राजेश खन्ना (Rajesh Khanna) हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के उन कलाकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने 1960 और 1970 के दशक में अपनी अलग पहचान बनाई. उन्हें भारतीय सिनेमा का पहला "सुपरस्टार" कहा जाता है. उनकी फिल्मों, अभिनय और लोकप्रियता ने उन्हें लंबे समय तक दर्शकों के बीच चर्चा का विषय बनाए रखा. राजेश खन्ना का निधन 18 जुलाई 2012 को मुंबई में हुआ था.
राजेश खन्ना का जन्म 29 दिसंबर 1942 को पंजाब के अमृतसर में हुआ था. उनका वास्तविक नाम जतिन खन्ना था. बाद में उन्होंने फिल्मों में आने से पहले अपना नाम बदलकर राजेश खन्ना रख लिया. उनकी पढ़ाई मुंबई में हुई और कॉलेज के दिनों से ही उन्हें अभिनय में रुचि थी. उन्होंने थिएटर में भी काम किया और इसके बाद फिल्मी दुनिया में कदम रखा.
साल 1965 में उन्होंने एक राष्ट्रीय स्तर की टैलेंट प्रतियोगिता जीती, जिसके बाद उन्हें फिल्मों में काम करने का मौका मिला. उनकी पहली फिल्म 'आखिरी खत' (1966) थी. इसके बाद उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, लेकिन 'आराधना' (1969) से उन्हें बड़ी पहचान मिली. इस फिल्म के बाद उनका करियर तेजी से आगे बढ़ा.
1970 के दशक में राजेश खन्ना ने लगातार कई सफल फिल्मों में काम किया. इनमें दो रास्ते, आनंद, कटी पतंग, सफर, हाथी मेरे साथी, अमर प्रेम, बावर्ची, नमक हराम, दाग, प्रेम नगर, अवतार और रोटी जैसी फिल्में शामिल हैं. उनकी कई फिल्मों के गीत भी काफी लोकप्रिय हुए, जिन्हें आज भी सुना जाता है.
राजेश खन्ना ने 1973 में अभिनेत्री डिंपल कपाड़िया से शादी की. उनकी दो बेटियां ट्विंकल खन्ना और रिंकी खन्ना हैं. ट्विंकल खन्ना ने भी फिल्मों में काम किया और बाद में लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हुईं.
फिल्मों के अलावा राजेश खन्ना राजनीति से भी जुड़े. 1992 में उन्होंने नई दिल्ली लोकसभा सीट से चुनाव जीता और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सांसद बने. उन्होंने कुछ वर्षों तक सक्रिय राजनीति में भी काम किया.
अपने लंबे फिल्मी करियर में राजेश खन्ना ने करीब 180 से अधिक फिल्मों और कई लघु फिल्मों में अभिनय किया. उन्हें तीन फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार और कई अन्य सम्मान मिले. भारत सरकार ने 2013 में उन्हें मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित किया.