पूरी जिंदगी डिलीवरी बॉय और छोटे-मोटे काम करने वाला एक मामूली सा शख्स बेस्ट सेलर बुक का ऑथर बन गया. वह कोई साहित्यकार नहीं हैं. इससे पहले उन्होंने कोई क्लासिक बुक नहीं लिखी. लेखन में उनकी कोई खास रुचि भी नहीं थी. बस एक दिन उनके मन में अपनी कहानी को शब्दों में बयां करने का विचार आया. फिर उन्होंने अपनी असफलताओं से भरी अब तक की साधारण लाइफ स्टोरी लिख डाली.
चीन के सिचुआन प्रांत में चेंगदू शहर के एक पब्लिक लाइब्रेरी के शांत कोने में बैठा 47 साल का शख्स अपनी नोटबुक में बड़े ध्यान से कुछ लिख रहा है. उसके आसपास बैठे छात्रों को वह शायद किसी अन्य मध्यम आयु वर्ग के व्यक्ति की तरह ही अपना दिन गुजारता हुआ दिखाई दें. बहुत कम लोग अनुमान लगा पाएंगे कि यह व्यक्ति हू अन्यान हैं, जो पुरस्कार विजेता लेखक हैं. उन्होंने 'आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग' नामक एक किताब लिखी है. यह उसकी आत्मकथा है, जिसकी अब तक 20 लाख से ज्यादा प्रतियां बिक चुकी हैं.
जिंदगी भर पार्सल डिलीवरी जैसा मामूली काम करने वाले हू अन्यान आज चीन में वर्किंग-क्लास के हीरो बन गए हैं. हू अपनी इस सफलता की कहानी हांगकांग इंटरनेशनल लिटरेरी फेस्टिवल में भी सुनाएंगे. चीन में आज यह शख्स और इसकी आत्मकथा सुर्खियों में है. साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हू इस साल 1 से 8 मार्च तक चलने वाले हांगकांग इंटरनेशलन लिटरेरी फेस्टिवल में हिस्सा लेंगे. यह ऐसे समय में हो रहा है जब समीक्षकों ने उनकी किताब की काफी प्रशंसा की है और हाल ही में इसका अंग्रेजी अनुवाद भी प्रकाशित हुआ है. इस वर्ष के अंत में इसका फ्रेंच संस्करण प्रकाशित होने वाला है.
साधारण जिंदगी जीने वाले करोड़ों आम आदमी का हीरो
यह कहानी एक सच्ची आत्मकथा है जो हू को एक बेहद अप्रत्याशित नायक के रूप में प्रस्तुत करती है. एक ऐसा व्यक्ति जिसने स्कूल छोड़ने के बाद से 19 नौकरियां की हैं. सभी काम काफी मामूली थे. इसमें उपकरण मरम्मत करने वाले और रात की शिफ्ट में गोदाम में सामान छांटने वाले से लेकर कूरियर पहुंचाने तक का काम शामिल रहा.
हू का कहा है कि कई लोगों की धारणा के विपरीत, सच्ची कहानियां वास्तव में बहुत दुर्लभ हैं. कई पाठकों ने कहा है कि मैंने काम, जीवन और समकालीन चीनी समाज के बारे में उनकी भावनाओं को व्यक्त किया है. कुछ ने तो मुझे अपनी 'आवाज़' तक कह दिया है, लेकिन मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था.
हू ने बताया कि इस किताब को लिखने के बीज लेखक बनने की महत्वाकांक्षा में नहीं, बल्कि नौकरी से निकाले जाने की वजह से बोया गया था. दिसंबर 2019 में मुझे बीजिंग की एक कूरियर कंपनी ने पार्सल डिलीवरी के काम से निकाल दिया. इससे पहले मैंने कई अन्य कम वेतन वाली, अस्थायी नौकरियां कर चुका था. इसके बाद के महीनों में, मैंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक जर्नल लिखना शुरू किया. इससे मुझे कोई आर्थिक लाभ नहीं हो रहा था. यह सब बस समय बिताने के लिए कर रहा था. क्योंकि चीन में उस वक्त अचानक कोविड की वजह से लॉकडाउन शुरू हो गया था.
अप्रैल 2020 में, शुंडे, ग्वांगडोंग में नाइट शिफ्ट में लॉजिस्टिक्स सॉर्टर के रूप में अपने कठिन अनुभव का वर्णन करने वाली उनकी एक पोस्ट वायरल हो गई. इसके बाद मीडिया से अनुरोध और प्रोत्साहन मिलने लगे, जिसमें उन्हें अपनी नौकरियों के बारे में और अधिक लिखने के लिए कहा गया.
इसके परिणामस्वरूप 'आई डिलीवर पार्सल्स इन बीजिंग' नामक पुस्तक सामने आई. यह किताब दो दशकों में चीन की लो सैलरी सर्विस इकोनमी का एक मार्मिक और जमीनी स्तर वृतांत प्रस्तुत करती है. कैसे लोग तंग गलियों में जाकर डिलीवरी करते हैं. मैनेजेरियल तिरस्कार सहते हैं और फ्रीलांस काम के शारीरिक कष्टों को झेलते हैं.
उन्होंने कहा कि मैं सामाजिक मुद्दों का अध्ययन करने वाला कोई विशेषज्ञ या विद्वान नहीं हूं. मेरी किताब का उद्देश्य कुछ खास तर्क प्रस्तुत करना नहीं है, बल्कि अपने अनुभवों और भावनाओं के प्रति ईमानदार रहना है. उनकी कहानी आज के दौर में विशेष रूप से प्रासंगिक है, जब नौकरियों को लेकर युवा पीढ़ी में अनिश्चितता व्याप्त है.
हालांकि, आम तौर पर Gen Z पीढ़ी को आलसी और मेहनत करने के लिए अनिच्छुक माना जाता है, लेकिन हू ने एक ऐसा दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है जो पीढ़ीगत आलोचनाओं को चुनौती देता है. आलस और मेहनत न करना नैतिक दोष नहीं हैं. हू स्पष्ट रूप से कहते हैं - मैं भी आलसी हूं और मुझे भी मेहनत करना पसंद नहीं है. जब तक कोई व्यक्ति कानून नहीं तोड़ता या दूसरों को बाधा नहीं पहुंचाता, तब तक वो कैसे जीवन यापन कर रहा है, ये उसकी स्वतंत्रता है. इस पर दूसरों को निर्णय लेने का अधिकार नहीं है.
लाइफ और वर्क बैलेंस करने का कोई एक तरीका नहीं है...
हू इस बात पर जोर देते हैं कि हालांकि ऐसा लगता है कि वह काफी मेहनती रहे हैं, लेकिन उन्होंने ऐसे विकल्प भी चुने हैं जिन्हें अन्य लोग गैरजिम्मेदाराना मान सकते हैं. हू कहते हैं कि मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं जिसने शुरुआत से ही लगातार काम किया हो. लगभग 2009 के अंत से 2011 तक, मैंने कोई काम नहीं किया और मेरी कोई आमदनी नहीं थी. मैं पूरी तरह से अपनी बचत पर निर्भर था और हर दिन घर पर पढ़ता और लिखता था. फिर 2014 में, मैंने युन्नान में एक साल के लिए एक स्ट्रीट स्टॉल लगाया.
वह दौर मेरे लिए बहुत ही आरामदेह और तनावमुक्त था. दूसरे लोग शायद अलग सोचते हों, लेकिन काम और निजी जीवन में संतुलन बनाने का कोई एक ही तरीका नहीं है जो सब पर लागू हो. हू इस व्यक्तिगत स्वतंत्रता की तुलना चीन की विशाल जनसंख्या द्वारा निर्मित व्यापक और कठोर आर्थिक वास्तविकता से करते हैं.
मैनेजेरियल कल्चर पर चोट करती है किताब
हू बताते हैं कि मेरे देश की आबादी 1.4 अरब से अधिक है. यहां काफी श्रम शक्ति है. यही वजह है कि मानव श्रम को वो महत्व नहीं मिल पाता जो मिलना चाहिए. उन्होंने मैनेजरों द्वारा लगातार दी जाने वाली धमकियों का हवाला देते हुए कहा कि आज आसानी से बदले जा सकने वाले कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जा सकता है. जिस कंपनी में मैंने काम किया, वहां का सुपरवाइजर हमें रोजाना ऐसे शब्दों से डांटता था, जिसे सुनकर जो वहां काम करना नहीं चाहते वे चले जाएं. क्योंकि यहां काम करने वाले लोगों की कोई कमी नहीं है.
हू ने कहा कि मुझे लगता है कि जिस देश में श्रम की कमी हो. यानी जहां काम करने के लिए आदमी ही न मिलते हो, वहां नियोक्ता शायद श्रमिकों के साथ इस तरह के अहंकारपूर्ण व्यवहार करने की हिम्मत नहीं करेंगे. ये अनुभव चीन तक ही सीमित नहीं हैं. हालांकि, हू की किताब में सांस्कृतिक विवरण और सामाजिक बारीकियां गहराई से समाहित हैं, जिन्हें उनके अनुसार विदेशी पाठकों के लिए समझना कठिन होगा, फिर भी वे लगातार यह समझाने से बचते हैं कि 'बीजिंग' क्या हो रहा है. इसके बजाय, वे अपनी बुक को "आध्यात्मिक मार्ग" खोजने की एक व्यक्तिगत यात्रा के रूप में प्रस्तुत करते हैं.
हू ने बताया कि मुझे लगता है कि दुनिया में ऐसी कोई किताब नहीं है जिसे हर कोई पूरी तरह और सही ढंग से समझ सके.अनुवाद की ज़रूरत हो या न हो, ऐसे लोग हैं जिन्होंने कहा है कि मेरे जीवन के बारे में पढ़कर उन्हें सुकून और शांति मिली. उनकी किताब बेरोजगारी पर कोई शोधपत्र नहीं है, लेकिन उन्हें पाठकों से ऐसी प्रतिक्रियाएं मिली हैं जो पेशेवर असफलताओं और अनिश्चितता के उनके साझा अनुभवों से सहमत हैं.
हू का कहना है कि मैंने विशेष रूप से बेरोजगार समूह या रोजगार संबंधी कठिनाई की समस्या पर ध्यान नहीं दिया. हालांकि, मेरा अपना कार्य अनुभव सहज नहीं रहा है, बल्कि असफलताओं से भरा रहा है.आज, हू चेंगदू में एक सादा जीवन व्यतीत करते हैं. खाना पकाने, पढ़ने और लिखने की आरामदेह दिनचर्या का आनंद लेते हैं और पुस्तक की सफलता और उनकी स्वाभाविक रूप से मितव्ययी जीवनशैली के कारण आर्थिक दबाव से मुक्त हैं.
शौकिया तौर पर लिख डाली किताब
हू ने लेखन को एक पेशे के रूप में नहीं, बल्कि बिना किसी दबाव के एक शौक के रूप में शुरू किया था. उन्होंने कहा कि मेरे पास फिलहाल कोई विशिष्ट कार्य योजना नहीं है. मैं पढ़ना-लिखना जारी रखूंगा, लेकिन खुद पर कोई दबाव नहीं डालूंगा. दुनिया में औसत दर्जे के लेखन की कमी नहीं है, और मुझे पहले ही पर्याप्त सराहना मिल चुकी है. इसलिए केवल पैसे या प्रकाशन के लिए मुझे और कुछ लिखने की कोई आवश्यकता नहीं है.