भारत में अक्सर लोग सोचते हैं कि अमेरिका में डॉलर में कमाई होती है, इसलिए वहां रहने वालों की जिंदगी बेहद आरामदायक होती होगी. लेकिन अमेरिका के कैलिफोर्निया में रहने वाली भारतीय महिला मनीषा चौधरी ने इस धारणा पर अलग नजरिया पेश किया है.
उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि अमेरिका का खूबसूरत बे एरिया (Bay Area) जितना देखने में आकर्षक है, वहां रहना उतना ही महंगा भी है.
किराया ही उड़ा देता है आधी सैलरी
वीडियो में मनीषा बताती हैं कि बे एरिया में एक घर का किराया आमतौर पर 3,500 से 4,500 डॉलर (करीब 3 लाख से 3.9 लाख रुपये) प्रति माह से शुरू होता है.यानी सिर्फ किराया ही कई लोगों की आय का बड़ा हिस्सा खा जाता है.
राशन पर भी लाख रुपये तक खर्च
मनीषा के मुताबिक, एक परिवार का मासिक ग्रॉसरी खर्च 800 से 1,200 डॉलर (करीब 68 हजार से 1.03 लाख रुपये) तक पहुंच सकता है.अगर परिवार में छोटा बच्चा हो तो डायपर, दूध, स्नैक्स, खिलौने और दूसरी जरूरतों के लिए अलग बजट बनाना पड़ता है.
कार रखना भी आसान नहीं
उन्होंने बताया कि अमेरिका में कार जरूरत होती है, लेकिन इसके साथ कई खर्च भी जुड़े होते हैं.कार की ईएमआई, इंश्योरेंस, पेट्रोल और मेंटेनेंस मिलाकर हर महीने अच्छी-खासी रकम खर्च हो जाती है. यह खर्च इस बात पर निर्भर करता है कि कार कौन-सी है और उसका इंश्योरेंस कितना है.
देखें वीडियो
इसलिए ज्यादा कमाने वाले भी बनाते हैं बजट
मनीषा कहती हैं कि यही वजह है कि अमेरिका के बे एरिया में अच्छी सैलरी पाने वाले लोग भी हर महीने बजट बनाकर चलते हैं.हालांकि, उनका मानना है कि महंगा होने के बावजूद कैलिफोर्निया रहने के लिए अमेरिका की सबसे बेहतरीन जगहों में से एक है.
सोशल मीडिया पर क्या बोले लोग?
वीडियो वायरल होने के बाद कई लोगों ने अपनी राय दी.एक यूजर ने लिखा कि बे एरिया की सैलरी तब तक बड़ी लगती है, जब तक किराया और बच्चों का खर्च सामने नहीं आ जाता.दूसरे ने लिखा कि भारत में लोग सोचते हैं कि डॉलर में कमाने वाले अमीर होते हैं, लेकिन वहां खर्च भी डॉलर में ही होता है.एक अन्य यूजर ने कहा कि कमाई कितनी भी हो, बजट बनाना हमेशा जरूरी है.वहीं एक यूजर ने लिखा कि सैन होजे बहुत खूबसूरत है, लेकिन यहां वही लोग आराम से रह सकते हैं, जो अपनी फाइनेंशियल प्लानिंग अच्छी तरह करते हैं.
अमेरिका जाने का सपना देखने वालों के लिए सीख
मनीषा का वीडियो सिर्फ कैलिफोर्निया के खर्चों का हिसाब नहीं बताता, बल्कि यह भी समझाता है कि विदेश में अच्छी कमाई के साथ बड़ी जिम्मेदारियां और खर्च भी आते हैं.यही वजह है कि अमेरिका जाने का फैसला सिर्फ सैलरी देखकर नहीं, बल्कि वहां के रहन-सहन और जीवनयापन की लागत को समझकर करना चाहिए.