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विष्णु शंकर जैन

विष्णु शंकर जैन

विष्णु शंकर जैन

Advocate

विष्णु शंकर जैन (Vishnu Shankar Jain) एक वकील हैं, जिनका नाम भारत में धार्मिक स्थलों और उनसे जुड़े कानूनी मामलों की पैरवी करने वाले वकिलों में लिया जाता है उनका जन्म 9 अक्टूबर 1986 को हुआ था. उन्होंने वर्ष 2010 में बालाजी लॉ कॉलेज से कानून की पढ़ाई पूरी की.

विष्णु शंकर जैन कई ऐसे मामलों में याचिकाकर्ताओं या पक्षकारों की ओर से अदालत में पेश हुए हैं, जिनमें भारत की विभिन्न मस्जिदों के सर्वे और धार्मिक स्थलों से जुड़े दावे शामिल हैं.

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में वर्ष 2022 में विष्णु शंकर जैन और उनके पिता उन वकीलों की टीम में शामिल थे, जिन्होंने वाराणसी की स्थानीय अदालत में ज्ञानवापी परिसर के सर्वे की मांग करने वाले याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया था. बाद में याचिकाकर्ताओं ने घोषणा की कि जैन और उनकी टीम आगे उनका प्रतिनिधित्व नहीं करेगी.

मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद से जुड़े मामले में वर्ष 2023 में जैन उन वकीलों में शामिल रहे, जिन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट में मस्जिद के सर्वे की मांग से संबंधित याचिका का प्रतिनिधित्व किया. हाई कोर्ट ने शुरुआत में सर्वे की अनुमति दी थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी.

संभल की शाही जामा मस्जिद से जुड़े मामले में वर्ष 2024 में विष्णु शंकर जैन ने अपने पिता के साथ हिंदू पक्ष के याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया. याचिका में मस्जिद के सर्वे की मांग की गई थी. स्थानीय अदालत ने सर्वे की अनुमति दी और सर्वे उसी दिन पूरा किया गया. बाद में दोबारा सर्वे की कोशिश के दौरान हिंसा हुई और कई लोगों की मौत हुई. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाते हुए संबंधित मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई के लिए आगे बढ़ने का निर्देश दिया.

वर्ष 2025 में जैन ने वक्फ अधिनियम, 1995 को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की.

वर्ष 2026 में उन्होंने उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में वीआईपी दर्शन की व्यवस्था को चुनौती देने वाली याचिका में याचिकाकर्ता के वकील के रूप में पैरवी की. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया.

जैन ने दिल्ली के कुतुब मीनार परिसर में स्थित कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद से जुड़े मामले में भी याचिकाओं का प्रतिनिधित्व किया है. इसके अलावा वह मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मामले में हिंदू पक्ष के प्रमुख वकील के रूप में कानूनी लड़ाई से जुड़े हैं. वर्ष 2026 में उन्होंने यूजीसी विनियमों को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं का भी सुप्रीम कोर्ट में प्रतिनिधित्व किया.
 

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