण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं की भी गहन समीक्षा की जा रही है. राम मंदिर में आस्था पहले की तरह अडिग है, लेकिन जांच की यह परतें अब उस सवाल का जवाब खोज रही हैं जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है आखिर 10 करोड़ की सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद सेंध लगी तो कैसे?

ट्रस्ट के प्रमुख सदस्यों के कार्य एवं दायित्व :

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अध्यक्ष महांत नृत्यगोपाल दास : बैठकों व महत्वपूर्ण कार्यों में प्रतिनिधित्व

महासचिव चंपतराय : आडिट समिति के अध्यक्ष और बैठकों व समस्त प्रकार के आयोजनों का प्रबंधन

कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि : वित्त समिति के अध्यक्ष और दान आदि सहित समस्त प्रकार के वित्तीय प्रबंधन

सदस्य नृपेंद्र मिश्र : मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष के रूप में कार्यों की समीक्षा और बैठकों में भागीदारी

सदस्य स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ धार्मिक समिति के अध्यक्ष व बैठकों में भागीदारी

सदस्य डा. अनिल कुमार मिश्र : समस्त प्रकार के प्रशासकीय कार्यों का दायित्व व बैठकों में भागीदारी

विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव : राम मंदिर से जुड़ा समस्त प्रबंधन और दर्शन व आरती पास की व्यवस्था

 अन्य सदस्य बैठकों में भागीदारी या इसमें लिए गए निर्णय के अनुसार दायित्व संभालना.
 

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