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आज अगर चुनाव हारे नेतन्याहू तो? जानिए विपक्षी उम्मीदवार का क्या है गाजा और ईरान पर रुख

बेंजामिन नेतन्याहू के विरोधी का रुख इस चुनाव में फिलीस्तीन और ईरान मुद्दे पर क्या है? यह वहां की सत्ता अगर बदलती है तो आने वाले बदलाव पर असर डाल सकती है. चलिए जानते हैं कि नेतन्याहू को टक्कर देने वाले प्रत्याशी ने क्या वादे किए हैं?

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नेतन्याहू के विरोधी उम्मीदवार का फिलीस्तीन को लेकर रुख ज्यादा अलग नहीं है (Photo -  X/@netanyahu/@gadi_eisenkot )
नेतन्याहू के विरोधी उम्मीदवार का फिलीस्तीन को लेकर रुख ज्यादा अलग नहीं है (Photo - X/@netanyahu/@gadi_eisenkot )

बेंजामिन नेतन्याहू ने इस बार भी खुद को "मिस्टर सिक्योरिटी" बताया है और 2023 से इजरायल की लड़ाइयों में मिली स्ट्रेटेजिक जीत की ओर इशारा किया है. इस चुनाव में सबसे अहम टॉपिक सिक्योरिटी रहा है और इसी पर नेतन्याहू के विरोधी उसे घेर रहे हैं.  

इजरायल के चुनाव में नेतन्याहू को चुनौती देने वाले सभी लोग सिक्योरिटी में नाकामियों की कड़ी आलोचना कर रहे हैं. क्योंकि, इसी वजह से 7 अक्टूबर को हमले हुए, जिसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 251 दूसरे लोगों को बंधक बनाकर गाजा वापस ले जाया गया. ऐसे में जानते हैं कि अगर इस बार नेतन्याहू दोबारा सत्ता में नहीं आते हैं तो उन्हें कड़ी टक्कर देने वाले प्रतिद्वंदी  गादी आइज़ेनकोट ने क्या वादा किया है? उनका फिलीस्तीन को लेकर क्या रुख है. क्या नेतन्याहू के हटने के बाद गाजा और वेस्ट बैंक मामले में रुख बदलेगा या और सख्त हो जाएगा. 

फिलीस्तीन को लेकर क्या है नेतन्याहू के विरोधी का रुख
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के मामले में, आइजेनकोट नेतन्याहू से बहुत अलग नहीं हैं. उन्होंने हाल ही में वादा किया है कि वे 18 महीने के अंदर इस इलाके में हमास का राज खत्म कर देंगे. इसके लिए वे US के नेतृत्व वाली शांति योजना या जरूरी हुआ तो मिलिट्री तरीकों का इस्तेमाल करेंगे.

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वेस्ट बैंक में, नेतन्याहू का कैंप ज़्यादातर तेज़ी से बसावट बढ़ाने की अपनी पॉलिसी को जारी रखना चाहता है. वहीं आइजेनकोट आम तौर पर इजरायली बस्तियों का समर्थन करते हैं, लेकिन विवादित E1 बस्ती प्रोजेक्ट पर आगे बढ़ने का विरोध करते हैं. इससे असल में वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाएगा.

आइजेनकोट कट्टरपंथी यहूदी बस्तियों पर भी सख्ती करना चाहते हैं और उन्होंने फिलिस्तीनियों के लिए "ऑटोनॉमसी या स्टेट-माइनस" के हालात बनाने की बात की है - जो पूरी तरह से इज़रायली सुरक्षा कंट्रोल में होगा. यानी आइजेनकोट का गाजा और वेस्ट बैंक को लेकर रुख और भी सख्त है. 

 दशकों से, कई मेनस्ट्रीम इज़राइली नेता दो-राज्य समाधान की वकालत करते रहे हैं - इज़रायल के साथ शांति से रहने के लिए एक आज़ाद फ़िलिस्तीनी राज्य बनाना. लेकिन इस विचार के लिए सपोर्ट सालों से कम होता जा रहा है. इस चुनाव में, कोई भी बड़ी यहूदी पार्टी इस पर कैंपेन नहीं कर रही है. कई ने इसे सीधे तौर पर मना कर दिया है. नेतन्याहू ने लंबे समय से इस विचार को रोकने की कसम खाई है. 

ईरान को लेकर गादी आइजेनकोट कैंपेन में क्या बोले हैं 
इलेक्शन कैंपेन के दौरान नेतन्याहू और आइजेनकोट ने एक दूसरे के वादों और वफादारी पर भी काफी सवाल उठाए. नेतन्याहू ने अपने कैंपेन में ट्रंप के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ शुरू की गई अभी भी अनसुलझी लड़ाई का भी ज़िक्र किया था और अपने मुख्य विरोधी को इस्लामिक रिपब्लिक ईरान के प्रति नरम बताने की कोशिश की थी. 

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नेतन्याहू ने फिर कहा कि पूर्व जनरल आईजेनकोट  और उनके साथी एक फ़िलिस्तीनी देश बनाना चाहते हैं, जो इज़राइल के लिए एक बड़ी मुसीबत होगी. क्योंकि आइजेनकोट ने कहा था कि वह फ़िलिस्तीनी राज्य के खिलाफ हैं, लेकिन उन्होंने वेस्ट बैंक के कट्टरपंथी लोगों पर कार्रवाई करने की कसम खाई है, जिन्होंने बिना किसी सजा के फिलिस्तीनियों पर हमला किया है.

नयह भी पढ़ें: नेतन्याहू के खिलाफ इस चुनाव में कौन खड़ा है? 1988 के बाद पहली बार फुल टर्म के बाद चुनाव

नेतन्याहू ने अपनी युद्ध के समय की लीडरशिप और US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के साथ अपने गठबंधन पर कैंपेन चलाया. उन्होंने उनका समर्थन किया है और ईरान पर युद्ध छेड़ने में इज़रायल का साथ दिया. नेतन्याहू ने कैंपेन के दौरान कहा था कि ट्रंप ईरानी खतरे को खत्म करने के लिए फिर से एक्शन लेने को तैयार हैं, लेकिन सिर्फ तभी जब नेतन्याहू सत्ता में बने रहें.

इस पर आइज़ेनकोट ने नेतन्याहू पर डर फैलाने, झूठ और धमकियों के कैंपेन पर भरोसा करने का आरोप लगाया है और कहा है कि उन्हें भरोसा है कि ट्रंप लोगों द्वारा चुने गए किसी भी नेता के साथ पूरे सहयोग से काम करेंगे.

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