जर्मनी में रहने वाली एक भारतीय महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में महिला ने विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक ऐसी आदत पर सवाल उठाया है, जिससे कई लोग खुद को जोड़कर देख रहे हैं. उनके अनुभव ने भारतीय समुदाय के व्यवहार, आपसी जुड़ाव और सामाजिक रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है.
स्वाधा नाम की इस भारतीय महिला ने इंस्टाग्राम पर शेयर किए गए वीडियो में कहा कि जर्मनी में उन्हें अक्सर यूरोपीय लोग ज्यादा गर्मजोशी से मिलते दिखाई देते हैं. उनके मुताबिक, वहां लोग रास्ते में मिलने पर हाय, हेलो या बाय कहना सामान्य बात मानते हैं, लेकिन कई भारतीय एक-दूसरे को देखकर भी अभिवादन नहीं करते.
वीडियो में स्वाधा कहती हैं यहां यूरोपियन आपको हाय कहेंगे, बाय कहेंगे, हेलो कहेंगे, लेकिन इंडियंस हाय-हेलो तक नहीं कहते. ऊपर से ऐसा चेहरा बना लेते हैं, जैसे आपने उनकी प्रॉपर्टी अपने नाम करवा ली हो. अगर अपने लोग ही अपने लोगों का सम्मान नहीं करेंगे, तो और कौन करेगा?
उन्होंने कहा कि वह अक्सर सामने वाले को देखकर मुस्कुरा देती हैं, लेकिन जब दूसरी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिलती तो अजीब महसूस होता है. उनका मानना है कि अगर बातचीत का समय न भी हो, तो कम से कम एक मुस्कान या छोटा-सा अभिवादन जरूर किया जा सकता है.वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, Agree or not? और यही सवाल अब सोशल मीडिया पर बड़ी चर्चा का विषय बन गया है.
देखेंं वीडियो
लोगों ने भी साझा किए अपने अनुभव
वीडियो वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने अपने अनुभव साझा किए. कई यूजर्स ने कहा कि उन्होंने जर्मनी, ब्रिटेन, कनाडा और अमेरिका जैसे देशों में भी ऐसा ही व्यवहार देखा है.
एक यूजर ने लिखा कि मैंने भी जर्मनी में यही महसूस किया है. कई बार दूसरे देशों के लोग ज्यादा दोस्ताना होते हैं. वहीं एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि मैं भारतीयों को देखकर मुस्कुरा देता हूं, लेकिन अक्सर लोग नजरें फेर लेते हैं.
कुछ लोगों का मानना था कि इसकी वजह शर्मीलापन या जज किए जाने का डर भी हो सकता है. हालांकि कई यूजर्स ने कहा कि मुस्कुराने में कोई खर्च नहीं होता और यह किसी का दिन बेहतर बना सकता है.
आखिर क्यों होती है ऐसी दूरी?
इस बहस के दौरान कई लोगों ने इसके पीछे संभावित कारणों पर भी चर्चा की. कुछ लोगों का मानना है कि बड़े शहरों की भागदौड़ और निजी जीवन में व्यस्त रहने की आदत लोगों को अधिक आरक्षित बना देती है. वहीं कुछ का कहना है कि विदेश में भी कई भारतीय अनजाने में एक-दूसरे से दूरी बनाए रखते हैं.
कुछ लोगों ने यह भी तर्क दिया कि नौकरी, करियर और प्रतिस्पर्धा की मानसिकता का असर भी लोगों के व्यवहार में दिखाई देता है. हालांकि यह सभी पर लागू नहीं होता.