उड़द दाल (Urad Dal) भारतीय रसोई में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख दालों में से एक है. यह दलहन वर्ग की फसल है और भारत के कई हिस्सों में इसकी खेती की जाती है. उड़द का वैज्ञानिक नाम विग्ना मुंगो है. इसे अंग्रेजी में ब्लैक ग्राम कहा जाता है.
उड़द दाल के दाने छोटे और गोल आकार के होते हैं. साबुत उड़द का बाहरी रंग आमतौर पर काला होता है, जबकि इसके अंदर का हिस्सा सफेद या हल्के क्रीम रंग का होता है. इसी कारण बाजार में साबुत उड़द के साथ धुली उड़द और छिलके वाली उड़द भी आसानी से मिलती है.
उड़द दाल मुख्य रूप से दो तरह से इस्तेमाल की जाती है. साबुत उड़द को छिलके के साथ पकाया जाता है, जबकि धुली उड़द का छिलका निकाल दिया जाता है. छिलके वाली उड़द में दाल का एक हिस्सा काला और अंदर का हिस्सा हल्का दिखाई देता है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे स्थानीय तरीके से पकाने की परंपरा है.
भारतीय भोजन में उड़द दाल का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में किया जाता है. इससे दाल, खिचड़ी और कुछ पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं. दक्षिण भारतीय भोजन में उड़द दाल का इस्तेमाल इडली और डोसा के घोल में भी किया जाता है. इसके अलावा यह दाल बड़े और कुछ अन्य नाश्ते के व्यंजनों में भी इस्तेमाल होती है.
उड़द की खेती के लिए गर्म मौसम उपयुक्त माना जाता है. भारत में इसकी खेती खरीफ और कुछ क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में भी की जाती है. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उड़द का उत्पादन होता है.
बाजार में उड़द दाल साबुत, धुली और छिलके वाली अलग-अलग रूप में मिलती है. इसे लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए सूखी और साफ जगह पर रखा जाता है. नमी से बचाकर रखने पर दाल को स्टोर करना आसान रहता है. भारतीय खानपान में अपनी पारंपरिक मौजूदगी के कारण उड़द दाल रोजमर्रा के भोजन से लेकर कई क्षेत्रीय व्यंजनों तक में इस्तेमाल होती है.