सलोन उत्तर प्रदेश (Salon, Uttar Pradesh) के रायबरेली जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा और नगर पंचायत है. यह सलोन तहसील के साथ-साथ सामुदायिक विकास खंड का मुख्यालय भी है. कभी सलोन पूरे जिले का मुख्यालय हुआ करता था, लेकिन 1857 के विद्रोह के बाद जिला मुख्यालय को यहां से स्थानांतरित कर दिया गया. आज सलोन रायबरेली जिले के प्रमुख कस्बों में शामिल है और आसपास के ग्रामीण इलाकों के लिए प्रशासनिक तथा स्थानीय व्यापार का महत्वपूर्ण केंद्र है.
सलोन सई नदी से कुछ दूरी पर दक्षिण दिशा में स्थित है. यह रायबरेली-प्रतापगढ़ और जायस-खागा मार्गों के मिलन बिंदु के पास बसा है. यहां से डलमऊ, मानिकपुर और कुंडा की ओर जाने वाली सड़कें भी जुड़ती हैं. कस्बे के पूर्वी हिस्से में एक बड़ी झील भी स्थित है, जो स्थानीय भौगोलिक पहचान का हिस्सा है. सलोन करीब 110 मीटर की औसत ऊंचाई पर स्थित है.
सलोन के इतिहास को लेकर कई स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं. एक प्रसिद्ध किंवदंती के अनुसार इस कस्बे की स्थापना सालिवाहन ने की थी, जिन्हें बैस राजपूतों का पूर्वज माना जाता है. लंबे समय तक यह इलाका भर शासकों के अधीन रहा. बाद में यहां मुस्लिम शासन का प्रभाव बढ़ा. हालांकि मुस्लिम शासकों का प्रभाव इस क्षेत्र में काफी लंबे समय तक सीमित रहा और 18वीं शताब्दी के अंतिम वर्षों में आसफ-उद-दौला के शासनकाल में यहां उनका प्रभाव अधिक मजबूत हुआ.
अवध के नवाबों के समय सलोन एक चकला का मुख्यालय था. यहां करीब 350 सैनिकों की छावनी भी थी. इनमें से 50 सैनिक कस्बे के दक्षिणी हिस्से में स्थित फौजदार के मिट्टी के किले में तैनात रहते थे. इससे उस समय सलोन के प्रशासनिक और सामरिक महत्व का अंदाजा लगाया जा सकता है.
लगभग 1800 के आसपास सलोन एक समृद्ध कस्बा माना जाता था. हालांकि 19वीं शताब्दी के अंत तक इसकी आर्थिक स्थिति में गिरावट आने लगी. 1856 में अंग्रेजों द्वारा अवध का विलय किए जाने के बाद सलोन को जिला मुख्यालय बनाया गया था. लेकिन 1857 के विद्रोह के बाद यह दर्जा खत्म कर दिया गया. इसके बाद सलोन को प्रतापगढ़ जिले की तहसील बनाया गया. वर्ष 1869 में इसे रायबरेली जिले में शामिल कर दिया गया.
20वीं शताब्दी की शुरुआत में सलोन को एक छोटे लेकिन ऐतिहासिक कस्बे के रूप में देखा जाता था. उस समय यह पेड़ों के झुरमुट और ताड़ के पेड़ों के समूहों से घिरा हुआ बताया जाता था. यहां फजल गंज नाम का स्थानीय स्तर पर महत्वपूर्ण बाजार था, जहां सप्ताह में दो दिन बाजार लगता था.
उस समय सलोन में तहसील मुख्यालय के अलावा पुलिस थाना, डाकघर, पशु पकड़ने का केंद्र और एक बड़ा मिडिल वर्नाक्युलर स्कूल भी मौजूद था. इससे पता चलता है कि उस दौर में भी सलोन आसपास के क्षेत्र के लिए प्रशासन, शिक्षा और व्यापार का अहम केंद्र था.
आज सलोन की पहचान उसके पुराने इतिहास और प्रशासनिक महत्व के साथ बनी हुई है. तहसील और विकास खंड मुख्यालय होने के कारण आसपास के गांवों के लोग विभिन्न सरकारी और व्यावसायिक कामों के लिए यहां आते हैं. ऐतिहासिक विरासत, स्थानीय बाजार और ग्रामीण क्षेत्र से मजबूत जुड़ाव सलोन को रायबरेली जिले के महत्वपूर्ण कस्बों में स्थान देते हैं.