टाटा केमिकल्स (Tata Chemicals) लिमिटेड भारत की एक बहुराष्ट्रीय कंपनी है, जो रसायन, फसल सुरक्षा और विशेष रसायन से जुड़े उत्पादों के क्षेत्र में काम करती है. कंपनी का मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है. यह टाटा समूह का हिस्सा है और इसके शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हैं. कंपनी की गतिविधियां भारत के अलावा यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका तक फैली हुई हैं.
टाटा केमिकल्स का इतिहास रासायनिक उद्योग के विकास से जुड़ा हुआ है. कंपनी की प्रमुख उत्पादन इकाइयों में गुजरात के मिथापुर स्थित सोडा ऐश संयंत्र का विशेष स्थान है. भारत में स्थापित शुरुआती सोडा ऐश संयंत्रों में मिथापुर संयंत्र भी शामिल है. इसका संचालन वर्ष 1944 में शुरू हुआ था.
टाटा केमिकल्स ने समय के साथ भारत के बाहर भी अपने कारोबार का विस्तार किया. वर्ष 2006 में कंपनी ने ब्रिटेन की रासायनिक कंपनी ब्रूनर मॉन्ड का अधिग्रहण किया. इस कंपनी की केन्या के मगाडी में भी गतिविधियां थीं. इसके बाद 27 मार्च 2008 को टाटा केमिकल्स ने अमेरिका की जनरल केमिकल का अधिग्रहण किया.
अप्रैल 2010 में टाटा केमिकल्स ने गैबॉन स्थित अमोनिया और यूरिया उर्वरक परिसर में 25 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदी. यह सौदा करीब 290 मिलियन अमेरिकी डॉलर का था. बाद में कंपनी ने अपने कारोबार के पुनर्गठन के तहत वर्ष 2016 में भारत में अपना यूरिया कारोबार पुणे स्थित यारा इंडिया को बेच दिया. यारा इंडिया, नॉर्वे की यारा इंटरनेशनल से जुड़ी कंपनी है.
वर्ष 2019 में टाटा समूह ने टाटा केमिकल्स के ब्रांडेड खाद्य कारोबार को टाटा ग्लोबल बेवरेजेज को स्थानांतरित किया. बाद में टाटा ग्लोबल बेवरेजेज का नाम टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स हो गया. यह हस्तांतरण शेयरों के आदान-प्रदान के माध्यम से किया गया था.
टाटा केमिकल्स ने अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में भी एक केंद्र स्थापित किया है. पुणे, महाराष्ट्र में स्थित टाटा केमिकल्स इनोवेशन सेंटर ने वर्ष 2004 में काम शुरू किया था. यहां वैज्ञानिक खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी, उन्नत सामग्री तथा हरित रसायन जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान करते हैं.
कंपनी की सूचीबद्ध सहायक कंपनी रैलिस इंडिया भी कृषि क्षेत्र से जुड़ी है. रैलिस इंडिया के शेयर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध हैं. कंपनी भारत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए कृषि पोषण तथा फसल सुरक्षा से जुड़े उत्पादों पर काम करती है. इसके अलावा रैलिस इंडिया का बीज कारोबार भी है.
वर्ष 2022 में टाटा केमिकल्स यूरोप के माध्यम से कंपनी ने ब्रिटेन में औद्योगिक स्तर का कार्बन कैप्चर और उपयोग संयंत्र स्थापित किया. इस संयंत्र की कार्बन डाइऑक्साइड पकड़ने की क्षमता प्रति वर्ष लगभग 40,000 टन बताई गई है.
टाटा केमिकल्स का कारोबार रसायन, विशेष रसायन, कृषि और संबंधित क्षेत्रों से जुड़ा हुआ है. कंपनी की विभिन्न इकाइयां और सहायक कंपनियां अलग-अलग बाजारों में इन क्षेत्रों से संबंधित गतिविधियां संचालित करती हैं.
टाटा ग्रुप की एक कंपनी को केन्या से कारोबार समेटने के लिए कहा गया है. वहां के राष्ट्रपति विलियम रूटो का कहना है कि टाटा की इस कंपनी के होने या नहीं होने का देश को कोई फायदा नहीं है.