निमोनिया (Pneumonia) फेफड़ों में होने वाला एक संक्रमण है, जो एक या दोनों फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है. इस बीमारी में फेफड़ों की छोटी-छोटी वायु थैलियों, जिन्हें एल्वियोली कहा जाता है, में तरल या पस भर सकता है. इसकी वजह से सांस लेने में परेशानी हो सकती है. निमोनिया बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए अधिक गंभीर हो सकता है.
निमोनिया कई कारणों से हो सकता है. बैक्टीरिया और वायरस इसके आम कारणों में शामिल हैं. कुछ मामलों में फंगल संक्रमण भी निमोनिया की वजह बन सकता है. कभी-कभी किसी अन्य संक्रमण के बाद भी व्यक्ति को निमोनिया हो सकता है. इसका प्रकार और गंभीरता संक्रमण पैदा करने वाले कारण तथा व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है.
निमोनिया के सामान्य लक्षणों में खांसी, बुखार, ठंड लगना, सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द और कमजोरी शामिल हैं. कुछ लोगों में खांसी के साथ बलगम भी आ सकता है. बच्चों में तेज सांस लेना, दूध या खाना कम लेना और असामान्य रूप से सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं.
निमोनिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्वास्थ्य इतिहास की जानकारी लेते हैं. जरूरत पड़ने पर छाती का एक्स-रे, रक्त जांच और अन्य परीक्षण किए जा सकते हैं. इलाज बीमारी के कारण और उसकी गंभीरता के अनुसार तय किया जाता है. बैक्टीरियल निमोनिया में डॉक्टर एंटीबायोटिक दे सकते हैं, जबकि वायरल निमोनिया का इलाज अलग तरीके से किया जाता है.
निमोनिया से बचाव के लिए हाथों की सफाई रखना, खांसते या छींकते समय मुंह ढकना और संक्रमण से बचने की कोशिश करना जरूरी है. कुछ प्रकार के निमोनिया से बचाव के लिए वैक्सीन भी उपलब्ध हैं. धूम्रपान से दूरी बनाना भी फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है.
अगर किसी व्यक्ति को सांस लेने में ज्यादा परेशानी, लगातार तेज बुखार, सीने में तेज दर्द, होंठ या चेहरा नीला पड़ना या अचानक ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लेनी चाहिए.
इरकुत्स्क में अज्ञात निमोनिया से महिला की मौत के बाद उसके संपर्क में आए लोगों में से दो कोविड और दो राइनोवायरस पॉजिटिव मिले. लैब जांच में अन्य संक्रमण नहीं. दोनों वायरस सांस से फैलते हैं.