कहते हैं किस्मत कब और कैसे पलट जाए, कोई नहीं जानता. एक भारतीय शख्स के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ. विदेश में रहकर सालों तक लॉटरी खरीदने वाले इस व्यक्ति की करोड़ों की किस्मत उस टिकट से खुली, जिसके लिए उसने एक भी पैसा नहीं दिया था. मुफ्त में मिली टिकट पर उसे करीब 52 करोड़ रुपये की लॉटरी लग गई और देखते ही देखते उसकी जिंदगी बदल गई.
बहरीन में रहने वाले भारतीय मूल के कृष्णकुमार श्यामला रविंद्रन ने अबू धाबी बिग टिकट ड्रॉ में 2 करोड़ दिरहम (करीब 52 करोड़ रुपये) का जैकपॉट जीता है. खास बात यह है कि जिस टिकट पर उनकी लॉटरी लगी, वह उन्हें एक प्रमोशनल ऑफर के तहत फ्री में मिली थी.
43 साल के कृष्णकुमार पिछले 23 साल से बहरीन में रह रहे हैं और वहां रेस्तरां का कारोबार करते हैं. वह 25 मई को परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के लिए केरल आए हुए थे. इसी दौरान 4 जून को अबू धाबी बिग टिकट का ड्रॉ निकला और उनकी किस्मत चमक गई.
कृष्णकुमार ने 28 मई को ऑनलाइन टिकट खरीदे थे. उस समय बिग टिकट की 'बाय 2, गेट 2 फ्री' स्कीम चल रही थी. उन्होंने दो टिकट खरीदे और दो टिकट मुफ्त में मिले.दिलचस्प बात यह रही कि उनकी पत्नी और बहन ने सभी टिकट नंबर रैंडम तरीके से चुने थे. बाद में इन्हीं मुफ्त टिकटों में से एक टिकट नंबर 339729 पर 2 करोड़ दिरहम का जैकपॉट निकल आया.
फोन बंद था, नहीं मिल सकी पहली सूचना
जब लॉटरी आयोजकों ने कृष्णकुमार को जीत की जानकारी देने के लिए फोन किया, तब उनका बहरीन वाला नंबर बंद था क्योंकि वह भारत में थे और नंबर रोमिंग पर नहीं था.बाद में आयोजकों ने व्हाट्सऐप के जरिए उनके भारतीय नंबर पर संपर्क किया. तब जाकर उन्हें पता चला कि वे करोड़पति बन चुके हैं.
संघर्ष के दिनों में शुरू किया था टिकट खरीदना
कृष्णकुमार की सफलता की कहानी सिर्फ किस्मत की नहीं, बल्कि धैर्य की भी है. करीब 20 साल की उम्र में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के बाद वह बहरीन पहुंचे थे. कुछ समय नौकरी करने के बाद उन्होंने अपना रेस्तरां शुरू किया.एक समय ऐसा भी आया जब उनका कारोबार मुश्किल दौर से गुजर रहा था. उसी दौरान उन्होंने बेहतर भविष्य की उम्मीद में बिग टिकट की लॉटरी खरीदना शुरू किया.
पिछले सात साल से वह लगातार हर महीने टिकट खरीद रहे थे. कोरोना महामारी के बाद कारोबार में सुधार आ गया, लेकिन उन्होंने टिकट खरीदना नहीं छोड़ा.सात साल तक लगातार कोशिश करने के बाद आखिरकार इस बार उनकी किस्मत ने साथ दे दिया.
सबसे खास बात यह रही कि इस बार उन्होंने टिकट किसी दोस्त के साथ साझा नहीं किया था. इसलिए पूरी इनामी राशि अकेले उन्हें ही मिलेगी.कृष्णकुमार का कहना है कि अभी भी उन्हें यकीन नहीं हो रहा कि उन्होंने इतनी बड़ी रकम जीत ली है. परिवार के सभी लोग बेहद खुश हैं, खासकर उनकी पत्नी और बहन, जिन्होंने टिकट नंबर चुने थे.
सबसे पहले कोमा में पड़े दोस्त की करेंगे मदद
इतनी बड़ी रकम जीतने के बाद भी कृष्णकुमार की पहली प्राथमिकता खुद नहीं, बल्कि उनका एक करीबी दोस्त है. उनके दोस्त और बिजनेस पार्टनर तीन महीने से कोमा में हैं. सीढ़ियों से गिरने के कारण उनके सिर में गंभीर चोट लगी थी.
कृष्णकुमार का कहना है कि वह सबसे पहले अपने दोस्त को बेहतर इलाज के लिए भारत लाना चाहते हैं. दोस्त कर्नाटक के कोडागु जिले का रहने वाला है और उसकी हालत काफी गंभीर बनी हुई है.
परिवार के साथ जाएंगे UAE
इनामी राशि के बाकी पैसे का क्या करेंगे, इस पर अभी उन्होंने कोई फैसला नहीं लिया है. वह परिवार के साथ बैठकर आगे की योजना बनाएंगे. हालांकि इतना तय है कि पुरस्कार लेने के लिए वह जल्द ही UAE जाएंगे और इस बार अपने परिवार को भी साथ लेकर जाएंगे. उनके दो बेटे हैं, जो फिलहाल स्कूल में पढ़ाई कर रहे हैं.
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कृष्णकुमार की कहानी बताती है कि कभी-कभी किस्मत ऐसे दरवाजे खोल देती है, जिनकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता. बहरीन में रहने वाले इस भारतीय ने सात साल तक लगातार कोशिश जारी रखी और आखिरकार एक मुफ्त टिकट ने उसे करोड़पति बना दिया.
करीब 52 करोड़ रुपये की इस लॉटरी ने न सिर्फ उसकी जिंदगी बदल दी, बल्कि अब वह अपने जरूरतमंद दोस्त की मदद भी कर सकेगा. यही वजह है कि कृष्णकुमार आज लोगों को सिर्फ एक सलाह देते हैं— कोशिश करते रहिए, सकारात्मक रहिए और कभी हार मत मानिए.