विलियम रूटो 13 सितंबर 2022 से केन्या के राष्ट्रपति के पद पर हैं. उनका पूरा नाम लियम किपचिरचिर सामोई अराप रूटो
है. वह केन्या के पांचवें राष्ट्रपति हैं. राष्ट्रपति बनने से पहले वह वर्ष 2013 से 2022 तक देश के उपराष्ट्रपति रहे थे.
विलियम रूटो का जन्म 21 दिसंबर 1966 को केन्या में हुआ था. उनका संबंध केन्या के रिफ्ट वैली क्षेत्र के कलेंजिन समुदाय से है. उनके पिता का नाम डेनियल चेरुइयोट और मां का नाम सारा चेरुइयोट था. उनकी पारिवारिक पृष्ठभूमि किपसिगिस और नंदी समुदायों से जुड़ी बताई जाती है.
रूटो ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत संसद सदस्य के रूप में की. वह 1997 से 2007 तक एल्डोरेट नॉर्थ निर्वाचन क्षेत्र से केन्या अफ्रीकन नेशनल यूनियन के उम्मीदवार के रूप में सांसद रहे. वर्ष 2007 में उन्होंने ऑरेंज डेमोक्रेटिक मूवमेंट के टिकट पर चुनाव लड़ा और संसद पहुंचे.
वर्ष 2002 में रूटो ने डेनियल अराप मोई की सरकार में गृह मामलों के मंत्री के रूप में काम किया. इसके बाद मवाई किबाकी की सरकार में उन्हें कृषि मंत्री बनाया गया. उन्होंने वर्ष 2008 से 2010 तक कृषि मंत्रालय संभाला. अप्रैल 2010 से अक्टूबर 2010 तक वह उच्च शिक्षा मंत्री भी रहे.
रूटो ने 2007 के राष्ट्रपति चुनाव में ऑरेंज डेमोक्रेटिक मूवमेंट के भीतर राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी की थी, लेकिन पार्टी के अंदर हुए चुनाव में रेल्ला ओडिंगा से पीछे रह गए. इसके बाद उन्होंने ओडिंगा की उम्मीदवारी का समर्थन किया. वर्ष 2013 के राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने अपनी राष्ट्रपति पद की दावेदारी वापस लेकर उहुरू केन्याटा का समर्थन किया.
2013 में रूटो उहुरू केन्याटा के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार बने. चुनाव में जीत के बाद वह केन्या के उपराष्ट्रपति बने. वर्ष 2017 के आम चुनाव में वह दोबारा उपराष्ट्रपति चुने गए. बाद में उहुरू केन्याटा और रूटो के बीच राजनीतिक मतभेद सामने आए.
वर्ष 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में रूटो यूनाइटेड डेमोक्रेटिक अलायंस के उम्मीदवार थे. उन्होंने रेल्ला ओडिंगा को हराकर राष्ट्रपति चुनाव जीता. चुनाव परिणाम को ओडिंगा के समर्थकों ने चुनौती दी थी, लेकिन केन्या के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव परिणाम को बरकरार रखा.
राष्ट्रपति के रूप में रूटो की सरकार ने विदेश नीति, जलवायु परिवर्तन और अफ्रीकी देशों के बीच सहयोग से जुड़े मुद्दों पर काम किया है. वर्ष 2023 में केन्या ने अफ्रीका जलवायु शिखर सम्मेलन की मेजबानी की, जिसकी अध्यक्षता रूटो ने की थी.
वर्ष 2024 में रूटो सरकार के प्रस्तावित वित्त विधेयक को लेकर केन्या में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. प्रदर्शनकारियों की मौत के बाद रूटो ने विधेयक को वापस लेने की घोषणा की. उनकी सरकार ने देश में पेड़ लगाने के अभियान को भी आगे बढ़ाया है, जिसके तहत वर्ष 2032 तक 15 अरब पेड़ लगाने का लक्ष्य रखा गया है.
टाटा ग्रुप की एक कंपनी को केन्या से कारोबार समेटने के लिए कहा गया है. वहां के राष्ट्रपति विलियम रूटो का कहना है कि टाटा की इस कंपनी के होने या नहीं होने का देश को कोई फायदा नहीं है.