नोएडा में 14 साल बिताने के बाद एक युवक का शहर छोड़कर अपने घर लौटने का वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों को काफी भावुक कर रहा है. इस वीडियो में उसने बड़े शहरों की चमक-दमक, करियर की सफलता और अंदर छिपे अकेलेपन के बारे में खुलकर बात की है. यही वजह है कि यह वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है.
यह वीडियो इंस्टाग्राम पर विभु त्रिवेदी ने शेयर किया है. उन्होंने बताया कि वह हमेशा के लिए नोएडा छोड़ रहे हैं. अब कानपुर लौट रहे हैं. वीडियो में उन्होंने कहा कि यह फैसला उनके लिए खुशी और दुख, दोनों लेकर आया है.
विभु ने अपने सफर को याद करते हुए बताया कि वह साल 2012 में नोएडा आए थे. उस समय उन्हें यह भी नहीं पता था कि जॉब मिलेगी या नहीं. लेकिन धीरे-धीरे इसी शहर ने उन्हें पहचान और करियर दोनों दिए. उन्होंने बताया कि वह जूनियर ग्राफिक डिजाइनर के तौर पर काम शुरू करके बाद में क्रिएटिव हेड तक पहुंचे.
जिंदगी में क्या आए बदलाव
उन्होंने अपनी जिंदगी में आए बदलावों का भी जिक्र किया. विभु ने कहा कि एक समय ऐसा था जब वह हर जगह पैदल जाया करते थे, लेकिन बाद में SUV के मालिक बन गए. उन्होंने यह भी कहा कि पहले वह होर्डिंग डिजाइन करते थे और बाद में खुद उन्हीं होर्डिंग्स पर नजर आने लगे.
हालांकि, करियर में सफलता मिलने के बावजूद वह अंदर से खुद को अकेला महसूस करने लगे थे. उन्होंने कहा कि बड़े शहरों में रिश्ते अक्सर जरूरतों तक सीमित होकर रह जाते हैं. लोग नौकरी, EMI और रोजमर्रा की भागदौड़ में इतने उलझ जाते हैं कि धीरे-धीरे अपनापन पीछे छूट जाता है.
देखें वायरल वीडियो
वीडियो में विभु ने एक फालूदा बेचने वाले शख्स का जिक्र भी किया. उन्होंने बताया कि एक दिन उन्होंने उस शख्स से पूछा कि अगर वह अचानक अमीर हो जाए तो सबसे पहले क्या करेगा. इस पर फालूदा विक्रेता ने जवाब दिया कि मैं अपने गांव लौट जाऊंगा. विभु के मुताबिक, इसी जवाब ने उनकी सोच बदल दी. उन्हें एहसास हुआ कि पैसा और सफलता सब कुछ नहीं होते. आखिर में इंसान अपने लोगों, अपनेपन और सुकून की तलाश करता है.उन्होंने वीडियो के कैप्शन में लिखा कि मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा फ्लेक्स यही है कि मैं 14 साल बाद अपने घर लौट रहा हूं. नई लोकेशन- कानपुर.
'आज तक सिर्फ किराया भर रहा हूं और पेट पाल रहा हूं'
सोशल मीडिया पर लोग इस वीडियो से खुद को बेहद रिलेट कर रहे हैं. कई यूजर्स ने कहा कि बड़े शहरों में रहने वाले ज्यादातर लोग इसी तरह की भावनाओं से गुजरते हैं. एक यूजर ने लिखा कि ये उम्र का एक पड़ाव होता है. एक वक्त ऐसा आता है, जब इंसान थकने लगता है और फिर अपने शहर लौटना चाहता है. वहीं एक अन्य यूजर ने भावुक होकर लिखा कि 2015 में दिल्ली आया था... आज तक सिर्फ किराया भर रहा हूं और पेट पाल रहा हूं. कोई नहीं समझता, घर वाले भी नहीं. वहीं किसी का कहना है कि बड़े शहरों का ये ही ट्रेप होता है, जो एक बार फंस जाता है, तो फंस ही जाता है.