इन दिनों कई जगह घर बनाते समय मिस्त्री पिलर की ढलाई करते हैं तो उसमें बीच- बीच में प्लास्टिक के खाली बोतल डाल देते हैं. आजकल काफी जगह यह देखने को मिल रहा है. धीरे- धीरे यह एक ट्रेंड बनता जा रहा है. आखिर राजमिस्त्री पिलर ढालते वक्त ऐसा क्यों डालते हैं? चलिए जानते हैं ऐसा करने के पीछे वजह क्या है और यह ट्रेंड तेजी से क्यों बढ़ रहा है?
निर्माण कार्य के दौरान पिलर में प्लास्टिक की बोतल का इस्तेमाल अक्सर कन्स्ट्रक्शन की एक बेहतरीन ट्रिक के रूप में किया जाता है. यह ट्रिक पिलर को मजबूत बनाने के लिए होती है. क्योंकि, इसे पिलर में खाली जगह बनाने और बाद में कंक्रीट को आपस में मजबूती से जोड़ने के लिए एक सांचे की तरह इस्तेमाल किया जाता है.
जब बहुत ऊंचे पिलर या खंभे बनाए जाते हैं, तो उन्हें कई चरणों में ढाला जाता है. क्योंकि, एक बार में ऊंचे पिलर की ढलाई संभव नहीं होती है. ऐसे में हर एक स्टेज की ढलाई के बाद पिलर में खाली जगह बनाने के लिए बीच में बोतल फंसा दी जाती है. जब वह हिस्सा सूख जाता है तो बोतल को बाहर निकाल लिया जाता है. इस तरह वहां एक छोटा सा गहरा गड्ढा या खांचा बन जाता है.
पिलर अंदर से मजबूत बनता है
इसके बाद जब पिलर के अगले चरण की ढलाई होती है और उस पर नया कंक्रीट डाला जाता है, तो वह उस खाली जगह में अच्छी तरह भर जाता है. इससे नया और पुराना कंक्रीट आपस में बहुत मजबूती से चिपक जाते हैं. बोतल की वजह से बने गड्ढे में कंक्रीट जाने से वह सूखकर एक हुक की तरह काम करता है और पिलर के दोनों हिस्से को अंदरूनी तौर पर मजबूती प्रदान करता है. यही वजह है कि पिलर ढालते समय मिस्त्री बीच- बीच में प्लास्टिक की खाली बोतल फंसा देते हैं.
दूसरी वजह भी पिलर में बोतल डालने की
इसके अलावा एक और वजह से भी पिलर में प्लास्टिक की खाली बोतल फंसाई जाती है. कई बार पिलर के अंदर से पानी या बिजली के पाइप को गुजारने के लिए गैप की जरूरत होती है. इसके लिए भी बोतल का इस्तेमाल पिलर के अंदर खाली जगह छोड़ने के लिए किया जाता है. ताकि, बाद में पिलर के अंदर पाइप फिट किया जा सके.