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भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में बड़ा सुधार, 56 देशों में बिना वीजा एंट्री

भारतीय पासपोर्ट की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ है. हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026 में भारत 10 पायदान चढ़कर 75वें स्थान पर पहुंच गया है, जिससे भारतीय यात्रियों के लिए कई देशों की यात्रा पहले से ज्यादा आसान हो गई है.

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भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर चढ़कर 75वें स्थान पर पहुंचा (Photo: Getty Images)
भारतीय पासपोर्ट 10 पायदान ऊपर चढ़कर 75वें स्थान पर पहुंचा (Photo: Getty Images)

अगर आप विदेश घूमने के शौकीन हैं, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. दुनिया भर में अब भारतीय पासपोर्ट की ताकत और बढ़ गई है. 'हेनली पासपोर्ट इंडेक्स 2026' की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय पासपोर्ट ने ग्लोबल लेवल पर एक लंबी छलांग लगाई है. भारत अब 10 पायदान ऊपर चढ़कर 75वें स्थान पर पहुंच गया है. इसका सीधा सा मतलब ये है कि अब भारतीयों के लिए दुनिया की सैर करना पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा आसान होने वाला है. अब आपको कई देशों की यात्रा के लिए हफ्तों पहले वीजा के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे.

पासपोर्ट की इस नई रैंकिंग का सबसे बड़ा फायदा भारतीय यात्रियों को मिलने वाला है. अब आप बिना किसी झंझट के दुनिया के 56 देशों में बेफिक्र होकर घूम सकते हैं. इन देशों में या तो आपको वीजा की जरूरत नहीं होगी, या फिर वहां पहुंचते ही आपको वीजा-ऑन-अराइवल और ई-वीजा की सुविधा मिल जाएगी. चाहे आपको कैरेबियन द्वीप समूह के बीच पर सुस्ताने जाना हो या अफ्रीका और एशिया के खूबसूरत देशों की सैर करनी हो, अब आपका इंडियन पासपोर्ट आपके सफर को और भी आसान बना देगा.

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आखिर कैसे तय होती है पासपोर्ट की मजबूती?

दुनिया भर में 'हेनली पासपोर्ट इंडेक्स' को पासपोर्ट की ताकत मापने का सबसे भरोसेमंद पैमाना माना जाता है. यह इंडेक्स इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के डेटा का इस्तेमाल करके यह बताता है कि किस देश का नागरिक कितनी आसानी से अंतरराष्ट्रीय यात्रा कर सकता है. रैंकिंग जितनी अच्छी होगी, उस देश के नागरिकों को दूसरे देशों में उतनी ही ज्यादा एंट्री की आजादी मिलेगी.

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दुनिया के सबसे पावरफुल पासपोर्ट: कौन है नंबर-1?

भले ही भारत ने जबरदस्त प्रगति की है, लेकिन यात्रा की आजादी के मामले में कई देश अब भी वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर बने हुए हैं.  इस लिस्ट में सिंगापुर एक बार फिर पहले नंबर पर है, जहां के नागरिक दुनिया के 192 देशों में बिना वीजा के प्रवेश कर सकते हैं. दूसरे पायदान पर जापान और दक्षिण कोरिया का कब्जा है, जिनके पासपोर्ट पर 187 देशों में बिना वीजा यात्रा की जा सकती है.

तीसरे स्थान पर स्वीडन और यूएई ने अपनी जगह बनाई है, जहां के यात्री 186 देशों में बेधड़क दाखिल हो सकते हैं. चौथे पायदान पर यूरोपीय देशों का जबरदस्त दबदबा नजर आता है, जहां बेल्जियम, डेनमार्क, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, लक्ज़मबर्ग, स्पेन, स्विट्जरलैंड, नीदरलैंड और नॉर्वे जैसे 12 देश शामिल हैं. इन सभी देशों के नागरिकों को 185 देशों में फ्री एंट्री मिलती है. इनके ठीक पीछे पांचवें स्थान पर ऑस्ट्रिया, ग्रीस, माल्टा और पुर्तगाल हैं, जिनके पास 184 देशों का वीजा-मुक्त एक्सेस है.

इतना ही नहीं, छठे से दसवें स्थान के बीच भी दुनिया के दिग्गज देश काबिज हैं. इसमें न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, मलेशिया और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देश शामिल हैं. अमेरिकी पासपोर्ट की बात करें तो वहां के नागरिक बिना किसी पूर्व वीजा के दुनिया के 179 देशों की यात्रा कर सकते हैं.

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भारत के लिए ये रैंकिंग क्यों है खास?

पिछले एक दशक में भारतीय पासपोर्ट की रैंकिंग में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं. पिछले साल भारत 85वें स्थान पर खिसक गया था, लेकिन 2026 की शुरुआत में इसमें बड़ा सुधार देखने को मिला है. भले ही 75वां स्थान अब तक का रिकॉर्ड तोड़ मुकाम नहीं है, क्योंकि 2006 में भारत 71वें नंबर पर था, लेकिन 10 पायदान की यह उछाल एक बहुत ही सकारात्मक संकेत है. यह दिखाता है कि दुनिया अब भारतीय नागरिकों का बाहें फैलाकर स्वागत करने के लिए तैयार है.
 

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