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सोयाबीन

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सोयाबीन (Soybean) एक प्रमुख तिलहनी और दलहनी फसल है, जिसका वैज्ञानिक नाम Glycine max है. यह फैबेसी (Fabaceae) या लेग्यूम (Legume) परिवार का पौधा है. सोयाबीन का उपयोग खाद्य पदार्थों, पशु आहार और औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में बड़े पैमाने पर किया जाता है. दुनिया के कई देशों में इसकी खेती व्यावसायिक स्तर पर की जाती है और यह वैश्विक कृषि अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण फसलों में शामिल है.

सोयाबीन की उत्पत्ति पूर्वी एशिया, विशेष रूप से चीन में मानी जाती है. इसके बाद इसकी खेती जापान, कोरिया और अन्य देशों में फैल गई. भारत में सोयाबीन की व्यावसायिक खेती का विस्तार मुख्य रूप से 1970 के दशक के बाद हुआ. वर्तमान में भारत दुनिया के प्रमुख सोयाबीन उत्पादक देशों में शामिल है.

भारत में सोयाबीन की खेती मुख्य रूप से मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में की जाती है. मध्य प्रदेश को देश का सबसे बड़ा सोयाबीन उत्पादक राज्य माना जाता है, इसलिए इसे "सोयाबीन स्टेट" भी कहा जाता है. यह खरीफ मौसम की फसल है, जिसकी बुवाई सामान्यतः जून-जुलाई में मानसून शुरू होने के बाद की जाती है और कटाई सितंबर से नवंबर के बीच होती है.

सोयाबीन का पौधा लगभग 30 से 100 सेंटीमीटर तक ऊंचा होता है. इसमें हरे रंग की फलियां लगती हैं, जिनके भीतर छोटे गोल या अंडाकार बीज होते हैं. बीजों का रंग पीला, हल्का भूरा, काला या हरा हो सकता है, जो किस्म पर निर्भर करता है.

सोयाबीन का उपयोग कई प्रकार के खाद्य और औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में किया जाता है. इससे सोया तेल, सोया आटा, सोया चंक्स, टोफू, सोया दूध और अन्य प्रसंस्कृत उत्पाद तैयार किए जाते हैं. इसके तेल निकालने के बाद बचा हुआ सोया मील (Soybean Meal) पशु और पोल्ट्री आहार उद्योग में व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है. इसके अलावा इसका उपयोग बायोडीजल, स्याही, पेंट और अन्य औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में भी किया जाता है.

भारत में सोयाबीन की खरीद और बिक्री कृषि मंडियों के माध्यम से होती है. इसके दाम उत्पादन, मौसम, निर्यात, आयात और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार बदलते रहते हैं.

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