चोटी के चारों बल्लेबाजों की अर्धशतकीय पारियों से वेस्टइंडीज ने यहां वानखेड़े स्टेडियम की सपाट पिच पर भारतीय गेंदबाजों को तरसाकर तीसरे और अंतिम टेस्ट क्रिकेट मैच का पहला दिन अपने नाम किया.
एड्रियन बराथ (62) और क्रेग ब्राथवेट (68) ने पहले विकेट के लिये 137 रन जोड़कर वेस्टइंडीज को बेहतरीन शुरुआत दिलायी. इन दोनों के 13 रन के अंदर पवेलियन लौटने के बाद किर्क एडवर्डस (नाबाद 65) और डेरेन ब्रावो (नाबाद 57) ने सलामी जोड़ी के प्रयासों को बखूबी आगे बढ़ाया. ये दोनों अब तब तीसरे विकेट के लिये 117 रन जोड़ चुके हैं.
भारत की तरफ से दोनों विकेट आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने लिये हैं. उन्होंने 27 ओवर में 86 रन देकर दो विकेट लिये हैं. इस बीच स्लिप में राहुल द्रविड़ और वीवीएस लक्ष्मण का क्षेत्ररक्षण औसत रहा. इन दोनों ने एक-एक कैच छोड़ा.
ब्रावो जब 33 रन पर थे तब प्रज्ञान ओझा की गेंद पर द्रविड़ ने स्लिप में उनका कैच छोड़ दिया था. इससे पहले लक्ष्मण ने ब्राथवेट को जीवनदान दिया था लेकिन एडवर्डस और ब्रावो ने पहला दिन कैरेबियाई बल्लेबाजों के नाम सुनिश्चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. इन दोनों ने भी बराथ और ब्राथवेट की तरह की तेज और स्पिन मिश्रित आक्रमण के सामने किसी तरह का जल्दबाजी नहीं दिखायी और रन बनाने के लिये ढीली गेंदों का इंतजार किया. चोटिल शिवनारायण चंद्रपाल की अनुपस्थिति में शीर्ष क्रम के इस प्रदर्शन ने कैरेबियाई टीम का पलड़ा कुछ भारी कर दिया.
टॉस फिर से धोनी को दगा दे गया और वेस्टइंडीज ने विकेट को देखते हुए पहले बल्लेबाजी का फैसला करने में कोई देर नहीं लगायी. यह 34वें टेस्ट मैच में 21वां अवसर है जबकि सिक्के ने धोनी का साथ नहीं दिया. इसके बाद यदि दूसरे सत्र में आधे घंटे का समय छोड़ दिया जाए तो दिनभर भारतीय गेंदबाज विकेटों के लिये तरसते रहे.
भारत का पिछले मैच में नौ विकेट लेने वाले तेज गेंदबाज उमेश यादव को बाहर रखने का फैसला सही साबित नहीं हुआ. उनकी जगह वरुण आरोन को अपना पहला टेस्ट खेलने का मौका दिया गया. उन्होंने एक दो अवसरों पर 140 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से आफ स्टंप से बाहर जाती गेंदों पर बल्लेबाजों को थोड़ा परेशान जरूर किया लेकिन उन्हें अब भी अपने पहले टेस्ट विकेट का इंतजार है. इशांत शर्मा ने लगातार 140 से अधिक तेजी से गेंदबाजी की लेकिन उन्हें भी सफलता नहीं मिली जबकि बायें हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने बल्लेबाजों को बांधे तो रखा लेकिन इससे वह उन्हें दबाव में नहीं ला पाये.
ब्राथवेट ने लंच के बाद ओझा की गेंद पर चौका जड़कर अपना तीसरा जबकि बराथ ने इसके कुछ देर बाद इसी गेंदबाज पर एक रन लेकर अपना चौथा टेस्ट अर्धशतक पूरा किया. हालांकि दोनों ही इसे शतक में तब्दील करने में नाकाम रहे. बराथ को इसके बाद इसके बाद अश्विन ने इस बीच उन्हें काफी परेशान भी किया. आखिर में वह उनकी आफ ब्रेक गेंद पर फ्रंटफुट पर जाने को लेकर असमंजस में पड़ गये और यह गेंद उनके बल्ले का बाहरी किनारा लेकर धोनी के दस्तानों में समा गयी. बराथ ने 148 गेंद खेली तथा आठ चौके लगाये.
इस बीच वीवीएस लक्ष्मण ने ब्राथवेट का मुश्किल कैच छोड़ा था लेकिन अश्विन ने इस 18 वर्षीय बल्लेबाज को जल्द ही पवेलियन भेज दिया. उनकी टर्न लेती गेंद ब्राथवेट के दस्ताने और पैड से लगकर विराट कोहली के पास चली गयी थी. अपनी पारी में 184 गेंद खेलकर आठ चौके लगाने वाले ब्राथवेट हालांकि अंपायर के इस फैसले से खुश नहीं थे लेकिन रीप्ले से साफ हो गया कि गेंद उनके दस्ताने से लगी थी.
एडवर्डस ने शुरू में तेजी दिखायी और आठ चौकों की मदद से अपना अर्धशतक पूरा किया. ब्रावो जीवनदान मिलने के बाद इशांत की गेंद पर चौका जड़कर 50 रन के पार पहुंचे. भारत ने 85वें ओवर में नयी गेंद ली लेकिन इसका भी कैरेबियाई बल्लेबाजों पर कोई असर नहीं पड़ा. एडवर्डस ने अब तक 117 गेंद खेलकर दस चौके जबकि ब्रावो ने 98 गेंद पर सात चौके लगाये हैं.