पेड़ा (Peda) भारत की पारंपरिक मिठाइयों में शामिल एक लोकप्रिय व्यंजन है. इसे खास तौर पर दूध और खोया से तैयार किया जाता है. पेड़े का इस्तेमाल धार्मिक अवसरों, त्योहारों, पूजा और पारिवारिक कार्यक्रमों में भी किया जाता है. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे बनाने और परोसने का तरीका अलग हो सकता है.
पेड़ा बनाने के लिए मुख्य रूप से मावा या खोया, चीनी और इलायची का इस्तेमाल किया जाता है. कुछ जगहों पर इसमें केसर, दूध, घी और सूखे मेवे भी मिलाए जाते हैं. खोया और चीनी को धीमी आंच पर पकाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे ठंडा करके छोटे आकार में गोल या चपटे पेड़े का रूप दिया जाता है. ऊपर से बादाम, पिस्ता या इलायची से सजावट की जा सकती है.
भारत में पेड़े की कई क्षेत्रीय किस्में मिलती हैं. उत्तर प्रदेश के मथुरा का पेड़ा देशभर में जाना जाता है. मथुरा पेड़ा यहां की पारंपरिक मिठाई संस्कृति से जुड़ा हुआ है. ब्रज क्षेत्र में धार्मिक आयोजनों और मंदिरों में पेड़े का इस्तेमाल प्रसाद के रूप में भी किया जाता है.
पेड़े की दूसरी प्रसिद्ध किस्मों में धारवाड़ पेड़ा और कर्नाटक के कुछ क्षेत्रों में मिलने वाले स्थानीय पेड़े शामिल हैं. इनके स्वाद, बनावट और सामग्री में अंतर देखा जाता है. कुछ पेड़े नरम होते हैं, जबकि कुछ की बनावट थोड़ी सूखी और दानेदार होती है.
पेड़े को सामान्य तौर पर मिठाई की दुकानों, हलवाई की दुकानों और धार्मिक स्थलों के आसपास खरीदा जा सकता है. आज इसके पैक्ड रूप भी बाजार में उपलब्ध हैं. इन्हें अलग-अलग वजन और पैकिंग में बेचा जाता है.
घरेलू स्तर पर भी पेड़ा बनाया जाता है. इसके लिए खोया या दूध को पकाकर उसमें चीनी मिलाई जाती है. मिश्रण तैयार होने के बाद छोटे हिस्से बनाकर उन्हें पेड़े का आकार दिया जाता है. इस तरह पेड़ा भारतीय खानपान और पारंपरिक मिठाई संस्कृति का एक जाना-पहचाना हिस्सा बना हुआ है.
बाजार की मिठाई की बजाय आप घर पर ही चावल से पेड़े बना सकते हैं, जिसका स्वाद बाजार की मिठाइयों से भी बहुत अच्छा होता है. इनको आप बिना खोया और मेवे के ही घर पर तैयार कर सकते हैं, आइए आपको इसकी आसान रेसिपी बताते हैं.