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खंडहर को टूरिस्ट स्पॉट बताकर करता था ठगी, हर पर्यटक से लेता था 4 हजार रुपये

पहली नजर में यह जगह किसी प्राचीन रोमन सभ्यता का हिस्सा लगती थी. पत्थर के खंभे, टूटी सीढ़ियां, मूर्तियां और एक झील देखकर लोग यकीन कर लेते थे कि वे हजारों साल पुराने ऐतिहासिक स्थल पर पहुंचे हैं. लेकिन जब सच्चाई सामने आई तो पता चला कि पूरा इतिहास महज एक शातिर ठग की बनाई कहानी थी.

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ठग ने इटली में बना दिया था नकली रोमन म्फीथिएटर का खंडहर (Photo - AI Generated)
ठग ने इटली में बना दिया था नकली रोमन म्फीथिएटर का खंडहर (Photo - AI Generated)

इटली में एक शख्स ने ऐसा कारनामा किया कि कई साल तक लोग उसे सच मानते रहे. उसने खुद नकली रोमन एम्फीथिएटर (खुले मैदान वाला प्राचीन थिएटर) जैसा ढांचा तैयार किया और उसे हजारों साल पुराना ऐतिहासिक स्थल बताकर पर्यटकों से मोटी रकम वसूलता रहा. आखिरकार जांच हुई तो पूरा खेल सामने आ गया और अब उसे जेल की सजा सुनाई गई है.

द मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला इटली के विचेंजा शहर के पास का है. 69 साल फ्रेंको मालोसो 'वॉन रोजेनफ्रांज' नाम के शख्स ने दावा किया था कि उसने दुनिया का सबसे पुराना खुला रोमन एम्फीथिएटर खोज निकाला है.

हर पर्यटक से लेता था करीब 4 हजार रुपये
फ्रेंको इस जगह को देखने आने वाले हर पर्यटक से 35 पाउंड (करीब 4 हजार रुपये) एंट्री फीस लेता था. वहां पहुंचने वाले लोगों को वह पत्थर के खंभे, सीढ़ियां, मूर्तियां और आसपास की झील दिखाकर कहता था कि यह सब 393 ईस्वी से भी पहले का है.

इतना ही नहीं, वह बड़ी-बड़ी ऐतिहासिक कहानियां भी सुनाता था ताकि लोगों को उसकी बात पर पूरा भरोसा हो जाए.

जूलियस सीजर से लेकर जूलियट तक की गढ़ दी कहानी
फ्रेंको दावा करता था कि रोमन सम्राट जूलियस सीजर भी यहां आया करते थे. उसने यहां तक कह दिया कि मशहूर नाटक 'रोमियो एंड जूलियट' की जूलियट कैपुलेट ने अपने किशोरावस्था के दिन इसी जगह बिताए थे.

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वह खुद को समाजसेवी, कारोबारी और ऑर्केस्ट्रा कंडक्टर भी बताता था. उसकी कहानी इतनी प्रभावशाली थी कि स्थानीय प्रशासन भी धोखा खा गया और इस जगह को यूरोपीय संघ (EU) की फंडिंग वाले एक पर्यटन ऐप में भी शामिल कर लिया गया.

जांच में खुल गई पूरी पोल
फ्रेंको का दावा था कि 2005 में भूस्खलन के बाद यह प्राचीन स्थल सामने आया था और यहां नवपाषाण, यूनानी और रोमन काल के अवशेष मिले थे. लेकिन 2016 में पुलिस ने जांच शुरू की. पुरातत्व विशेषज्ञों की जांच में पता चला कि वहां मौजूद कोई भी संरचना प्राचीन नहीं थी.

असलियत यह थी कि खंभे, मूर्तियां और बाकी चीजें फाइबरग्लास और पेपर-माशे (कागज की लुग्दी) जैसी आधुनिक सामग्री से बनाई गई थीं, ताकि वे पुरानी दिखाई दें. यहां तक कि वहां मौजूद झील भी उसी ने बनवाई थी और पहाड़ी को खुद समतल कराया था.

पकड़े जाने पर भी नहीं माना
जांच शुरू होने के बाद भी फ्रेंको ने अपनी गलती स्वीकार नहीं की. उल्टा उसने 2017 में एक ब्लॉग पोस्ट लिखकर दावा कर दिया कि इस एम्फीथिएटर पर कब्जा करने के लिए माफिया ने कम से कम नौ लोगों की हत्या कर दी.

यह भी पढ़ें: जिस टूरिस्ट के साथ शख्स ने ली सेल्फी, वो निकला बिछड़ा हुआ चाचा

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उसने यह भी कहा कि माफिया ने उस पर हमला किया, जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हो गया और उसका तीन साल का बेटा लापता हो गया. इससे पहले 2016 में उसने यह कहानी भी गढ़ी थी कि इस एम्फीथिएटर का पहली बार 1870 में और फिर 1980-90 के दशक में दोबारा जीर्णोद्धार किया गया था.

10 साल चली कानूनी लड़ाई
करीब 10 साल तक चले कानूनी मामले के बाद अब जाकर अदालत ने फ्रेंको मालोसो को दो साल चार महीने की जेल, 3,000 यूरो का जुर्माना और पूरे इलाके को खाली कर वहां से नकली निर्माण हटाने का आदेश दिया है.उस पर अवैध निर्माण, नकली कलाकृतियां तैयार करने और बिना अनुमति पुरातात्विक वस्तुएं बनाने जैसे आरोप साबित हुए.

यह मामला दिखाता है कि अगर कहानी दमदार हो तो लोग आसानी से भरोसा कर लेते हैं. लेकिन आखिरकार सच सामने आ ही जाता है, चाहे उसे छिपाने के लिए कितनी भी बड़ी कहानी क्यों न गढ़ी जाए.

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