scorecardresearch
 

भीड़ भरे त्योहारों में कैसे लें लोकल कल्चर का असली मजा? जानिए आसान तरीके

त्योहारों की भीड़भाड़ में अक्सर हम असली संस्कृति को पीछे छोड़ देते हैं और सिर्फ एक 'टूरिस्ट' बनकर रह जाते हैं. लेकिन अगर आप उत्सव का वास्तविक आनंद लेना चाहते हैं, तो कुछ स्मार्ट तरीके आपको भीड़ के बीच भी सुकून भरा अनुभव दे सकते हैं.

Advertisement
X
स्थानीय वेशभूषा में खुद को संस्कृति के करीब महसूस करें (Photo: Pexels)
स्थानीय वेशभूषा में खुद को संस्कृति के करीब महसूस करें (Photo: Pexels)

अक्सर हम किसी बड़े त्योहार के दौरान घूमने तो निकल जाते हैं, लेकिन वहां की भारी भीड़ और शोर-शराबे में असली संस्कृति कहीं पीछे छूट जाती है. हम सिर्फ एक टूरिस्ट बनकर रह जाते हैं जो बस तस्वीरें खींचकर लौट आता है. लेकिन अगर आप वाकई उस जगह की मिट्टी और परंपराओं को महसूस करना चाहते हैं, तो आपको भीड़ से थोड़ा हटकर सोचना होगा. सच तो यह है कि उत्सव का असली आनंद मुख्यधारा की भीड़ में नहीं, बल्कि वहां के लोगों के घरों और गलियों में छिपा होता है. यहां कुछ ऐसे स्मार्ट तरीके दिए गए हैं जो आपको सिर्फ एक पर्यटक नहीं, बल्कि उत्सव का हिस्सा बना देंगे.

परंपराओं के करीब जाने के लिए स्थानीय लोगों से जुड़ें

किसी भी त्योहार की असली चमक वहां की कहानियों में होती है. केवल दूर से नजारा देखने के बजाय स्थानीय लोगों से बात करें और उनसे उस उत्सव के महत्व के बारे में पूछें. ठहरने के लिए बड़े होटलों के बजाय 'होमस्टे' चुनें, इससे आप उनके रोजमर्रा के जीवन, पारंपरिक खान-पान और उत्सव की असली तैयारियों को अपनी आंखों से देख पाएंगे. साथ ही, स्थानीय शिल्पकारों के बाजारों में जरूर जाएं, जहां आपको वहां की असली कला देखने को मिलेगी.

यह भी पढ़ें: भारत की वो 5 जगहें, जहां मोबाइल नहीं, दिल की धड़कनें सुनाई देती हैं

लोकल जायके का स्वाद लेकर जानें वहां की संस्कृति

संस्कृति को समझने का सबसे अच्छा तरीका वहां के खाने-पीने से होकर जाता है. उत्सव के दौरान बनने वाले खास स्थानीय व्यंजनों और पारंपरिक मिठाइयों का स्वाद लेना बिल्कुल न भूलें. क्योंकि, स्थानीय बाजारों में मिलने वाले ये पकवान आपको उस जगह की यादों से हमेशा के लिए जोड़ देंगे.

Advertisement

हिस्सा बनकर दिखाएं परंपराओं के प्रति सम्मान

अगर आप वहां की संस्कृति में पूरी तरह घुलना-मिलना चाहते हैं, तो वहां की पारंपरिक वेशभूषा पहनें. जैसे दिवाली पर एथनिक कपड़े या होली पर सफेद कुर्ता पहनकर आप खुद को वहां का हिस्सा महसूस करेंगे और लोग भी आपसे जल्दी जुड़ेंगे. अगर मौका मिले, तो वहां के पूजा-पाठ या लोक नृत्य में शामिल हों, लेकिन स्थानीय नियमों का हमेशा ध्यान रखें, जैसे मंदिरों में सिर ढकना या मर्यादा बनाए रखना.

यह भी पढ़ें: भूलभुलैया नहीं, ये हैं दिल्ली की असली डरावनी जगहें, जहां हवाओं में भी है अनजाना साया!

स्मार्ट प्लानिंग से बचें भीड़भाड़ और शोर से

भीड़ को मात देने के लिए समय का सही चुनाव बहुत जरूरी है. आरती या मुख्य आयोजनों को देखने के लिए सुबह जल्दी का समय चुनें, जब बाकी दुनिया सो रही हो और आप शांति से दर्शन कर सकें. शहर के मुख्य केंद्रों के बजाय आस-पास के छोटे इलाकों या गांवों में जाएं, जहां त्योहार आज भी अपनी पुरानी और सादगी भरी परंपराओं के साथ मनाया जाता है. इसके अलावा, किसी स्थानीय व्यक्ति या गाइड की मदद लें, जो आपको उन छिपी हुई जगहों पर ले जा सके जहां आम पर्यटकों की पहुंच नहीं होती.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement