देश की सुरक्षा, सामरिक ताकत और रक्षा व्यवस्था में आत्मनिर्भरता से जुड़े अहम मुद्दों पर मंथन के लिए इंडिया टुडे ग्रुप की ओर से 7 सितंबर 2026 को ‘सुरक्षा सभा आज तक’ का आयोजन किया जा रहा है. इस खास कार्यक्रम में देश की तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, रक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञ, वैज्ञानिक, रणनीतिक मामलों के जानकार और प्रमुख हस्तियां शिरकत करेंगी. कार्यक्रम की शुरुआत कॉन्क्लेव के उद्घाटन और दीप प्रज्ज्वलन से होगी. इसके बाद चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन. एस. राजासुब्रमणि ‘सबसे आगे हिंदुस्तानी’ विषय पर उद्घाटन संबोधन देंगे. कार्यक्रम का समापन ‘ये नया भारत है’ सत्र से होगा, जिसमें केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह संबोधित करेंगे. आयोजन से जुड़ी विस्तृत कवरेज यहां देखें.
भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं की भूमिका बीते कुछ दशकों में तेजी से बदली है, जहां कभी महिलाओं की मौजूदगी चुनिंदा क्षेत्रों तक सीमित थी, वहीं आज वे नेतृत्व से लेकर कॉम्बैट और तकनीकी भूमिकाओं तक अपनी जगह बना रही हैं. आरती सरीन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कैसे बदलती नीतियों, बढ़ते अवसरों और महिलाओं की क्षमता ने सेना में उनकी भूमिका का दायरा लगातार बढ़ाया है.
आजतक सुरक्षा सभा में ब्रिगेडियर सौरभ सिंह शेखावत और कर्नल राजीव भरवान ने वर्दी की आवाज साझा की. युवाओं को रील नहीं रियल सच सुनाने, जिम्मेदारी लेने, डर का सामना करने और देश को प्राथमिकता देने की बात कही.
सीडीएस जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने आजतक सुरक्षा सभा में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सशस्त्र बलों की नहीं, बल्कि सरकार, उद्योग, तकनीक, अकादमिया और पूरे समाज की जिम्मेदारी है. बदलते खतरों, मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस और आत्मनिर्भरता पर जोर दिया.
आजतक के सुरक्षा सभा कार्यक्रम 'सबसे आगे हिंदुस्तानी' में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने महत्वपूर्ण संबोधन दिया. उन्होंने साफ कहा कि आज के समय में राष्ट्रीय सुरक्षा सिर्फ सशस्त्र बलों की जिम्मेदारी नहीं रह गई है. सरकार, उद्योग, प्रौद्योगिकी समुदाय, अकादमिया और पूरा समाज इसमें बराबर की भूमिका निभाते हैं. आसपास का सुरक्षा वातावरण बहुत तेजी से बदल रहा है. इसलिए तैयारी का तरीका भी बदलना जरूरी है. जनरल सुब्रमणि ने अपनी बात को छह मुख्य बिंदुओं के जरिए रखा. देखें संबोधन.