थायरॉइड (Thyroid) गर्दन के सामने मौजूद एक छोटी, तितली के आकार की ग्रंथि है. यह शरीर के लिए जरूरी थायरॉइड हार्मोन बनाती है. ये हार्मोन शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा के इस्तेमाल, हृदय गति, शरीर के तापमान और कई दूसरी प्रक्रियाओं को प्रभावित करते हैं.
थायरॉइड ग्रंथि मुख्य रूप से थायरॉक्सिन (T4) और ट्राईआयोडोथायरोनिन (T3) हार्मोन बनाती है. इन हार्मोनों का उत्पादन और नियंत्रण मस्तिष्क में मौजूद हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्रंथि के साथ मिलकर होता है. थायरॉइड की गतिविधि को समझने के लिए डॉक्टर आमतौर पर TSH, T3 और T4 जैसे ब्लड टेस्ट की मदद लेते हैं.
थायरॉइड से जुड़ी सबसे आम समस्याओं में हाइपोथायरॉइडिज्म और हाइपरथायरॉइडिज्म शामिल हैं. हाइपोथायरॉइडिज्म में थायरॉइड ग्रंथि जरूरत के मुताबिक हार्मोन नहीं बना पाती. इसके दौरान थकान, वजन बढ़ना, ठंड ज्यादा लगना, कब्ज, त्वचा का रूखा होना और सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, ये लक्षण दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं में भी हो सकते हैं.
इसके विपरीत, हाइपरथायरॉइडिज्म में शरीर में थायरॉइड हार्मोन की मात्रा जरूरत से ज्यादा हो सकती है. इसमें वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज होना, अधिक पसीना आना, बेचैनी, हाथ कांपना और गर्मी ज्यादा लगना जैसे लक्षण देखे जा सकते हैं.
थायरॉइड की समस्या का पता केवल लक्षणों से नहीं लगाया जा सकता. इसके लिए डॉक्टर मरीज की स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट और जरूरत पड़ने पर अन्य जांच की सलाह दे सकते हैं. इलाज समस्या के प्रकार और उसकी वजह पर निर्भर करता है. कुछ लोगों को नियमित दवा की जरूरत पड़ती है, जबकि कुछ मामलों में अन्य उपचार भी किए जाते हैं.
थायरॉइड से जुड़ी समस्या होने पर बिना डॉक्टर की सलाह के दवा शुरू या बंद नहीं करनी चाहिए. समय पर जांच और नियमित मेडिकल सलाह से इसकी स्थिति को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है.