रेगिस्तान की सैर का असली मजा तब तक अधूरा है, जब तक आप वहां रेत के टीलों के पीछे छिपते सूरज का नजारा न देख लें. तपती धूप के बाद जब शाम ढलती है, तो पूरा रेगिस्तान सोने की तरह चमकने लगता है. लेकिन अक्सर लोग सही समय पर न पहुंचने की वजह से यह जादुई पल मिस कर देते हैं. अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी तस्वीरों में वही गोल्डन चमक आए और आप सुकून से सूर्यास्त का मजा ले सकें, तो आपको अपनी सफारी की टाइमिंग का खास ख्याल रखना होगा.
रेगिस्तान में सूर्यास्त का असली जादू देखने के लिए शाम 4:30 बजे से 6:30 बजे के बीच का समय सबसे अच्छा होता है. यही वजह है कि इस दौरान धूप कम हो जाती है और मौसम काफी खुशनुमा हो जाता है. फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए इसे 'गोल्डन ऑवर' भी कहा जाता है, क्योंकि इस वक्त रेत का रंग एकदम सुनहरा हो जाता है. यही नहीं, आसमान के बदलते रंग और टीलों की परछाइयां आपकी तस्वीरों में चार चांद लगा देती हैं.
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जैसलमेर के 'सैम सैंड ड्यून्स' में मिलता है असली नजारा
अगर आप भारत में रेगिस्तान के इस खूबसूरत अनुभव को जीना चाहते हैं, तो जैसलमेर का 'सैम सैंड ड्यून्स' सबसे लोकप्रिय और बेहतरीन विकल्प है. यहां के ऊंचे-ऊंचे रेत के टीलों से डूबता हुआ सूरज देखना अपने आप में एक अनोखा एहसास है. इसी जादुई पल का लुत्फ उठाने के लिए ज्यादातर सफारी ऑपरेटर दोपहर 3 से 4 बजे के बीच ही पिकअप शुरू कर देते हैं, ताकि आप शाम 5:00 बजे तक हर हाल में टीलों पर पहुंचकर अपनी जगह बना लें और बिना किसी हड़बड़ी के इस शानदार नजारे का आनंद ले सकें.
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सर्दियों में दोगुना हो जाता है मजा
रेगिस्तान की सैर के लिए नवंबर से मार्च के बीच का समय सबसे शानदार होता है. यही वजह है कि सर्दियों के इन महीनों में मौसम बहुत सुहावना रहता है और आसमान एकदम साफ रहता है. इसके अलावा, तपती गर्मी न होने की वजह से आप रेत पर घंटों बैठकर डूबते सूरज की शानदार तस्वीरें खींच सकते हैं.