आगरा में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास पर कालिख पोतने के मामले में जेल भेजे गए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की रविवार को रिहाई मिल गई. शनिवार को ही सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों को जमानत दे दी थी. इसके साथ ही, कोर्ट ने मामले में लगी हत्या के प्रयास की धारा को भी हटा दिया है.
इस मामले में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को रविवार को रिहाई मिल गई. रविवार सुबह जिला जेल के बाहर कांग्रेस कार्यकर्ता एकत्रित हो गए. जैसे ही कांग्रेस प्रदेश सचिव अनिल यादव, मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर और शाहबाज समेत अन्य आरोपी जेल से बाहर आए, समर्थकों ने फूल-मालाएं पहनाकर उनका स्वागत किया. इस दौरान जमकर नारेबाजी भी की गई.
पुलिस ने नहीं दी जुलूस की अनुमति
कांग्रेस प्रदेश सचिव अनिल यादव, मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर और शाहबाज समेत अन्य कार्यकर्ताओं की रिहाई के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता जुलूस की तैयारी कर रहे थे. हालांकि, मौके पर मौजूद पुलिस ने उन्हें जुलूस निकालने से इनकार किया और उन्हें वहां से हटाया. इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच थोड़ी धक्का-मुक्की भी हुई. लेकिन पुलिस ने कांग्रेस नेताओं और समर्थकों को मौके पर रुकने नहीं दिया और उन्हें वहां से रवाना किया.
क्यों हुई थी गिरफ्तारी
कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने 28 सितंबर को विरोध प्रदर्शन करते हुए आगरा के विजय नगर कॉलोनी स्थित मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पैतृक आवास के मुख्य गेट पर कालिख पोती थी. आरोप है कि उन्होंने गेट पर ‘गद्दार’ और ‘वोट चोर’ जैसे शब्द भी लिखे थे.
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इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कांग्रेस प्रदेश सचिव अनिल यादव, मथुरा जिलाध्यक्ष मुकेश धनगर और शाहबाज समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया था. शनिवार को सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों को जमानत दी और रविवार को उन्हें रिहाई मिल गई.
जेल से बाहर आते ही प्रदेश कांग्रेस महासचिव अनिल यादव ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने सवाल किया है कि पुलिस के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं के विरोध को दबाने की कोशिश की जा रही है.